NL Tippani
डंकापति का फूफाशास्त्र और लोकतंत्र का पांचवा स्तंभ लठैती
आर्यावर्त के तमाम हिस्से बाढ़ बारिश से तबाह थे. अल नीनो के चक्कर में बरसात कम हुई थी. लेकिन जहां हुई वहां छप्पर फाड़ दिया. और छप्पर फटे तो तबाही आनी ही थी. इसी माहौल में दरबार की वापसी हो रही है. इस बार डंकापति को फूफाजी की याद आई. ऐसा लगा कि फूफाजी बहुत नाराज हैं. वरना बीते दस-पंद्रह सालों में किसी ने भी उन्हें फूफाजी को इतनी शिद्दत से याद करते नहीं देखा.
दूसरी तरफ डंकापति के राज में लोकतंत्र के पहरेदारों की एक नई प्रजाति तेजी से अपना काम कर रही है. उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के चार पिलर्स में एक पांचवा पिलर भी जोड़ दिया है. विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिक और पत्रकारिता के साथ पांचवां पिलर मोदीजी के आगमन के बाद जुड़ा है. इस पिलर का कोई औपचारिक नामकरण अभी बाकी है. आप इसे लठैती भी कह सकते हैं.
तो देखिए इस बार की टिप्पणी में डंकापति के दरबार की झलकियां.
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