NL Tippani
स्वर्ग में चायवाले की टपरी पर एसआईआर की चर्चा और टीएन शेषन की एंट्री
2047 में ही भारत विकसित राष्ट्र बन चुका था. विकास के एक्सप्रेसवे पर भर्राटा भाग रहा था. नीचे इतना विकसित भारत देख ऊपर स्वर्ग में सनातन चायवाला मन ही मन प्रफुल्लित होकर यह सब निहार रहा था. उसकी निगाहों में हसरत थी. सुबह का वक्त था. रेडियो पर उसका पसंदीदा गाना बज रहा था- लैला तेरी ले लेगी, तू लिख के लेले…
गाना खत्म होते न होते टपरी पर कुछ पुराने चावल नज़र आने लगे थे. उनमें से एक थे जवाहर लाल नेहरू और दूसरे थे अटल बिहारी वाजपेयी. दोनों ने दोनों तरफ से गांधीजी को अपने कंधों से सहारा दे रखा था. गांधीजी की लाठी गायब हो गई थी. अटल ने पूछा कि बापू आपकी लाठी कहां हेरा गई. बापू ने लरजती जुबान से कहा कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस वाले आए थे. लाठी उधार मांग कर ले गए हैं. कुछ जनसेवा का काम करना है.
Also Read
-
Too big, too costly, too far: Delhi’s new protest sites put to the test
-
‘People scared of economics’: Sarthak Pradhan on your money, GST and Fiscal Fables
-
Ex-ISRO chairman on privatisation and what left the space community ‘alarmed’
-
No, Neha Bora did not call for Bangladesh-like situation in India; viral claim misses important context
-
How failure to destroy juvenile crime records is hurting children’s rehabilitation