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अडाणी पर एनडीटीवी: कुछ छापा, काफी कुछ छिपा लिया
क्या होता है जब दिन की सबसे बड़ी ख़बर आपके मालिक के बारे में हो? और तब क्या हो जब ये मालिक किसी मीडिया संस्थान का हो?
तब संपादकों और न्यूज़रूम के सामने बड़ी दुविधा की स्थिति खड़ी हो जाती है. क्या लिखें, क्या कवर करें और क्या छोड़ें.
एनडीटीवी के लिए भी कल का दिन कुछ ऐसा ही रहा. वजह है मीडिया समूह के मालिक गौतम अडाणी. जिनके खिलाफ अमेरिका में चल रहे कथित धोखाधड़ी के मामले को बंद किए जाने की ख़बरें आ रही हैं.
मालूम हो कि अमेरिकी अधिकारियों ने नवंबर, 2024 में गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत में सौर ऊर्जा का ठेका हासिल करने के लिए कथित तौर पर 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत दी और फिर अमेरिकी निवेशकों से इस बारे में गलत जानकारी साझा की.
अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप था कि इन कथित रिश्वतों की जानकारी छिपाकर अनुदान (फंडिंग) हासिल किया गया. हालांकि, अडाणी समूह ने इन आरोपों से इनकार किया था. इस पूरे मामले पर ज्यादा जानकारी के लिए आप न्यूज़लॉन्ड्री की यह रिपोर्ट पढ़ सकते हैं.
ऐसे में जब खबर आई कि अमेरिकी न्याय विभाग केस वापस लेने की दिशा में बढ़ रहा है, तो एनडीटीवी ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को अपनी वेबसाइट पर ‘गौतम अदाणी के खिलाफ अमेरिका में खत्म होंगे केस- रिपोर्ट’ शीर्षक से प्रकाशित किया.
रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका का न्याय विभाग इसी हफ्ते अदाणी के खिलाफ आरोपों को वापस लेने की घोषणा कर सकता है. साथ ही अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) भी अदाणी और अन्य के खिलाफ नवंबर, 2024 में शुरू किए गए समानांतर सिविल फ्रॉड के मामले को निपटाने की तैयारी कर रहा है.
टीवी पर एनडीटीवी इंडिया ने इसे और संक्षेप में पेश किया.
“गौतम अडाणी पर ब्लूमबर्ग के हवाले से बड़ी खबर मिल रही है,” एंकर ने ख़बर ब्रेक करते हुए कहा. इसके बाद चैनल ने बताया कि अमेरिका में चल रहे केस खत्म हो सकते हैं और अडाणी समूह सभी आरोपों से इनकार करता है.
वेबसाइट और टीवी दोनों जगह एक डिस्क्लेमर भी था कि एनडीटीवी, एएमजी मीडिया नेटवर्क लिमिटेड की सहायक कंपनी है, जो अडाणी समूह का हिस्सा है.
लेकिन कहानी का एक अहम हिस्सा एनडीटीवी की कवरेज से गायब था.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में क्या था?
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसी मामले पर रिपोर्ट करते हुए एक महत्वपूर्ण दावा किया.
रिपोर्ट के मुताबिक, अडाणी की कानूनी टीम अमेरिकी न्याय विभाग के पास 100 स्लाइड्स की प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) लेकर गई थी, जिसमें कहा गया था कि अभियोजन पक्ष ने अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है. लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, इन स्लाइड्स में एक ‘असामान्य प्रस्ताव’ भी था.
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, यदि अमेरिकी अभियोजक केस वापस लेते हैं तो अडाणी समूह अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 10 अरब डॉलर का निवेश करेगा और 15,000 नौकरियों के अवसर पैदा करेगा.
रिपोर्ट में कहा गया कि अडाणी ने रॉबर्ट जे. गिफ्रा जूनियर को अपनी कानूनी टीम का नेतृत्व सौंपा था, जो डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकीलों में से एक रहे हैं.
यह बैठक अप्रैल में वॉशिंगटन स्थित न्याय विभाग मुख्यालय में हुई बताई गई.
13 नवंबर 2024 को, अमेरिकी चुनाव में ट्रंप की जीत के कुछ दिन बाद, गौतम अडाणी ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप को बधाई दी थी और अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश तथा 15,000 नौकरियां पैदा करने की घोषणा की थी.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह सार्वजनिक निवेश की घोषणा और न्याय विभाग के सामने दिया गया निजी प्रस्ताव, दोनों एक ही चीज थे.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग अलग से अडाणी समूह की जांच कर रहा है. आरोप है कि समूह ने अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए ईरानी गैस की शिपिंग की.
द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ट्रेजरी विभाग लगभग 275 मिलियन डॉलर का अलग जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है.
एनडीटीवी इंडिया और प्रोफिट की कवरेज
एनडीटीवी प्रोफिट ने इस मामले पर ‘अडानी समूह की जीत: विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में केस बंद होने से वैश्विक पूंजी के लिए रास्ते खुले’ शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की.
रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी केस बंद होने की संभावना अडाणी समूह के लिए ‘बड़ी सकारात्मक खबर’ है और इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है.
एनडीटीवी प्रॉफिट ने वरिष्ठ वकील संजय अशर का बयान छापा, जिसमें उन्होंने कहा कि मामला अब लगभग समाप्त माना जा सकता है और इससे समूह को वैश्विक निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी.
इसी मुद्दे पर एनडीटीवी इंडिया में विकास भदौरिया द्वारा संचालित किए गए एक कार्यक्रम में भी चर्चा हुई.
यहां पैनल में एनडीटीवी इंडिया और एनडीटीवी प्रॉफिट के पत्रकारों के अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संगीत रागी और थिंक टैंक सीआईपीपी के संस्थापक यतीश राजावत शामिल थे.
चर्चा के दौरान भदौरिया ने कहा, “इस मामले में दुर्भावना ज्यादा दिख रही थी, अडाणी के खिलाफ दर्ज केस का अमेरिका से कोई लेना-देना नहीं था.”
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर उस पुराने सवाल को सामने लाता है कि जब किसी मीडिया संस्थान का मालिक खुद खबर बन जाए, तो न्यूज़रूम की स्वतंत्रता कितनी बचती है?
इसीलिए जरूरी है कि आप ऐसे संस्थानों को समर्थन दें और स्वतंत्र पत्रकारिता में यकीन रखते हैं. न्यूज़लॉन्ड्री एक ऐसा ही संस्थान है. आज ही सब्स्क्राइब करें.
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