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सिवान हिंसा: छात्रों पर AK-47 चली, मगर गोली कैसे लगी यह पुलिस को नहीं पता
धीरज कुमार गौंड राजधानी पटना के मेदांता अस्पताल के बाहर मिलते हैं. वे यहां अपने चचेरे भाई बुलेट कुमार गौंड की देखरेख कर रहे हैं, जिन्हें 25 जुलाई, 2026 को सिवान में गोली लग गई थी. सिवान जिले के डुमरहर गांव के रहने वाले धीरज बताते हैं, “मेरा भाई बुलेट पुलिस और आर्मी की नौकरी के लिए तैयारी करता है. आर्मी की दौड़ में उसका सिलेक्शन हो गया था. उसने मुझे बताया कि वह उस रोज जाति और आवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सिवान आया था. रेलवे स्टेशन से वह जिला समाहरणालय जा रहा था. वह अड्डा नंबर दो के पास पहुंचा तो उसने देखा कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो रही है और दोनों तरफ से रोड़ेबाजी हो रही है. उसने सोचा कि वह किनारे से निकल जायेगा. मगर तभी पुलिस गोलियां चलाने लगी और एक गोली उसके पांव में घुटने से नीचे लग गई. गोली आर-पार हो गई.”
वे बताते हैं, “फिर पुलिस उसे लेकर यहां आई. यहां डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हड्डी टूट गई है. उसकी सर्जरी हुई है और उसे स्टील का रॉड लगा है.”
दरअसल नीट पेपर लीक के विरुद्ध छात्रों के बिहार बंद के दौरान सिवान जिला सबसे हिंसक प्रदर्शनों का गवाह बना. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उस रोज पुलिस ने कम से कम आठ से दस राउंड चलाई है. इनमें ऑटोमेटिक हथियारों से चार गोलियां और पिस्टल से तीन गोलियां चलीं. इसी दौरान सिवान में तीन युवकों को गोलियां लगीं, जिन्हें बाद में पुलिस इलाज के लिए पटना के मेदांता अस्पताल लेकर आई थी. ये युवक हैं, 22 साल के आकाश कुमार, 20 साल के बुलेट कुमार गौंड और एक नाबालिग युवक जिसकी उम्र जिसकी उम्र 17 साल है.
बुलेट कुमार गौंड एक खेतिहर मजदूर परिवार का सदस्य है. आदिवासी समाज से आने वाले बुलेट तीन भाई और एक बहन हैं. बुलेट अपने निम्न मध्यवर्गी परिवार का इकलौता सदस्य है, जो सरकारी नौकरी के लिए प्रयासरत है. वह बीएसएफ, आर्मी, बिहार पुलिस की नौकरियों के लिए प्रयासरत है.
बुलेट के अलावा सिवान के जिन दो युवकों को उस रोज गोली लगी, वे अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं. उनमें से एक आकाश उत्तर प्रदेश के रायबरेली का रहने वाला है. उसकी मंगेतर सिवान की है. वह मंगेतर के साथ अपना जन्मदिन मनाने सिवान आया था. आकाश केक लेने निकला था, तभी पुलिस और छात्रों की भिड़ंत हो गई. वह किनारे खड़े होकर इस हंगामे को देख रहा था कि तभी एक गोली उसके कंधे में आकर लग गई.
अस्पताल में इलाज के दौरान नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उससे बातचीत कर उसे हौसला दिया. वह अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुका है. तीसरा नाबालिग सिवान की एक दुकान में काम करता है. उसके पिता गुजर चुके हैं. घर को संभालने की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर है. शहर में ही उसका परिवार किराये के मकान में रहता है. उसके गले में गोली लगी है, इसलिए वह बोल पाने में असमर्थ है. डॉक्टरों ने उसे अधिक बोलने के लिए मना किया है. ऐसी जानकारी उसके केयरटेकर ने दी, जो पटना के अस्पताल में उसकी देखरेख कर रहे थे. उन्होंने बताया कि उस युवक को डिस्चार्ज होने के बाद उसके ननिहाल भेज दिया गया है. उसे गोली कैसे लगी, यह वे नहीं बताते. वे कहते हैं, इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.
