Report
दिल्ली सरकार की 90 करोड़ की साइकिल योजना पर सवाल
दिल्ली सरकार ने 31 जुलाई 2026 को सरकारी स्कूलों की कक्षा 9 में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए 'विद्या वाहिनी योजना' शुरू की. योजना का उद्देश्य छात्राओं के लिए घर से स्कूल तक आने-जाने की सुविधा को बेहतर बनाना है, ताकि दूरी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो और उन्हें शिक्षा जारी रखने के लिए अधिक आत्मनिर्भर बनाया जा सके.
इस साल सरकार ने करीब 1.40 लाख छात्राओं को साइकिल देने का लक्ष्य रखा है. योजना शुरू होने के दिन करीब 3,000 साइकिलें बांटी गईं, और 10 अगस्त को करीब 200 साइकिलें और वितरित की गईं. लेकिन योजना शुरू होते ही टेंडर की प्रक्रिया, कीमत और साइकिलों की असलियत को लेकर सवाल उठने लगे हैं. एक शिकायतकर्ता ने टेंडर की अनुमानित कीमत और पात्रता शर्तों पर सवाल उठाए हैं. वहीं, आम आदमी पार्टी ने बांटी जा रही साइकिलों के मॉडल और उनकी कीमत को लेकर कई आरोप लगाए हैं. न्यूज़लॉन्ड्री ने इन दावों और टेंडर से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की, जिसमें प्रक्रिया और साइकिलों की कीमत को लेकर कुछ अनियमितताएं सामने आई.
90 करोड़ का टेंडर
छात्राओं को साइकिल उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने 23 मई, 2026 को करीब 90 करोड़ रुपये के अनुमानित मूल्य का टेंडर जारी किया था. टेंडर में 1,30,000 एमटीबी (माउंटेन बाइक) साइकिलों की खरीद का प्रावधान किया गया था. टेंडर प्रक्रिया में तीन कंपनियां तकनीकी रूप से योग्य पाई गईं एवन साइकिल्स लिमिटेड, हीरो इकोटेक लिमिटेड और मट्टा स्पोर्ट्स. 29 जून, 2026 को दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने 1.30 लाख साइकिलों की खरीद का ठेका मट्टा स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को आधिकारिक रूप से दे दिया. इसके बाद, कई अन्य साइकिल कंपनियों ने आरोप लगाया कि टेंडर की पात्रता शर्तें इस तरह तैयार की गई थीं कि केवल चुनिंदा कंपनियां ही इसमें योग्य ठहर सकें.
एसके साइकिल ने अपनी शिकायत में टेंडर की अनुमानित कीमत पर भी सवाल उठाया. कंपनी के मुताबिक, टेंडर में मांगी गई एमटीबी साइकिल की बाजार कीमत करीब 4,100 रुपये प्रति साइकिल थी, जबकि टेंडर में अनुमानित कीमत 6,923 रुपये प्रति साइकिल रखी गई. 1.30 लाख साइकिलों के हिसाब से बाजार कीमत के आधार पर लागत करीब 53.30 करोड़ रुपये बैठती है, जबकि टेंडर की अनुमानित कीमत करीब 90 करोड़ रुपये थी. शिकायतकर्ता ने इसे करीब 36.70 करोड़ रुपये का अंतर बताया.
शिकायत में पात्रता के लिए तय वित्तीय वर्षों पर भी सवाल उठाया गया. एसके साइकिल के मुताबिक, 2026-27 की खरीद के लिए पिछले तीन वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 होने चाहिए थे, लेकिन टेंडर में 2022-23 से 2024-25 तक की अवधि रखी गई.
टेंडर में बोली लगाने वाली कंपनी के लिए 360 करोड़ रुपये के न्यूनतम टर्नओवर की शर्त पर भी आपत्ति जताई गई. शिकायतकर्ता ने सीवीसी की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि यह सीमा टेंडर की अनुमानित लागत के मुकाबले काफी अधिक है. प्री-बिड मीटिंग का प्रावधान नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए. शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन शर्तों से टेंडर में प्रतिस्पर्धा सीमित हुई.
इन सवालों के बीच जब हमने मट्टा स्पोर्ट्स के पिछले कारोबार और सरकारी सप्लाई से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की, तो कुछ अहम जानकारियां सामने आई.
मट्टा स्पोर्ट्स के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कारोबारी रिकॉर्ड में कंपनी का मुख्य कारोबार खेल सामग्री की आपूर्ति से जुड़ा दिखाई देता है. इनमें क्रिकेट उपकरण, फुटबॉल, वॉलीबॉल और जिम उपकरण जैसी सामग्री शामिल है. जबकि बड़े पैमाने पर साइकिलों की सरकारी आपूर्ति से जुड़े उसके पिछले अनुबंधों की जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में स्पष्ट तौर पर नहीं मिलती.
इन सवालों पर हमने मट्टा स्पोर्ट्स के मालिक संजय मट्टा से संपर्क किया. उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “हमारी कंपनी पिछले 20 वर्षों से सरकारी संस्थानों को अलग-अलग तरह के खेल उपकरणों की आपूर्ति कर रही है. उनके मुताबिक, कंपनी ने अब तक सरकारी संस्थानों को 100 करोड़ रुपये से अधिक की सप्लाई की है. उन्होंने यह भी दावा किया कि मट्टा स्पोर्ट्स पहले भी सरकारी संस्थानों को साइकिलों की आपूर्ति कर चुकी है.”
