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‘सिर्फ सीने के ऊपर का हिस्सा मिला’: नेपाल की आपदा के बाद दिल्ली में बसे नेपाली परिवारों का दर्द
26 अगस्त को सुनीता थापा और उनका बेटा दिनेश थापा त्रिशूली बाजार स्थित अपने घर पर थे. अचानक नेपाल की शांत वादियों से आए एक जल प्रलय ने उन्हें संभलने का भी मौका नहीं दिया. बाढ़ के बाद मां-बेटे दोनों लापता हो गए. तलाश शुरू हुई और करीब तीन दिन बाद दिनेश थापा का शव नारायणगढ़ के मैदानी इलाके में मिला.
दिल्ली के शकरपुर में सुनीता की चचेरी बहन शोभा रानाभाट रहती हैं. शोभा के पति जीत बहादुर रानाभाट न्यूजलॉन्ड्री को बताते हैं, “उसका शरीर कटा हुआ था. सिर्फ सीने के ऊपर का हिस्सा मिला. चेहरा और सीना साफ था, इसलिए उसकी पहचान हो सकी. इसके बाद स्थानीय लोगों ने नदी किनारे ही दिनेश का अंतिम संस्कार कर दिया. लेकिन सुनीता थापा का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है.”
जीत के मुताबिक, पानी के तेज बहाव में घर और दुकान बह गए. सुनीता के पति उस समय काम के सिलसिले में काठमांडू गए थे और अभी तक प्रभावित इलाके में नहीं पहुंच सके हैं.
जीत बताते हैं कि प्रशासन ने प्रभावित इलाके को सील कर रखा है. ऐसे में वह अपने रिश्तेदार के संपर्क में हैं और उन्हें ढांढस देने की कोशिश कर रहे हैं.
नेपाल में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने इसी तरह कई परिवारों को पल भर में तबाह कर दिया. इस त्रासदी में अपनों को खोने वाले परिवारों की संख्या बढ़ती जा रही है, जबकि कई परिवार ऐसे हैं, जिनके लिए अब सिर्फ इंतजार बचा है.
नेपाल से कई मील दूर भारत में रह रहे उनके रिश्तेदारों के लिए भी यह वक्त बेहद मुश्किल है. दिल्ली में रहने वाले इन रिश्तेदारों और नेपाल में मौजूद उनके परिजनों के बीच इस हादसे के बाद दूरी और बढ़ गई है. बेचैनी और लाचारी के बीच उनके पास अपनों से बात करने तक की सुविधा नहीं है.
न्यूज़लॉन्ड्री ने दिल्ली में रह रहे ऐसे ही कई नेपाली परिवारों से बात की.
बस में सवार परिवार के तीन लोग बाढ़ में बह गए, अब तक कोई खबर नहीं
फरीदाबाद में करीब 30 साल से रह रहे भीम बहादुर कुंवर नेपाल के गोरखा जिले के पालुङटार के रहने वाले हैं. नेपाल में उनकी चचेरी बहन के बेटे सागर सापकोटा (33) बस चलाते थे.
हादसे वाले दिन सागर अपनी बस में करीब 38 लोगों को लेकर यात्रा पर निकले थे. बस में उनकी मां रममाया सापकोटा (57) और बहन सुष्मिता कुंवर (19) भी मौजूद थीं.
चीन सीमा से करीब सात किलोमीटर दूर अचानक बाढ़ का पानी आया और बस समेत उसमें सवार सभी लोग तेज बहाव में बह गए.
इस हादसे के बाद से अब तक बस में सवार सिर्फ एक व्यक्ति का शव काफी दूर से बरामद हुआ है. बाकी लोगों के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.
भीम बहादुर बताते हैं कि हादसे के बाद से उनके जीजा और चाची सदमे में हैं. परिवार के लोग नेपाल में अलग-अलग जगहों पर जाकर अपने परिजनों की तलाश कर रहे हैं.
भीम बहादुर भी नेपाल से आने वाली हर खबर पर नजर बनाए हुए हैं. परिवार अब भी इस इंतजार में है कि शायद अगली खबर उनके परिजनों के बारे में हो.
