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पश्चिम बंगाल: सीजेपी के अब्दुल हाफिज बोले, “हमें बंधक बना लिया, वो रात बड़ी भारी गुजरी”
बीते दिनों पश्चिम बंगाल में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ता अब्दुल हाफिज के पिता की मौत हो गई. आरोप है कि उनके पिता को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने पहले घर में घुसकर बेरहमी से पीटा और इसके बाद जब वह इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचे तो उन्हें वहां भी पीटा गया. घटना के दो दिन बाद उनकी मौत हो गई.
अब्दुल हाफिज सीजेपी के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से जुड़े थे. इसी कड़ी में वे करिगुंडा पश्चिमपाड़ा प्राथमिक विद्यालय पहुंचे थे. आरोप है कि यह बात स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं को पसंद नहीं आई. अब्दुल हाफिज ने पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताया.
हाफिज के मुताबिक, 13 अगस्त का दिन था. वह अपने गांव के ही करिगुंडा पश्चिमपाड़ा प्राथमिक विद्यालय में सुबह करीब 11 से 11:30 बजे पहुंचे थे. यह उनका पहला स्कूल था, जहां से उन्होंने बचपन में पढ़ाई की थी. स्कूल उनके घर से करीब पांच मिनट की दूरी पर है.
अब्दुल ने बताया कि उन्होंने स्कूल पहुंचकर उन्होंने अपने एक शिक्षक से बात की कि ‘स्कूल ठीक करो’ का एक कैंपेन चल रहा है. तो क्या वह स्कूल से संबंधित समस्याओं की एक सर्वे वीडियो बना सकते हैं. दावा है कि शिक्षक ने इस बात पर हमारी भर दी थी और अगले दिन बुलाया था.
अब्दुल बताते हैं, "इस बात की जानकारी भाजपा कार्यकर्ताओं को हो गई. शाम करीब 8 बजे वे लोग जबरन उनके घर में घुस गए और मारपीट करने लगे. उन्होंने बांस के डंडे से पीटा. जब उसके पिता बचाने आए तो उन्हें भी बांस से पीटा और छाती पर लातें मारी. इसके बाद सरिया की रॉड से भी मारा.”
अब्दुल ने मारपीट की सूचना पुलिस को दी. आरोप है कि पुलिस करीब ढाई घंटे बाद पहुंची. तब तक वह और उनके पिता घर में ही पड़े रहे. उनके मुताबिक, आरोपी पुलिस के सामने ही उन्हें गालियां और धमकियां दे रहे थे और पुलिस उनके सामने बेबस नजर आ रही थी.
विवाद की शुरुआत
अब्दुल बताते हैं कि धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जब वह जंतर-मंतर से अपने घर पहुंचे, तभी से स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता उन्हें धमकी दे रहे थे. उन्हें कहा जाता था कि वह दिल्ली क्यों गए?
अब्दुल के मुताबिक, उन्होंने जंतर-मंतर के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपलोड किए थे. इसी वजह से स्थानीय लोगों को उनके बारे में जानकारी हुई.
वह कहते हैं कि इन धमकियों के सिलसिले में वह पहले भी थाने जा चुके थे और पुलिस को पहले ही बता चुके थे कि उनके साथ ऐसा हो रहा है. तब इलाके के बीट अधिकारी ने उन्हें अपना नंबर दिया था और कहा था कि कोई दिक्कत हो तो उन्हें फोन करना.
धमकियों का सिलसिला
अब्दुल के मुताबिक, वह 27 तारीख को जंतर-मंतर से अपने घर लौटे थे और 28 तारीख से उन्हें धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया था. उनका कहना है कि धमकी देने वालों में मुख्य रूप से भाजपा कार्यकर्ता शेख आजाद था.
अब्दुल बताते हैं कि जब वह थाने में एफआईआर दर्ज कराने जा रहे थे तो उन्हें घेर लिया गया. इसके बाद वह इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे.
