Report
E20 पर डीडी न्यूज़ की कारीगरी, मोदी समर्थकों को किसान बना कर पेश किया
एथेनॉल युक्त पेट्रोल यानी E20 फ्यूल को लेकर पूरे देश में एक बहस छिड़ी हुई है. माइलेज से लेकर इंजन खराब होने के कथित दावे सुनने को मिल रहे हैं. दूसरी तरफ केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस मुद्दे से किनारा ही कर लिया है. लेकिन सरकार लगातार E20 के प्रचार-प्रसार में लगी हुई है. यह दावा जमकर किया जा रहा है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों को फायदा हो रहा है.
सरकार के दावे को मजबूती देने के काम में पब्लिक ब्रॉडकास्टर डीडी न्यूज दिन-रात एक किए हुए है. डीडी न्यूज़ पर एक्सप्लेनर, डिबेट शो और ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए E20 के फायदों से जुड़े शो का ढेर लग गया है. डीडी न्यूज ने E20 फ्यूल के पक्ष मे मई से लेकर अब तक 50 से ज्यादा एक्सप्लेनर, डिबेट शो और ग्राउंड रिपोर्ट प्रसारित किए हैं.
इस पूरी कसरत का केंद्र है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों को बहुत फायदा हो रहा है. सरकार के इस दावे को वैधता देने के लिए डीडी न्यूज ने पिछले महीने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सात किसान नेताओं के वीडियो जारी किए. इनमें सभी किसान नेताओं ने एक ही दावा किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों की तरक्की हो रही है.
इन किसान नेताओं ने खास तौर पर हमारा ध्यान अपनी तरफ खींचा. सरसरी तौर पर खोजबीन में हमने पाया कि ये सभी किसान नेता पहले से ही मोदी सरकार के समर्थक और उसकी नीतियों के प्रशंसक रहे हैं. यहां तक कि इनमें से कुछ तो 2020-21 में संयुक्त किसान मोर्चा के साल भर लंबे किसान आंदोलन के विरोधी और तीनों विवादित कृषि कानूनों के समर्थक भी थे.
इन किसान नेताओं में के.पी. सिंह ठैनुआ (गांव किसान उन्नयन), अशोक बालियान (पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन), कृष्णवीर चौधरी (भारतीय कृषक समाज), धर्मेंद्र चौधरी (भारतीय किसान यूनियन, चौधरी चरण सिंह), रामपाल जाट (किसान महापंचायत), के. साई रेड्डी (भारतीय किसान संघ) और विनोद आनंद (एमएसपी कमेटी के सदस्य) शामिल हैं.
सरकारी किसान नेता
28 जुलाई को डीडी न्यूज के अधिकारिक यूट्यूब चैनल पर जारी एक वीडियो में भारतीय कृषक समाज के नेता कृष्णवीर चौधरी एथेनॉल ब्लेंडिंग का विरोध करने वालों को देश विरोधी बताते हैं. वो कहते हैं, "देश का किसान, जो कल तक अन्नदाता था, आज ऊर्जादाता बन रहा है. राष्ट्र निर्माण में उसकी भागीदारी बढ़ रही है और उसकी आय में भी वृद्धि हो रही है. इसलिए एथेनॉल ब्लेंडिंग का कार्यक्रम राष्ट्रहित में है. इसका विरोध किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता. जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वे राष्ट्रहित के खिलाफ खड़े हैं."
इसी दिन एक के बाद एक कुल सात वीडियो प्रसारित किए गए.
हाथरस के किसान नेता केपी सिंह ठैनुआ का वीडियो भी जारी हुआ. वीडियो में केपी सिंह कहते हैं, "देश में वाहनों के ईंधन में मिश्रण को लेकर जो अफवाहें फैलाई जा रही हैं, मैं उनका पूरी तरह खंडन करता हूं. यह बिल्कुल तथ्यहीन है. आने वाले समय में इथेनॉल का जितना अधिक प्रयोग होगा, उससे न केवल किसानों का हित होगा बल्कि देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनेगा. किसान हित, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और खाद्य आत्मनिर्भरता एक-दूसरे के पूरक हैं. मैं इसका पूर्ण समर्थन करता हूं. विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में इससे बड़ा योगदान मिलेगा."
28 जुलाई को ही पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बालियान का भी वीडियो सामने आया. इसमें बालियान ने दावा किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से गन्ना, धान और मक्का किसानों को बड़ा फायदा हो रहा है.
इसी तरह भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. साई रेड्डी भी एथेनॉल ब्लेंडिंग का विरोध करने वालों को देश विरोधी बताते हैं. वो यहां तक कहते हैं कि इस विरोध के पीछे ऑयल लॉबी, कुछ एनजीओ और विदेशी ताकतों का हाथ है. वो कहते हैं, "एथेनॉल का विरोध करने वाला किसान का विरोध करने वाला है. एथेनॉल मिलाने से इंजन की उम्र बढ़ती है और पर्यावरण को होने वाला नुकसान कम होता है."
