सुधीर चौधरी की तस्वीर.
Khabar Baazi

मोदी के इंटरव्यू गिनाए, प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चुप रहे सुधीर चौधरी का ‘असली गोदी मीडिया’ फॉर्मूला

नार्वे की महिला पत्रकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संयुक्त प्रेस संबोधन में एक सवाल क्या कर लिया, भारत में कुछ पत्रकार इस मामले पर इतना आहत हो गए कि उन्होंने एक अलग ही एजेंडा अपना लिया.  कुछ ने महिला पत्रकार को कोसा तो कुछ ने उसका सामान्य ज्ञान जांचा. 

अब इस मसले पर ‘सरकारी पत्रकार’ सुधीर चौधरी अलग ही तर्क गढ़ लाए हैं. उन्होंने बीती रात अपने कार्यक्रम ‘डिकोड’ में ‘असली गोदी पत्रकारों’ के बहाने ये साबित करने की जुर्रत की कि पीएम मोदी सवालों से नहीं बचते. जबकि, यूपीए के दौर में पत्रकार नेताओं को खुश करते थे. 

अब आप पूछेंगे कि इस बात का उनके पास क्या सबूत है? चौधरी ने अपने तर्क के समर्थन में 2016 के एक साक्षात्कार का हवाला दिया. जिसमें एक पत्रकार ने सोनिया गांधी से उनकी सास इंदिरा गांधी के साथ संबंधों को लेकर सवाल किए. इसके अलावा 2014 की एनडीटीवी की एक पुरानी क्लिप का जिक्र था, जिसमें पत्रकार राहुल गांधी से समोसे और जलेबी का स्वाद पूछते नज़र आ रहे हैं.

चौधरी ने इन उदाहरणों के ज़रिए यह साबित करने की कोशिश की कि असलियत में ऐसे पत्रकार ‘ओजी गोदी मीडिया’ (असली गोदी पत्रकार) की श्रेणी में आते हैं. 

चौधरी ने कहा कि इन नेताओं से अलग प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय मीडिया द्वारा पूछे गए हर तरह के सवालों का सामना किया. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने सैंकड़ों इंटरव्यू दिए हैं. 

हालांकि, यह विडंबना ही है कि चौधरी खुद गोदी मीडिया के सबसे प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं.

2018 के जनवरी में, जब चौधरी जी न्यूज के एडिटर-इन-चीफ थे, तब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक घंटे का साक्षात्कार किया. जिसमें वह प्रधानमंत्री की तारीफ कर रहे थे या सवाल पूछ रहे थे. कहना मुश्किल है. मसलन, चौधरी ने कहा, “आप फकीर की तरह रहते हैं… इस उम्र में आपके पास इतनी ताकत कहां से आती है? क्योंकि इस उम्र में कोई ऐसा जीवन जीने के बारे में सोच भी नहीं सकता. आपकी ऊर्जा देखकर कोई भारतीय युवा भी शर्मा जाए.”

इसके बाद मई 2019 में, लोकसभा चुनाव से कुछ दिन पहले, चौधरी को मोदी के साथ एक और साक्षात्कार का मौका मिला, जिसमें उन्होंने गर्मजोशी से टिप्पणी की कि विपक्ष शायद मोदी के “बैग पैक” करने के सपने देख रहा होगा.

चौधरी ने राहुल गांधी के समोसा-जलेबी को लेकर जो दावा किया.  वह प्रसंग उमाशंकर सिंह से जुड़ा है. वह एनडीटीवी में पत्रकार रह चुके हैं. चौधरी ने अपने शो में उनके समोसा-जलेबी वाली क्लिप का संदर्भ दिया था.

इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर सिंह भी तीखे और आक्रामक अंदाज में चौधरी को जवाब देते नजर आए. सिंह ने कहा कि उस क्लिप का कैप्शन “लाइट-हार्टेड मोमेंट ऑफ पॉलिटिक्स” था, जो उस समय सामने आया जब वे राहुल गांधी पर लगे स्कैम के आरोपों को लेकर चर्चा कर रहे थे.

चौधरी ने इस मामले में जो बात छुपा ली वो ये कि सिंह कोई साक्षात्कार नहीं कर रहे थे. वह  टीवी पत्रकारिता की भाषा ‘टिक-टैक’ कर रहे थे. जहां नेताओं से जनसभाओं या कार्यक्रमों से निकलते समय अनौपचारिक तरीके से छोटे सवाल पूछे जाते हैं.  

वहीं, दूसरी तरफ चौधरी को एक पूरी तरह औपचारिक साक्षात्कार करने की अनुमति मिली थी, लेकिन वह मोदी से ‘आपको इतनी ताकत कहां से मिलती है?’ जैसे सवालों से आगे नहीं बढ़ पाए.

चौधरी ने कई बार यह भी दावा किया है कि जो लोग भारत की तरक्की नहीं देखना चाहते, वे मोदी की कमियां दिखाकर ऐसे नैरेटिव फैलाते हैं, जिससे भारत के लोकतंत्र और प्रेस को कमजोर या ‘अनफ्री’ दिखाया जा सके. उन्होंने 28 वर्षीय नॉर्वेजियन पत्रकार हेले लिंग को भी इस कथित कैंपेन का हिस्सा बताया.

चौधरी के दावे के मुताबिक, मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को 150–200 साक्षात्कार दिए हैं, इसलिए ‘प्रतिबंधित प्रेस’ का दावा पूरी तरह गलत है.

हालांकि, यह बात पूरी तरह गलत नहीं है कि प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी ने लंबे समय से खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से सीधे सवाल नहीं लिए हैं.

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