उनका आरोप है कि अस्पताल में भी करीब 200-250 भाजपा कार्यकर्ता पहुंच गए और उन्हें फिर से बेरहमी से पीटा. अब्दुल के मुताबिक, उनके पिता को भी अस्पताल में दोबारा बहुत पीटा गया और उनका इलाज भी नहीं होने दिया गया.
अब्दुल का कहना है कि आरोपियों ने उनका फोन छीन लिया. फोन से उन्होंने उन लोगों के कुछ वीडियो बनाए थे, जब वे उनके पिता को पीट रहे थे. आरोपियों ने फोन से सबकुछ डिलीट कर दिया और फिर फोन भी अपने पास रख लिया. इसके बाद वह अपने घर लौट आए. रात भर वह घर में ही रहे और वह लोग दोबारा उनके घर भी आ गए.
‘हमें बंधक बना लिया था’
अब्दुल उस रात को याद करते हुए कहते हैं, “वो रात हमारी कैसे गुजरी है, मैं उसे बयां भी नहीं कर सकता हूं. एक तरह से उन्होंने मुझे, मेरी मां और मेरे पिता तीनों को बंधक बना लिया था. बाथरूम के लिए भी हमें उनसे पूछकर जाना पड़ रहा था. हम रात भर नहीं सोए थे.”
वह कहते हैं कि 14 तारीख को भी उन्हें घर से बाहर नहीं जाने दिया गया. उनसे कहा गया, “मरना है तो मर लेकिन बाहर नहीं जाने देंगे.”
अब्दुल की मानें तो उनके पिता बहुत ज्यादा तकलीफ में थे और उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही थी. उनका आरोप है कि आरोपियों ने उनके माता-पिता से कहा कि वे अपने बेटे अब्दुल को बोलें कि वह वीडियो बनाए और कहे कि उसकी गलती है और उन्होंने कुछ नहीं किया है.
अब्दुल बताते हैं कि उन्होंने और उनकी मां ने ऐसा करने से मना कर दिया. “मैंने कहा कि मेरे पिता को पीटा, उनका सर फोड़ दिया, खून निकाल दिया और हम ही माफी मांगें. ऐसा कैसे हो सकता है.”
इसके बाद आरोपियों ने उन्हें वहां से जाने को कहा, वरना जान से मारने की धमकी दी.
‘माता-पिता ने मुझे कोलकाता भेज दिया’
अब्दुल बताते हैं कि इसके बाद उनके माता-पिता काफी डर गए थे. उन्हें लग रहा था कि जब तक वह वहां रहेंगे, तब तक ऐसा ही होता रहेगा. फिर उन्होंने मुझे कोलकाता भेज दिया. मेरी मां-पिता ने कहा कि अगर तू यहीं नहीं रहेगा तो फिर ये कुछ नहीं करेंगे. इसके बाद अब्दुल 14 तारीख की दोपहर में घर से कोलकाता चले गए. उनके घर से कोलकाता की दूरी करीब 130 किलोमीटर है.
उनके जाने के बाद उनके पिता की तकलीफ बढ़ती जा रही थी. अब्दुल के मुताबिक, उनके पिता दर्द सह रहे थे और किसी को नहीं बता रहे थे. उन्होंने मुझे भी नहीं बताया ताकि वह वापस न आ जाएं.
अब्दुल के मुताबिक, “15 तारीख की सुबह पिता की तकलीफ बहुत ज्यादा बढ़ गई. तब मैंने मां से कहा कि अब वह सह नहीं पा रहे हैं और उन्हें अस्पताल ले जाएं. इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ती चली गई. शाम करीब आठ बजे उनकी मौत हो गई.”
अब्दुल बताते हैं कि जब उन्हें पता चला कि उनके पिता की तबीयत में सुधार नहीं है, तो वह कोलकाता से करीब 7 बजे ट्रेन से घर के लिए चल दिए. लेकिन जब तब वह पहुंचे तो उनके पिता की मौत हो चुकी थी. अब्दुल कहते हैं, “मैं उन्हें आखिरी वक्त में गले भी नहीं लगा सका.”