हैरत की बात है कि सिवान की पुलिस इनमें से सिर्फ एक युवक बुलेट कुमार को पुलिस की गोली लगने की बात स्वीकार कर रही है, शेष दो युवकों को कैसे गोली लगी, वे यह नहीं बता रहे. पूछने पर वे सिर्फ इतना कह रहे हैं कि इसकी जांच की जा रही है.
घटना के पहले दिन किसी भी तरह की पुलिस फायरिंग से जिला प्रशासन इनकार कर रहा था, मगर उसी दिन एक पुलिसकर्मी द्वारा एके 47 चलाने का वीडियो वायरल हो गया. इस वीडियो को लेकर सवाल उठने लगे. बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस वीडियो को शेयर कर बिहार सरकार को कटघड़े में खड़ा किया. बाद में राहुल गांधी ने भी इस मसले को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया.
वीडियो वायरल होने के बाद सिवान के एसपी पूरण कुमार झा ने स्वीकार किया कि सिपाही अभिषेक कुमार ने आत्मरक्षार्थ एके 47 से फायरिंग किया था. सिपाही को निलंबित कर दिया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह जवान एसपी पूरण कुमार झा का ही बॉडीगार्ड है. सिवान के जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने इसे पुलिस की बड़ी चूक माना. उन्होंने कहा, “उनको आदेश नहीं था. उनको हवाई फायरिंग भी नहीं करनी चाहिए था. उन्हें पब्लिक में ऐसे हथियार को लेकर जाना भी नहीं चाहिए था. जैसा कि एसपी साहब ने बताया वे कहीं और जा रहे थे और वहां फंस गये थे.”
पूर्व पुलिस अधिकारी और वर्तमान में साइंस कॉलेज, पटना में असिस्टेंट प्रोफेसर अखिलेश कुमार कहते हैं, “यह सरासर पुलिस मैनुअल का उल्लंघन है. एके 47 जैसे हथियार पुलिस को इसलिए दिये गये हैं कि अगर किसी आपराधिक मुठभेड़ में सामने वाला ऑटोमेटिक हथियार से फायरिंग करे तो पुलिस उसका मुकाबला कर सके. प्रदर्शनकारियों पर आप एके 47 से कैसे गोली चला सकते हैं.”
वे कहते हैं, “जब मैं पुलिस में था तो हमें बताया गया था कि मॉब अगर उग्र हो तो उसे तितिर-बितिर करना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए. उसके लिए पहले अनाउंसमेंट करना होता है, इससे बात न बने तो लाठियों का प्रयोग हो. इसके बाद वाटर कैनन और टियर गैस के विकल्प होते हैं. आखिरी विकल्प के तौर पर हवाई फायरिंग की जाती है. यहां तो सीधे एके 47 से फायरिंग की गई, वह भी भीड़ की तरफ निशाना लगाकर.”
सिवान पुलिस की तरफ से 27 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि सिवान के जेपी चौक के पास बंद समर्थकों से घिर जाने के कारण वहां पर तैनात सिपाही अभिषेक कुमार ने जानमाल एवं सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए चार राउंड गोली ऊपर की तरफ बैरल करके चलाई है. इसमें किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. जबकि वीडियो देखने से यह साफ है कि गोली सामने की तरफ चलाई जा रही है.
पुलिस गोली लगने से घायल हुए तीन युवकों को खुद ही इलाज करवाने पटना के मेदांता अस्पताल ले गई है. धीरज कुमार गौंड बताते हैं कि तीनों का इलाज सरकारी खर्चे पर ही हो रहा है. वहां लगातार पुलिस की तैनाती भी है. मगर पुलिस यह जानकारी देने में विफल रही है कि इन्हें गोली कैसे और किन परिस्थितियों में लगी.