बहू की तलाश में नेपाल लौटेंगे ससुर
बाल कृष्ण पांडे 1988 से भारत में रह रहे हैं और मैत्री नेपाल फाउंडेशन के साथ काम करते हैं. वह कुछ लोगों के साथ अगले दो-तीन दिनों में नेपाल जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि वह अपनी बहू सुमी अधिकारी और उन लापता लोगों की तलाश कर सकें जिनसे बाढ़ के बाद से संपर्क नहीं हो पाया है.
सुमी अधिकारी एस-थ्री ईशा फाउंडेशन ग्रुप के साथ नेपाल की यात्रा पर गई थीं. बाढ़ के बाद से इस ग्रुप के सभी सदस्यों से संपर्क टूट गया है.
बाल कृष्ण के मुताबिक, सुमी की आखिरी लोकेशन चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग बॉर्डर के इमिग्रेशन ऑफिस की बताई जा रही है. उनके मुताबिक, सुमी के पति और रिश्तेदार नव पांडे का बहुत बुरा हाल है. पांडे और उनके दो बच्चे इस वक्त ऑस्ट्रेलिया में हैं. पूरा परिवार इस वक्त गहरे सदमे में है.
पांडे आगे बताते हैं, “इसे कुदरत का खेल ही कह सकते हैं. हम भी जाने वाले थे, लेकिन काम आ गया और हमें यात्रा रद्द करनी पड़ी,” .
पांडे ने बताया कि उन्होंने कुछ फंड इकट्ठा किया है. वह नेपाल पहुंचकर अपने स्तर पर लापता लोगों की तलाश करेंगे और प्रभावित परिवारों की मदद करने की कोशिश करेंगे.
सुबह मां से हुई थी बात, फिर फोन बंद हो गया
न्यूज़लॉन्ड्री की मुलाकात रोशन कुमार शाह से हुई. वह 2005 से दिल्ली में रह रहे हैं और यहीं काम करते हैं. नेपाल में उनके भतीजे सुधीर कुमार शाह (34) मैकेनिकल इंजीनियर थे और रसुवा के त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे.
रोशन के मुताबिक, सुधीर के साथ करीब 60 लोगों की टीम भी इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी. बाढ़ आने के बाद टीम के सभी लोग तेज बहाव में बह गए. हादसे के बाद से अब तक इनमें से किसी के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है.
सुधीर की परिवार से लगातार बात होती थी. हादसे वाले दिन सुबह भी उन्होंने अपनी मां से फोन पर बात की थी. यह उनकी मां से आखिरी बातचीत थी. इसके बाद सुधीर का फोन बंद हो गया और परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो पाया.
रोशन बताते हैं कि गांव में उनकी बहन, जीजा और बाकी परिवार उनकी खबर का इंतजार कर रहे हैं. परिवार के लिए सबसे मुश्किल यह है कि उन्हें सुधीर के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है.
सुबह मां से हुई वह आखिरी बातचीत अब परिवार के पास सुधीर की आखिरी यादों में से एक है. इसके बाद से परिवार उनकी किसी खबर का इंतजार कर रहा है.
दफ्तर में थे यादव भण्डारी, बाढ़ ने ले ली जान
दिल्ली में हमारी मुलाकात नेपाल के गुल्मी गांव के रहने वाले रघुनाथ पांडे से हुई. उन्होंने बताया कि उनके गांव के यादव भण्डारी भोटेकोशी में कस्टम विभाग में सरकारी कर्मचारी थे.
रघुनाथ के मुताबिक, जिस वक्त भोटेकोशी में अचानक बाढ़ आई, यादव भण्डारी अपने दफ्तर में ही मौजूद थे. पानी का बहाव इतनी जल्दी बढ़ा कि उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला और वह बाढ़ के पानी में बह गए.
कुछ समय बाद यादव भण्डारी का शव बरामद किया गया. परिवार और गांव के लोगों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया है.
रघुनाथ बताते हैं कि यादव की मौत से पूरा गांव शोक में है. भोटेकोशी की बाढ़ ने एक परिवार से उसका अपना छीन लिया और गांव ने भी अपना एक जाना-पहचाना चेहरा खो दिया.
नेपाल की बाढ़ ने कई परिवारों से उनके अपने छीन लिए हैं, जबकि कई अब भी उनकी खबर का इंतजार कर रहे हैं. दिल्ली में बैठे इन लोगों के लिए दूरी और अनिश्चितता दोनों बढ़ गई है. हर नई खबर उम्मीद और आशंका दोनों लेकर आती है.
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