NL Interviews
एनएल इंटरव्यू: रशीद किदवई, उनकी किताब 'द हाउस ऑफ़ सिंधियाज़’ और भारतीय राजनीति में सिंधिया घराना
"यह एक बेहद दिलचस्प तथ्य है कि आज़ादी के बाद सिंधिया घराना, नेहरू परिवार से भी ज्यादा समय तक राजनीति में हिस्सेदार रहने वाला परिवार है. लोग यही समझते हैं कि देश में नेहरू-गांधी परिवार ने सत्ता को पकड़े रखा लेकिन सिंधिया का जुड़ाव ज़्यादा लम्बा है."
यह बात पत्रकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई ने अतुल चौरसिया को बताई. इस बातचीत में उन्होंने अपनी नई किताब 'द हाउस ऑफ़ सिंधियाज- ए सागा ऑफ़ पावर, पॉलिटिक्स एंड एन्ट्रीग' और सिंधिया परिवार से जुड़ी कई दिलचस्प जानकारियां साझा की.
राजमाता के नाम से मशहूर विजयाराजे सिंधिया और उनके बेटे माधवराव सिंधिया के संबंधों में तल्खी पर रशीद कहते हैं, "राजमाता नेपाल से आई थी. वो एक साधारण परिवार में रही. उन्होंने अंग्रेजी तालीम हासिल की थी. लखनऊ के कॉलेज से पढ़ाई की. लेकिन सर्वधर्म से वो थोड़ा दूर रही. वो केवल अपनी परम्परा अपनी आस्था के इर्द-गिर्द रही. लेकिन माधवराव सिंधिया पश्चिमी कल्चर के बीच रहे. उनकी परवरिश उसी माहौल में हुई. वो खुद को भाजपा या जनसंघ की राजनीति में फिट नहीं मानते थे. जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया और धीरे-धीरे मां-बेटे के संबंधों में तल्खी आती चली गई और वो एक दूसरे से दूर होते चले गए.”
इन रिश्तों के बीच एक बाहरी शख्स भी खड़ा नज़र आता है जिसका नाम है सरदार आंग्रे. सरदार आंग्रे का विजयाराजे पर बहुत गहरा प्रभाव था. इस रिश्ते को लेकर भी तमाम कहानियां और किंवदंतियां है. लेकिन बेटे माधवराव के साथ संबंधों में खटास के पीछे विजयाराजे का संरदार आंग्रे से वह करीबी रिश्ता भी एक वजह रहा.
राजघराने का इतिहास मराठों की वरदहस्त में शुरू होता है, फिर मुगलों के विरोध से परवान चढ़ता है. आगे जाकर मुगलों से तालमेल की कहानी भी हम देखते हैं जहां मिलकर अंग्रेजों को मात देने की मंशा दिखती है. लेकिन फिर वक्त ऐसा आता है जहां सिंधिया परिवार भयानक रूप से अंग्रेजीपरस्ती भी दिखाता है. घराने में लोगों के नाम तक अंग्रेज बादशाहों के नाम पर रखे जाते हैंं.
इन तमाम उतार-चढ़ावों से गुजरते हुए खुद को भारत की राजनीति में कायम रखने, प्रासंगिक रख पाने की यह दिलचस्प कहानी अपनी किताब में रशीद किदवई ने समेटी है.
Also Read
-
Company behind CBSE evaluation platform says complaints limited to ‘one or two cases’
-
Dharmendra Pradhan’s guide to surviving India’s exam crisis
-
I had to leave India to become a doctor. NEET exposed a system I already knew
-
DD News anchor’s latest gem: Turning a CBSE student’s grievance into Pak conspiracy
-
‘Let them drink water’: Media is burying the corporate plunder driving our climate crisis