कंपनी का दावा है कि उसने दिल्ली सरकार के टेंडर में निर्धारित सभी पात्रता और तकनीकी शर्तें पूरी की हैं और इसके समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी विभाग के समक्ष जमा किए हैं. अपने ऊपर उठे सवालों पर मट्टा स्पोर्ट्स ने कहा, “ये सभी आरोप झूठे और निराधार हैं.”
हालांकि, हमने कंपनी से विशेष तौर पर उन पुराने साइकिल सप्लाई अनुबंधों और कार्यादेशों के दस्तावेज मांगे, जिनके आधार पर वह टेंडर में निर्धारित अनुभव की शर्त पूरी करती है. कंपनी ने ऐसे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए.
आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार की ओर से छात्राओं को बांटी जा रही साइकिलों के मॉडल और उनकी कीमत को लेकर सवाल उठाए. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि साइकिल पर ‘स्काइलर’ लिखा है, लेकिन यह असली स्काइलर मॉडल नहीं है. उनके मुताबिक, सरकार ने करीब 6,957 रुपये प्रति साइकिल की दर से खरीद की, जबकि इसी तरह की एक साइकिल उन्होंने बाजार से करीब 4,200 रुपये में खरीदी.
भारद्वाज ने दावा किया कि सरकार द्वारा खरीदी गई साइकिल हीरो की बोनफायर है, जिस पर स्काइलर का स्टिकर लगाया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि हीरो स्काइलर 26टी मॉडल अब बाजार में उपलब्ध नहीं है.
इन दावों की पड़ताल के लिए हमने हीरो साइकिल्स से संपर्क किया. कंपनी ने बताया कि स्काइलर 26टी मॉडल अब बंद हो चुका है और फिलहाल कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है. हालांकि, कंपनी के मुताबिक, पुराने स्टॉक के तौर पर यह मॉडल किसी रिटेलर के पास उपलब्ध हो सकता है.
इसके बाद हमने सरकार द्वारा वितरित साइकिल और कथित हीरो बोनफायर मॉडल की तस्वीरें साइकिल कारोबारी भानु गुप्ता को दिखाकर दोनों की तकनीकी और बाहरी बनावट के आधार पर तुलना कराई. तस्वीरों की जांच के बाद गुप्ता ने कहा कि दोनों साइकिलें फ्रेम, डिजाइन और ओवरऑल लुक के लिहाज से काफी समान दिखाई देती हैं और इस श्रेणी की साइकिल की बाजार कीमत करीब 5,000 रुपये तक हो सकती है.
हालांकि, तस्वीरों में कुछ अंतर भी दिखाई देते हैं. दोनों साइकिलों में एमटीबी टायर लगे हैं, लेकिन उनके ट्रेड पैटर्न में अंतर है.कथित बोनफायर मॉडल के टायरों पर ट्रेड अपेक्षाकृत महीन है, जबकि सरकार द्वारा वितरित नारंगी साइकिल के टायरों में गहरे और चौड़े ट्रेड ब्लॉक्स दिखाई देते हैं. ऐसे ट्रेड आम तौर पर कच्ची या उबड़-खाबड़ सतह पर अतिरिक्त ग्रिप देने के लिए डिजाइन किए जाते हैं.
यानी तस्वीरों के आधार पर दोनों साइकिलों में बुनियादी डिजाइन और फ्रेम की समानताएं स्पष्ट दिखाई देती हैं. उपलब्ध जानकारी से इतना जरूर स्पष्ट होता है कि दोनों साइकिलों में समानताएं होने के साथ कुछ तकनीकी और बाहरी अंतर भी हैं.
आम आदमी पार्टी की ओर से 4,200 रुपये में खरीदी गई हीरो बोनफायर साइकिल के दावे की हमने ऑनलाइन उपलब्ध कीमतों से भी पड़ताल की. अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हीरो बोनफायर 26टी की कीमत अलग-अलग दिखाई देती है. जुलाई 2026 में उपलब्ध लिस्टिंग में इसकी कीमत करीब 5,990 रुपये से 8,500 रुपये तक देखी गई. वहीं, एक अन्य विक्रेता पर बोनफायर आरएस26टी करीब 6,770 रुपये में सूचीबद्ध थी.
इससे यह जरूर सामने आता है कि 4,200 रुपये की कीमत ऑनलाइन उपलब्ध मौजूदा लिस्टिंग से कम है, लेकिन अलग-अलग विक्रेताओं, ऑफर्स और पुराने स्टॉक के कारण कीमतों में अंतर हो सकता है.
इन आरोपों पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि साइकिलों की खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) के जरिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई और टेंडर सबसे कम बोली लगाने वाले पात्र बोलीदाता को दिया गया. उन्होंने कहा कि पूरी खरीद प्रक्रिया जीईएम पर उपलब्ध है और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया.
मंत्री ने यह भी कहा कि जीईएम पर प्रतिबंधात्मक शर्तों वाले टेंडर को खारिज करने की व्यवस्था है और बोली प्रक्रिया के दौरान किसी विक्रेता या राजनीतिक दल की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई. उन्होंने आम आदमी पार्टी के आरोपों को “झूठा नैरेटिव” बताते हुए कहा कि पार्टी की ओर से दिए जा रहे प्रतिशत के आंकड़े पिछले कुछ दिनों में कई बार बदले हैं.
Also Read
-
Rs 1.9 cr a day: BJP govt in MP spent more on publicity than on environment or minority depts
-
Why 4 in 10 Indian children go to private schools
-
A fake E20 bandh, anchors off air, and a mystery yet to be solved
-
WaPo story on Adani: Gujarat cops search journalist Ravi Nair’s residences in Kerala and Delhi
-
The curious case of Delhi’s Zone-O: Demolitions on one side, construction on the other