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पत्थर भरा रहस्यमयी ट्रक: कैसे घूमता रहा प्रदर्शनस्थल के आस-पास पुलिस की गिरफ्त वाला ट्रक
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 20 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे दावा किया कि जंतर-मंतर के पास पत्थरों से भरा एक ट्रक खड़ा है और साथ में सवाल उठाया कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच वह वहां कैसे पहुंचा. आशंका जताई कि इसका इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों को फंसाने या हिंसा भड़काने के लिए किया जा सकता है. इसके बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीप्के ने एक वीडियो जारी कर पत्थर भरे ट्रक को लेकर सवाल किया कि जहां दिल्ली पुलिस परिंदे को भी पर नहीं मारने दे रही है. वहां पत्थर भरे ट्रक कहां से आए, दिल्ली पुलिस इसका जवाब दे.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन वाली जगह के पास एक क्षतिग्रस्त वैन भी खड़ी की हुई थी और दावा किया कि बाद में इसका इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों पर तोड़-फोड़ का आरोप लगाने के लिए किया जा सकता है. हालांकि दिल्ली पुलिस ने तत्काल इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
उस वक्त यह ट्रक संसद मार्ग और जंतर-मंतर को जोड़ने वाली सड़क पर खड़ा था. वीडियो जारी होने के बाद इस ट्रक की लोकेशन बदल गई. 25 जुलाई को इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एक वीडियो जारी कर बताया कि तीन दिनों से वही ट्रक इंडियन यूथ कांग्रेस के 5, रायसीना रोड स्थित दफ्तर के बाहर खड़ा था. यूथ कांग्रेस की कई शिकायतों के बाद 25 जुलाई को लगभग 12 बजे उक्त ट्रक को वहां से हटा लिया गया. इस बीच यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ बहस भी देखने को मिली.
अब सवाल उठता है कि ट्रक और क्षतिग्रस्त वैन वहां कैसे पहुंचे?
न्यूज़लॉन्ड्री ने इस पूरे मामले की तफ्तीश की. हमने पाया कि 16 जुलाई को सुबह करीब 4 बजे ‘HR63 E 6865’ नंबर का ट्रक, ‘HR43 D 9778’ नंबर वाली मारुति इको से टकरा गया था. यह दुर्घटना लटियन दिल्ली के फिरोज शाह रोड, कस्तूरबा गांधी मार्ग क्रॉसिंग पर हुआ था. इसके बाद पुलिस ने इस ट्रक और ईको वैन को उठा कर संसद मार्ग थाने में खड़ा कर दिया. इस मामले में एक एफआईआर भी दर्ज हुई है. हमने पाया कि ट्रक केशव कुमार साहनी के नाम पर रजिस्टर है.
केशव ने हमें बताया कि इस ट्रक का वैन से एक्सीडेंट हो गया था उसके बाद से वह थाने में जब्त है. वो आगे कहते हैं, “यह डंपर ट्रक है जो कि निर्माण कार्य के लिए ईंट-पत्थर ढो रहा था. हालांकि हमने करीब दो महीने पहले यह डंपर बेच दिया था. उसका एग्रीमेंट मेरे पास है.”
वहीं, ईको वैन होशियार सिंह के नाम पर रजिस्टर है. होशियार सिंह से हमने बात की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने यह गाड़ी चार साल पहले बेच दी थी. उन्होंने हमारा संपर्क वर्तमान मालिक हुकम चंद से कराया. दुर्घटना के वक्त गाड़ी फरीदाबाद निवासी सौरव सिंघल चला रहे थे. वहीं, हुकुम चंद के रिश्तेदार चरण सिंह क्षतिग्रस्त वैन को थाने में जमा करवा कर आए थे.
सिंह ने हमें बताया, “जब एक्सीडेंट हुआ था तब गाड़ी में सात लोग बैठे थे. सबको चोटें आई हैं. एक ईंट पत्थर भरा ट्रक था, जिसने हमारी गाड़ी को टक्कर मार दी थी.”
न्यूज़लॉन्ड्री के पास मौजूद एफआईआर के मुताबिक, घटना 4:15 मिनट की है. इसमें लिखा है कि ट्रक तेज गति तथा लापरवाही से चलाता हुआ आया और वैन को जोरदार टक्कर मार दी. इसमें बैठे सात लोग घायल हो गए.
फिलहाल चरण सिंह की वैन पार्लियामेंट थाने के बाहर खड़ी है. हमने सिंह को 20 जुलाई का वीडियो दिखा कर पूछा कि क्या आपने यहीं पर वैन को खड़ा किया था? सिंह ने हमें बताया, “जहां मैंने अपनी गाड़ी खड़ी की थी वहां पर अन्य टूटी फूटी गाड़ियां भी खड़ी थीं, यह गाड़ी जहां अभी खड़ी है हमने वहां खड़ी नहीं की थी.”
यह बात साफ थी कि यह एक्सीडेंट का मामला था. इस मामले में एफआईआर भी दर्ज है. बावजूद इसके पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के पुलिस स्टाफ ने हमें बताया कि यह गाड़ी प्रदर्शनकारियों ने तोड़ी है. उन्होंने यह भी कहा कि यही गाड़ी नहीं बल्कि हमारी अन्य गाड़ियां भी तोड़ी गई हैं.
