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‘अच्छा हो कि सरकार हमें विदेशी ही बता दे’: एसआईआर से परेशान दिल्लीवासियों का हाल
देश में एक तरफ जहां चुनाव आयोग की ओर से जारी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को निरस्त करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के गिरफ्तारी की मांग उठ रही रही है तो वहीं दूसरी तरफ राजधानी दिल्ली में लाखों मतदाता एक दूसरे फेर में फंसे हैं.
ये लोग दिल्ली के उन 33 लाख मतदाताओं मे से हैं, जिन्हें चुनाव आयोग की तरफ से नोटिस जारी किया गया है. यह नोटिस दिल्ली के उन वोटरो को दिया है, जो एसआईआर की ड्राफ्ट लिस्ट मे जगह नहीं बना पाए. वहीं, अब अंतिम मतदाता सूची मे अपना नाम जुड़वाने के लिए दस्तावेज लेकर मतदाता केंद्रों के बाहर घंटो कतार में खड़े इंतजार कर रहे हैं.
हमने इस प्रक्रिया की जमीनी हकीकत समझने के लिए दिल्ली के ऐसे ही दो मतदाता केंद्रों का दौरा किया. अपनी पड़ताल में हमने पाया कि इनमें से अधिकतर लोग काम से छुट्टी लेकर आए हैं. वहीं, दिहाड़ीदार मजदूर इस प्रक्रिया से नाराज दिखे क्योंकि इसके चलते उनकी हर रोज की दिहाड़ी का नुकसान हो रहा है.
कोंडली के रहने वाले संदीप कुमार ने बताया कि वह 700 रुपए दिहाड़ी पर काम करते हैं लेकिन एसआईआर की वजह से उन्हें दिहाड़ी छोड़नी पड़ी. अपनी परेशानी बताते समय वह कहते हैं, “एक दिन की दिहाड़ी छूटने से महीने का बजट गड़बड़ा जाता है. आज मेरा सात सौ का नुकसान हो गया. अगर आज काम पर जाता तो पांच सौ रुपये और जोड़कर गैस सिलेंडर आ जाता जो महीने भर चलता.”
इसी तरह बुराड़ी के 52 वर्षीय राजेश बताते हैं कि वह मतदाता केंद्र का चक्कर लगाकर हताश हो चुके हैं. वह कहते हैं, “इस उत्पीड़न से तो अच्छा है सरकार हमें दूसरे देश का नागरिक ही घोषित कर दे. मैं दिल्ली में तीस साल से वोट कर रहा हूं लेकिन आज मुझे सबूत देना पड़ रहा है कि मै वोटर हूं या नहीं.”
वहीं, इस प्रासेस पर सवाल उठाते हुए शबीना कहती हैं, “मुझे समझ में नही आता कि वह कौन सा ऐसा दस्तावेज होगा, जिसे दिखाकर बता पाएं कि हम इसी देश के नागरिक हैं.”
देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट.
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