वहीं राष्ट्रीय किसान प्रगतिशील संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद आनंद का वीडियो भी एथेनॉल ब्लेंडिंग का विरोध करने वालों को देश विरोधी बताता है. वो कहते हैं, "सरकार ने एक फार्मर-सेंट्रिक, एडमिनिस्ट्रेटिवली इम्प्लीमेंटेबल, एनवायरनमेंटली सस्टेनेबल और इकोनॉमिकली वायबल कार्यक्रम शुरू किया है. यह स्वतंत्र भारत का एक विशिष्ट और दूरगामी कार्यक्रम है. प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया यह फैसला अपने आप में नायाब है. हम इसके साथ खड़े हैं. जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वे राष्ट्र विरोधी हैं."
इसी तरह भारतीय किसान यूनियन (चौधरी चरण सिंह) के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी और किसान महापंचायत के रामपाल जाट ने भी लगभग यही दावे किए.
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये किसान नेता हैं कौन?
अगस्त 2025 में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं के बीच कृषि और डेयरी क्षेत्र को विदेशी कंपनियों के लिए खोलने की आशंकाओं के बीच 12 अगस्त को नई दिल्ली के पूसा परिसर स्थित सुब्रह्मण्यम हॉल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने "किसान भाइयों के साथ संवाद" नाम से देशभर से आए किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक कार्यक्रम किया था. इसका उद्देश्य व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार और कृतज्ञता व्यक्त करना था.
पीआईबी के अनुसार, विदेशी दबाव के बावजूद प्रधानमंत्री के मजबूत निर्णय के लिए किसान कृतज्ञ थे. कृतज्ञता के बोझ तले दबे किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया. किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व को अतुलनीय बताया. सभी किसान संगठनों के प्रमुखों ने कहा कि वे प्रधानमंत्री के दूरदर्शी और किसान हितैषी विचारों का हृदय से स्वागत और पूर्ण समर्थन करते हैं.
इस आभार कार्यक्रम में केपी सिंह ठैनुआ, अशोक बालियान, कृष्णवीर चौधरी, धर्मेंद्र चौधरी, के. साई रेड्डी, विनोद आनंद और रामपाल जाट भी शामिल थे. हालांकि इन किसान नेताओं का सरकार के साथ कदमताल और भाजपा की प्रशंसा कोई नई बात नहीं है.
कौन हैं ये किसान नेता?
कृष्णवीर चौधरी
गाजियाबाद के रहने वाले भारतीय कृषक समाज के प्रमुख कृष्णवीर चौधरी भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं. जाहिर है सत्ता में भाजपा है तो सरकार के पक्ष में ही खड़े होंगे. वैसे चौधरी को केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह का करीबी माना जाता है. वर्ष 2014 में राजनाथ सिंह की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली थी. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने गाजियाबाद से भाजपा प्रत्याशी अतुल गर्ग के लिए प्रचार भी किया था. इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी मुलाकातों की कई तस्वीरें उनके सोशल मीडिया हैंडल पर मौजूद हैं.
कृष्णवीर चौधरी केंद्र सरकार द्वारा गठित एमएसपी कमेटी के सदस्य भी हैं. वह उन किसान नेताओं में शामिल रहे हैं, जिन्होंने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों का समर्थन किया था. इन कानूनों के खिलाफ देशभर के किसान करीब एक साल तक दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन करते रहे, जिसके बाद सरकार को इन्हें वापस लेना पड़ा था.
अशोक बालियान
अशोक बालियान प्रत्यक्ष रूप से किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, लेकिन हाल के वर्षों में वह कई मौकों पर सरकार के पक्ष में खड़े नजर आए हैं. मुजफ्फरनगर के रहने वाले अशोक बालियान, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता संजीव बालियान की 'बालियान खाप' से आते हैं.
वैसे तो वह समय-समय पर किसानों के मुद्दे उठाते रहते हैं, लेकिन बड़े मुद्दों पर अक्सर मोदी सरकार के साथ खड़े दिखाई देते हैं. वर्ष 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान उनका संगठन उन 12 किसान संगठनों में शामिल था जिन्होंने तीन कृषि कानूनों का समर्थन किया था.
अशोक बालियान उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनसे सरकार बातचीत करने में सहज महसूस करती है. चाहे महिला पहलवानों का मुद्दा हो या एमएसपी का.
के साई रेड्डी
के साई रेड्डी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. हालांकि, भारतीय किसान संघ खुद को गैर-राजनीतिक संगठन बताता है लेकिन राष्ट्रीय नीतियों के स्तर पर वह अक्सर मौजूदा केंद्र सरकार के फैसलों का समर्थन करता है. संगठन ने ईंधन में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण नीति की भी खुलकर सराहना की है.
केपी सिंह ठैनुआ
केपी सिंह ठैनुआ 'गांव किसान उन्नयन' नामक संगठन चलाते हैं और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. मूल रूप से वह हाथरस के रहने वाले हैं. ठैनुआ कई मौकों पर भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक माने जाते हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह 2027 में योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं. उनके सोशल मीडिया हैंडल पर भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ कृतज्ञता व्यक्त करते हुए तस्वीरें भी मौजूद हैं.