अब्दुल बताते हैं कि उनके पिता एक कारखाने में रोटियां बनाते थे और उन्हें दुकानों पर सप्लाई करते थे.
जंतर मंतर जाने और सीजेपी से जुड़ने की कहानी
अब्दुल बताते हैं कि वह सीजेपी के आंदोलन के बारे में देख-पढ़ रहे थे और उन्हें लगा कि उन्हें वहां जाना चाहिए. इसके बाद वह 18 जुलाई को अपने घर से निकल गए और 19 जुलाई को जंतर-मंतर पहुंचे. वह 20 जुलाई को संसद चलो मार्च में भी शामिल हुए.
अब्दुल बताते हैं कि उन्होंने 20 जुलाई की शाम को पहला वीडियो बनाया था. इसके बाद वह रोजाना कुछ-कुछ वीडियो बनाते थे. उनके मुताबिक, 25 जुलाई को इस्तीफा हो गया और 26 जुलाई को वह दिल्ली से घर के लिए निकल गए. 27 जुलाई को वह अपने घर पहुंच गए. जंतर-मंतर पर रहने के दौरान उनकी एक बार अभिजीत दीप्के से भी मुलाकात हुई थी.
‘मुआवजा नहीं स्कूल चाहिए’
इस हादसे के बाद आशुतोष रांका और सीजेपी से जुड़े अन्य लोग अब्दुल के घर पहुंचे. अब्दुल कहते हैं कि उन्हें किसी तरह का कोई मुआवजा नहीं चाहिए. उनकी मांग है कि उनके गांव में एक वर्ल्ड क्लास स्कूल बनाया जाए और वह स्कूल उनके पिता के नाम पर हो. वह कहते हैं, “मैं बस यही चाहता हूं.”
एफआईआर में क्या है?
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने 16 अगस्त को इंदस पुलिस स्टेशन, बांकुरा, पश्चिम बंगाल में एक एफआईआर दर्ज की. एफआईआर में पांच लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 8-10 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. नामजद आरोपियों में शेख आजाद, श्रीकांत माझी, रोहित माझी, अबानी माझी उर्फ पिंटू और प्रशांत माझी शामिल हैं. यह एफआईआर मृतक शेख मोहम्मद मफिक की पत्नी हसीना बेगम ने दर्ज कराई है.
एफआईआर के मुताबिक, सीजेपी के निर्देशानुसार विभिन्न स्कूलों की बदहाल स्थिति का जायजा लेने के लिए उनका बेटा अब्दुल करिगुंडा पश्चिमपाड़ा प्राथमिक विद्यालय गया था. जब उसने स्थिति की समीक्षा करने के लिए प्रधान शिक्षक काशीनाथ दे महाशय से अनुमति मांगी तो उन्होंने उसे एक दिन बाद आने के लिए कहा.
एफआईआर में हसीना बेगम के हवाले से कहा गया है कि इसके बाद उनका बेटा घर लौट आया. लेकिन शिक्षक महोदय ने कुछ असामाजिक लड़कों को उनके बेटे के पीछे लगा दिया.
एफआईआर के मुताबिक, भाजपा कार्यकर्ताओं की पिटाई के बाद उनके पति की हालत अत्यंत गंभीर हो गई थी. इसके बाद उन्हें वर्धमान मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई.
इस मामले में आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 329(4), 331(4), 126(2), 117(2), 118(2), 304(2), 351(3), 109, 103(1), 61(2), 324(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
वहीं, जब इस मामले पर हमने स्थानीय पुलिस ने बात की तो उन्होंने किसी प्रकार की टिप्पणी देने से इनकार कर दिया.
सीजेपी टीम पहुंची गांव
घटना के बाद सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और उनकी टीम के अन्य सदस्य पश्चिम बंगाल के ग्राम करिगुंडा, थाना इंदस, बांकुरा पहुंचे. वहां रांका ने मृतक के बेटे अब्दुल की बात फोन पर अभिजीत दीप्के से भी करवाई थी. इस दौरान दीप्के भावुक भी हो गए थे.
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