न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में एसपी पूरण कुमार झा ने बताया, “इतना हम कन्फर्म हैं कि इन तीनों युवकों को एके 47 की गोली नहीं लगी है. क्योंकि तीनों जहां घायल हुए वह थाना अलग है. हम लोग इसकी जांच कर रहे हैं कि उन्हें गोली कैसे और कहां लगी. वे पुलिस की गोली से घायल हुए या नहीं. जांच पूरी होने पर मैं खुद प्रेस कांफ्रेंस करके इसकी जानकारी दूंगा.” हालांकि कुछ अन्य मीडिया समूहों से बातचीत में उन्होंने बताया है कि सिर्फ एक युवक बुलेट कुमार को पुलिस की गोली लगी है, बाकी दो युवकों को कैसे गोली लगी, इसकी जांच चल रही है.
पुलिस का कहना है कि एके 47 से गोली बारी जेपी चौक पर हुई, जबकि तीनों घायल अलग-अलग लोकेशन पर मिले हैं, आकाश और नाबालिग युवक हाफिज चौक पर मिले. यह जेपी चौक से 1.5 किमी दूर है. जबकि बुलेट ट्रांजिट थाना के पास घायल पाया गया, वह जगह जेपी चौक से दो किमी दूर है. गोली लगने की बात पर पुलिस के अस्पष्ट और अधूरे बयान के बीच यह पूरा मामला संदिग्ध लगता है.
न्यूजलॉन्ड्री ने सीवान के राजनीतिक दलों और इस प्रदर्शन में शामिल संगठनों से बात की. इस बंद का आह्वान भाकपा माले के छात्र और युवा संगठनों ने मिलकर किया था. पार्टी के स्थानीय नेता और पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा ने हमें बताया, “बंद का हम लोगों ने आह्वान किया था और हमारे संगठन के छात्र जेपी चौक पर प्रदर्शन कर रहे थे. हमने जुलूस निकाला और चंदू चौक पर उसका समापन हुआ. 12.15 बजे हमलोगों ने उसका समापन कर दिया. लोगों ने खुद शहर को बंद रखा था. इसलिए सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा था. उस वक्त तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई थी.”
वे बताते हैं, “कुछ अन्य छात्रों ने शहर के गांधी मैदान में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आयोजन किया था. प्रशासन के मुताबिक वहां कुछ विवाद हुआ उसके बाद हिंसा भड़की. फिर खबर मिली कि गांधी मैदान के पास गोली चल रही है. हमारा कहना है कि पुलिस को गोली चलाने में संयम बरतना चाहिए था. मगर पुलिस ने हमें ही आरोपी मानकर हमारे संगठन से जुड़े दर्जनों लोगों के घर छापेमारी की. पुलिस मेरे घर भी पहुंची, ताले तोड़ दिए, हमारा मोबाइल ले गई.”
सिवान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुशील कुमार ने गांधी मैदान में हुई घटनाओं का ब्योरा देते हुए कहा, “भाकपा माले के छात्र संगठनों के अलावा कुछ स्वतंत्र संगठनों ने भी गांधी मैदान में प्रदर्शन का आयोजन किया था. वहां उन्होंने नियम बनाया था कि किसी भी दल का झंडा-बैनर नहीं होगा. सिर्फ तिरंगा झंडा होगा. मगर माले का जब प्रदर्शन खत्म हो गया तब वे लोग अपना झंडा लेकर वहां पहुंच गये. आयोजको ने इसका विरोध किया तो विवाद की स्थिति पैदा हो गई. वहां पुलिस को मौका मिल गया. उसने लाठी चलाना शुरू कर दिया. जबकि गांधी मैदान से निकलने का एक ही रास्ता है, बाकी चारदीवारी से घिरा है. कई छात्र बाउंड्री कूद कर भागे. इसमें कुछ छात्रों को चोट आई.”
सुशील कहते हैं, “पुलिस के लाठीचार्ज के जवाब में छात्रों ने भी पत्थर चलाना शुरू कर दिया. जवाब में पुलिस गोली चलाने लगी. वहां एके 47 चली और थाना रोड में पिस्टल से गोलियां चलने की खबरें हैं. पुलिस की तरफ से लापरवाही हुई है. गोली चलाने का कोई कारण नहीं था. एके 47 और पिस्टल से गोलियां चली हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि एसपी के हाथ में चोट लग थी जिससे पुलिस उत्तेजित होकर फायरिंग करने लगी. यह क्रूरतम कार्रवाई हैं. इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.”
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