जब हमने उनसे सवाल किया कि यह तो दुर्घटना में टूटी है और इसमें एफआईआर भी दर्ज है. इसके बाद वो पुलिसकर्मी हमें नाम गोपनीय रखने की शर्त पर पूरी बात बताते हुए कहते हैं, “आपकी बात सही है. यह ट्रक पार्लियामेंट स्ट्रीट के बाहर ही खड़ा था. जहां अभी वैन खड़ी है उसके ठीक अपोजिट साइड में. लेकिन जैसे ही 20 जुलाई की सवेरे ट्रक का वीडियो वायरल हुआ, उसके बाद ट्रक को भलस्वा इलाके में ले जाकर हमने इसे खाली किया और फिर से वापस लाकर यहीं पर खड़ा कर दिया था.”
इस केस की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी मोहित भाटी कहते हैं कि यहां प्रदर्शन चल रहे थे और हमारे पास जगह कम थी, इसलिए हमने इसे यहां से हटा दिया था.
सवाल है कि अगर ट्रक पार्लियामेंट स्ट्रीट पर खड़ा था तो वहां से यूथ कांग्रेस के दफ्तर के बाहर कैसे पहुंचा? इस सवाल पर भाटी कहते हैं, “हमने गाड़ी सीज कर दी थी उसके बाद से यह मालखाना विभाग के कब्जे में है. इससे ज्यादा मैं आपको कुछ नहीं बता सकता हूं. बाकी जानकारी के लिए आप एसएचओ से संपर्क करें.”
25 जुलाई की दोपहर तक वह ट्रक यूथ कांग्रेस के दफ्तर के बाहर खड़ा था. इसे लेकर लगातार सवाल उठते रहे कि यह ट्रक यहां कैसे पहुंचा?
आईवाईसी दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष अक्षय लाकरा ने हमें बताया, “वह ट्रक पिछले चार दिनों से हमारे दफ्तर के बाहर खड़ा था. हमने कई बार इसकी शिकायत की तब जाकर तीन दिन बाद उसे हटाया गया. उनका दावा है कि इस ट्रक को यहां पुलिस ने ही खड़ा किया था और अब उन्होंने ही हटाया है. वे कहते हैं कि जिस जोन में ट्रक कि नो एंट्री है, वहां ट्रक आया कैसे. और तीन दिन तक लावारिस खड़ा रहा. यहां लाने का मकसद क्या था?”
21 जुलाई की शाम को यूट्यूबर रतन रंजन ने यूथ कांग्रेस के दफ्तर के बाहर से एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा था कि यह वही ट्रक है जो संसद मार्च वाले प्रदर्शन के दिन जंतर मंतर पर खड़ा था. दिल्ली पुलिस को इसकी जांच करनी चाहिए कि जंतर मंतर वाला डंपर यहां क्या कर रहा है.
इस मामले पर हमने संसद मार्ग थाने के एसएचओ नीरज कुमार से बात की. वह हमें एक नई बात बताते हैं. उनके मुताबिक इस ट्रक को 19 तारीख को खाली करवा दिया था. यह जो वीडियो वायरल हो रहे हैं यह सब पुराने वीडियो हैं. मीडिया इसे गलत तरीके से दिखा रही है.
एक जब्तशुदा ट्रक, जिसने एक्सिडेंट कर रखा था वह यूथ कांग्रेस के दफ्तर के बाहर कैसे पहुंचा? इस सवाल पर वे कहते हैं कि हम उसे कहीं पर भी खड़ा करें उससे क्या मतलब है.
मालखाने के एक पुलिसकर्मी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर हमें बताया कि फिलहाल वह ट्रक काली बाड़ी मार्ग पर ट्रैफिक पिट पर खड़ा है. हालांकि, जब हम वहां पहुंचे तो वह ट्रक वहां पर मौजूद नहीं था.
मालखाने, ट्रैफिक पुलिस और पार्लियामेंट थाने के पुलिसकर्मियों की बातों में विरोधाभास नजर आता है. ट्रक फिलहाल कहां है, इसकी कोई जानकारी नहीं है. जबकि वह वैन अभी भी वहीं खड़ी है.
कुछ सवाल बदस्तूर बने हुए हैं. संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो रहा था, नई दिल्ली ज़िले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी, सीजेपी का प्रोटेस्ट चल रहा था और इसके बावजूद पुलिस की जब्ती में एक ट्रक संदिग्ध रूप से लगातार लोकेशन बदलता रहा.
दिल्ली पुलिस की सफाई
न्यूज़लॉन्ड्री की ख़बर प्रकाशित होने के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक स्पष्टीकरण जारी किया है. पुलिस ने अपने ट्वीट में कहा, 'चलो संसद' आंदोलन के लिए क़ानून व्यवस्था के मद्देनज़र ट्रक को सुरक्षित जगह पर भेज दिया गया था. इस वाहन को प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ किसी साज़िश से जोड़ने वाला कोई भी दावा पूरी तरह से बेबुनियाद है.
नोट: इस ख़बर को 29 जुलाई को दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया जोड़ने के लिए अपडेट किया गया.
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