Ground Report Videos
मेवात के सरकारी स्कूल: जर्जर भवन, बदहाल टॉयलेट और चटाई पर पढ़ाई
किसी भी देश का भविष्य उसकी कक्षाओं में लिखा जाता है. लेकिन हरियाणा के नूंह जिले के कई सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए ये कक्षाएं ही बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं. कहीं बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ रहे हैं, तो कहीं स्कूल की इमारत जर्जर है. शौचालय हैं तो पानी नहीं और मिड-डे मील को लेकर भी स्थानीय लोगों के बीच भरोसे की कमी है.
2018 में नीति आयोग ने नूंह को देश के आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल किया था. इसके पीछे मकसद शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में तेजी से सुधार लाना था. लेकिन आठ साल बाद भी जिले के कई सरकारी स्कूलों की जमीनी तस्वीर चिंताजनक है.
हाल ही में आए हरियाणा बोर्ड के 10वीं के नतीजों में नूंह का प्रदर्शन पूरे राज्य में सबसे खराब रहा. जिले का पास प्रतिशत करीब 69 फीसदी रहा, जबकि राज्य का औसत 89.60 फीसदी था.
हम इन्हीं आंकड़ों के पीछे की वजह तलाशने नूंह के सरकारी स्कूलों में पहुंचे. वहां हमें सिर्फ खराब नतीजे नहीं मिले, बल्कि उन परिस्थितियों की तस्वीर भी दिखी जिनमें बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं.
नूंह के सरकारी स्कूलों में हमें और क्या-क्या देखने को मिला, बच्चों और स्थानीय लोगों ने क्या बताया और इन हालातों पर प्रशासन का क्या कहना है जानने के लिए देखिए हमारी ये ग्राउंड रिपोर्ट.
एक स्वतंत्र मीडिया जिन सवालों के जवाब मिलने चाहिए उन सवालों को पूछ कर जनतंत्र को थामे रखता है, जिन कहानियों को कहना जरूरी है उन्हें कह कर उसे बचाए रखता है. स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें. आज ही सब्सक्राइब करें.
Also Read: दिल्ली में स्कूल फीस पर लगाम बस एक मृगतृष्णा
Also Read
-
‘A journalist only until I’m lathi-charged’: Meet the content creators behind Delhi’s protest videos
-
Inside CJP: Mehr Pasricha on how the movement works, and its critics
-
Neha Bora, the angriest person in town: A profile of rage
-
A journalist recalls Delhi detention: A reluctant baton, a press ID ignored, and stranger’s help
-
Who are the lumpen elements given a free run against protesters in CP?