Khabar Baazi
क्या सेकेंड वेव के बीच अपनी उपलब्धियों के प्रचार की तैयारी में है मोदी सरकार?
पूरा देश जब करोना की सेकेंड वेव से पस्त हुआ पड़ा है, मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. ऐसे में प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की ओर से एक पत्र जारी किया गया है जिसमें मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल यानी मई 2019 के बाद दो सालों के दौरान सरकार के सभी मंत्रालयों से उनकी उपलब्धियों का ब्यौरा मांगा गया है. इस बाबत जारी एक पत्र न्यूज़लॉन्ड्री को मिला जो कि 16 अप्रैल को जारी हुआ है. पीआईबी के प्रधान महानिदेशक जयदीप भटनागर की तरफ से जारी इस पत्र में सभी मंत्रालयों से कहा गया है कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अब तक सभी मंत्रालय अपनी उपल्बधियों का एक राइट अप भेजें.
पत्र में अनुरोध किया गया है कि अधिकतम दो पन्नो में उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण दें. आगे कहा गया है कि कृपया हमें सरकार के पिछले दो वर्षों की उपलब्धियां cordpib@gmail.com और pdg-pib@nic.in पर मंगलवार 20 अप्रैल 2021 तक ईमेल करें.
इसके अलावा राइटअप संबंधित मंत्रालय से जुड़े पीआईबी अधिकारी को भी सौंपा जा सकता है, जो उसी के संबंध में आपके कार्यालय के संपर्क में रहेगा.
कोरोना की दूसरी लहर में जब कोविड-19 के चलते देशभर में हाहाकार मचा हुआ है तब सरकार अपने कार्यों की उपलब्धियों को लेकर एक कार्यक्रम की योजना बना रही है. यह सवाल खड़ा होता है कि क्या इस महामारी के बीच भी सरकार प्रचार प्रसार में लगी है.
बता दें कि जिस दिन यह पत्र जारी हुआ है उस दिन यानी 16 अप्रैल को देश भर में 2,17,353 कोरोना के मामले सामने आए थे. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि उस दिन 1,185 लोगों की कोरोना से मौत हो गई थी. यानी कोरोना की दूसरी वेव अपने चढ़ान पर थी.
वहीं सक्रिय मामले इस दोरान बढ़कर 15,69,743 हो गए. इस दिन महाराष्ट्र में सबसे अधिक 61,695 कोरोना के मामले सामने आए. जबकि उत्तर प्रदेश में 22,339 मामले और दिल्ली में 16,699 कोरोना के मामले सामने आए.
Also Read
-
Cheetahs in Kuno, lions in waiting: Inside India’s most contested conservation project
-
The sadhu wants pulao. The snob rejects veg biryani. Culinary history disagrees with both
-
Can longevity be a political message? Decoding the politics of the PM@4399 celebrations
-
बुलेट-थार के लालच से टॉपर्स की छीना-झपटी तक: बिहार के कोचिंग संस्थानों की जंग
-
Being a Dalit feminist on social media and illegal mining in Tamil Nadu