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कॉकरोच जनता पार्टी की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई
नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के डिप्टी स्पीकर हॉल में निर्धारित समय से पहले ही पत्रकारों की भीड़ जुटने लगी थी. सीटें जल्दी भर गईं और कई पत्रकारों को फर्श पर बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस सुननी पड़ी.
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए भी अहम थी क्योंकि पहली बार कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नए नियुक्त प्रवक्ता मीडिया के सामने आए और पार्टी की प्राथमिकताओं और आगामी योजनाओं पर विस्तार से बात की. यह कार्यक्रम ऐसे समय हुआ जब पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीप्के 6 जून को भारत लौटने वाले हैं.
सीजेपी ने बीते दिन अपने तीन नए प्रवक्ताओं की घोषणा की. पत्रकार सौरव दास को मुख्य प्रवक्ता बनाया गया, जबकि राजनीतिक शोधकर्ता और फिल्म निर्माता विजेता दहिया तथा पूर्व प्रबंधन सलाहकार आशुतोष रांका को भी प्रवक्ता नियुक्त किया गया.
प्रवक्ताओं ने पार्टी के मुख्य एजेंडे को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि उनका प्रमुख उद्देश्य शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग है. सौरव दास ने बताया कि इस मांग के समर्थन में अब तक आठ लाख से अधिक हस्ताक्षर जुटाए जा चुके हैं. उन्होंने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था को ‘जवाबदेही से रहित’ बताते हुए कहा कि ‘गैर-जवाबदेही की संस्कृति को समाप्त होना चाहिए.’
प्रवक्ताओं ने 6 जून को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की पूरी योजना भी साझा की. उनके अनुसार, अभिजीत दीप्के सुबह करीब 8 बजे दिल्ली पहुंचेंगे और समर्थकों से एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने की अपील की गई है. इसके बाद समूह संसद मार्ग थाने जाकर प्रदर्शन की अनुमति मांगेगा और फिर जंतर-मंतर की ओर कूच करेगा.
सौरव दास ने कहा, 'हमने खुला आह्वान किया है. कोई भी व्यक्ति बिना किसी पार्टी के झंडे या बैनर के हमारे साथ जुड़ सकता है. हम सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों से संवाद के लिए तैयार हैं.'
हालांकि, इस खुले आमंत्रण के साथ एक शर्त भी रखी गई. आयोजकों ने प्रतिभागियों से कहा कि वे किसी राजनीतिक दल या संगठन के झंडे-बैनर लेकर न आएं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने एक महत्वपूर्ण प्रक्रियागत सवाल भी उठाया. आमतौर पर दिल्ली पुलिस किसी प्रदर्शन की अनुमति के लिए सात दिन पहले आवेदन मांगती है, जबकि सीजेपी उसी दिन अनुमति लेकर प्रदर्शन करने की योजना बना रही है. पत्रकारों ने पूछा कि यदि अनुमति नहीं मिली तो उनकी क्या रणनीति होगी.
इस पर प्रवक्ताओं ने कहा कि जिन मुद्दों को वे उठा रहे हैं- जैसे परीक्षा पत्र लीक होना और मूल्यांकन प्रणाली की खामियां, वे दिल्ली पुलिसकर्मियों के बच्चों को भी प्रभावित करते हैं. उनका कहना था कि चूंकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत होगा, इसलिए अनुमति मिलने का भरोसा है.
हालांकि, पत्रकारों के इस सवाल का जवाब नहीं मिला कि अनुमति के लिए आवेदन पहले क्यों नहीं किया गया. जब यह प्रश्न विजेता दहिया से पूछा गया तो उन्होंने प्रक्रिया संबंधी सवालों के बजाय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर चर्चा करने की जरूरत पर जोर दिया.
16 मई को आंदोलन की शुरुआत के बाद से ही उस पर फंडिंग को लेकर सवाल उठते रहे हैं. विशेष रूप से विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, हालांकि अब तक इनके समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है. प्रेस कॉन्फ्रेंस के खर्च के बारे में पूछे जाने पर सौरव दास ने कहा, 'हमें आखिर फंडिंग की जरूरत ही क्या है? एक पोस्टर छपवाने में 200 रुपये लगते हैं.' उन्होंने विदेशी फंडिंग के आरोपों को किसी भी राजनीतिक आंदोलन के खिलाफ इस्तेमाल होने वाला एक ‘काउंटर नैरेटिव’ बताया.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आम आदमी पार्टी से कथित संबंधों को लेकर भी सवाल पूछे गए. यह मुद्दा इसलिए उठा क्योंकि अभिजीत दीप्के पहले आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम के कोर सदस्य रह चुके हैं. इस पर आशुतोष रांका ने कहा कि किसी व्यक्ति की पुरानी राजनीतिक संबद्धता को मौजूदा आंदोलन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए.
वहीं सौरव दास ने कहा कि व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वालों को अक्सर 'राष्ट्र-विरोधी', 'पाकिस्तानी' या विपक्ष से जुड़ा हुआ बताने की कोशिश की जाती है.
अब सभी की नजरें 6 जून को होने वाले प्रदर्शन पर टिकी हैं. इस प्रदर्शन में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले सोनम वांगचुक के भी शामिल होने की संभावना है.
न्यूज़लॉन्ड्री में संपादकीय इंटर्न समग्र ठाकुर के इनपुट्स सहित.
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