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पॉडकास्ट: कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए यूरोपीय देशों की गलतियों से सीखे भारत
कोविड-19 पॉडकास्ट. इस सीरीज के तहत हम देश और दुनिया के अलहदा मीडिया संस्थानों द्वारा प्रकाशित होने वाली कोरोना से संबंधित लेख और रिपोर्ट्स को हिंदी पॉडकास्ट की शक्ल में आपके सामने रख रहे हैं. यह मूल लेख का अविकल अनुवाद नहीं बल्कि भावार्थ है.
इस पॉडकास्ट में हम ‘द गार्डियन’ में छपे रिचर्ड हॉर्टन का लेख प्रस्तुत कर रहे हैं. इसका हिंदी अनुवाद प्रभात ख़बर दिल्ली के ब्य़ूरो प्रमुख प्रकाश के रे ने किया है. लांसेट जर्नल के संपादक रिचर्ड हॉर्टन ने इस लेख में बताया कि चीन द्वारा वायरस के खतरे को दुनिया के सामने रखने के बाद भी यूरोपीय देशों ने इसकी अनदेखी किया, जिसके कारण यह वैश्विक महामारी की स्थिति हमारे समाने है.
हॉर्टन कहते है चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी और 1.1 करोड़ की आबादी वाले शहर वुहान में दिसंबर महीने में पहली बार 800 से ज्यादा मामले इस नई बीमारी के कारण आए थे. तब चीनी वैज्ञानिकों ने कहा था कि मौतों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है. उस लेख में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा के साजो-सामान उपलब्ध कराने की पुरजोर सलाह दी गई थी. साथ ही वायरस के'महामारी फैलाने की सामर्थ्य' को देखते हुए इस पर सावधानीपूर्वक निगरानी रखने की बात की थी.
लेकिन ब्रिटिश सरकार के चिकित्सकीय और वैज्ञानिक सलाहकारों ने चीन की चेतावनी को अनसुना कर दिया था. वैज्ञानिकों को लगा की इस नए वायरस का इलाज इंफ्लुएंजा की तरह किया जा सकता है.
इस पॉडकास्ट से हमें पता चलता है कि यूरोपीय देशों ने जिस तरह की गलतियां की, हमें वह दोहराना नहीं है क्योंकि अगर हमने एक बार वायरस को फैलने का मौका दे दिया तो फिर शायद हमें दूसरा मौका नहीं मिले.
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