विनोद आनंद
विनोद आनंद केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय एमएसपी और कृषि सुधार समिति के सदस्य हैं. तीन कृषि कानूनों की वापसी के बाद केंद्र सरकार ने एमएसपी को प्रभावी बनाने, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक समिति बनाई थी, जिसमें विनोद आनंद को सदस्य नियुक्त किया गया था.
धर्मेंद्र चौधरी
हाथरस के रहने वाले धर्मेंद्र चौधरी भारतीय किसान यूनियन (चौधरी चरण सिंह) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. धर्मेंद्र चौधरी 12 अगस्त, 2025 को आयोजित प्रधानमंत्री आभार कार्यक्रम में शामिल हुए थे. हालांकि उनका किसी राजनीतिक दल से प्रत्यक्ष जुड़ाव नजर नहीं आता, लेकिन उनके सोशल मीडिया हैंडल पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ मुलाकातों और शिष्टाचार भेंट की तस्वीरें मौजूद हैं. उनके फेसबुक पेज पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ भी तस्वीर दिखाई देती है.
रामपाल जाट
राजस्थान के रहने वाले रामपाल जाट किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.उनका राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है. वह 2018 से पहले भाजपा से जुड़े रहे, बाद में आम आदमी पार्टी के साथ दिखाई दिए और 2023 में कांग्रेस को समर्थन दे चुके हैं.
वीडियो में दावा, असल में परेशान!
न्यूज़लॉन्ड्री ने इन सात किसान नेताओं में से चार लोगों से बात की. धर्मेन्द्र चौधरी ने बताया कि एथेनाल ब्लेंडिंग से फिलहाल कोई फायदा नहीं हो रहा है. हां अगर सरकार गन्ने का रेट बढ़ाती है तो फायदा होगा.
वहीं रामपाल जाट ने बताया, “एथेनाल ब्लेडिंग से मेरे क्षेत्र के किसानों को बिल्कुल फायदा नहीं हो रहा है बल्कि गाड़ियां खराब होने की शिकायत और आ रही हैं. लेकिन मुझे खुशी है कि E20 फ्यूल से देश की क्रूड आयल पर निर्भरता कम हो रही है.”
वहीं, अशोक बालियान ने भी कुछ वही बातें दोहराई जो उन्होंने डीडी न्यूज के वीडियो में बोला है. उनका कहना है कि सरकार जो अच्छा काम करती है, उसमें हम सरकार के साथ होते हैं और जब खराब करती है तो हम सरकार से मिलकर रिफॉर्म की बात करते हैं. ऐसे में अगर किसी को लगता है कि हम सरकार के पक्ष मे हैं तो उसमें हम क्या कर सकते हैं. कृष्णवीर चौधरी भी बालियान की तर्ज पर अपनी बात दोहराते हैं.
इन नेताओं ने यह भी बताया कि इस वीडियो के लिए लोकल रिपोर्टर्स ने उनसे संपर्क किया था. डीडी न्यूज ने सीधे उनसे संपर्क नहीं किया था. वहीं, विनोद आनंद ने बताया कि उनका वीडियो उन्होंने ने खुद ही बनाकर डीडी न्यूज को भेजा था.
हमने इस संबध में प्रसार भारती सहित बाकी किसान नेताओं के साई रेड्डी और के पी सिंह ठैनुआ को भी कुछ सवाल भेजे हैं. लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.
गौरतलब है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर सरकार किसानों के फायदे का दावा कर रही है और डीडी न्यूज़ इस दावे को पुख्ता करने के लिए भाजपा समर्थक नेताओं के बयान चला रहा है. जबकि डीडी न्यूज़ उन नेताओं का राजनीतिक झुकाव भी नहीं बता रहा. सवाल उठता है कि क्या प्रसार भारती ने स्वतंत्र और प्रतिनिधि किसानों को जगह दी या फिर सरकारी पक्ष रखने वाली आवाज़ों को ही किसानों की राय के तौर पर पेश किया?
क्या मीडिया सत्ता या कॉर्पोरेट हितों के बजाय जनता के हित में काम कर सकता है? बिल्कुल कर सकता है, लेकिन तभी जब वह धन के लिए सत्ता या कॉरपोरेट स्रोतों के बजाय जनता पर निर्भर हो. इसका अर्थ है कि आपको खड़े होना पड़ेगा और खबरों को आज़ाद रखने के लिए थोड़ा खर्च करना होगा. सब्सक्राइब करें.
Also Read: पेट्रोल में इथेनॉल: मिलावट की राजनीति
Also Read
-
Uttarakhand ERO refused BJP worker’s bulk Form 7 objections. After ECI complaint, 5,359 were accepted
-
A BJP worker in Uttarakhand objected. Voters in Kichha who never knew him are off the roll
-
Inside Brazil’s divided democracy
-
The Starlink controversy explained: What an Indian licence can and can’t control
-
‘People scared of economics’: Sarthak Pradhan on your money, GST and Fiscal Fables