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नोएडा हिंसा मामले में पत्रकार सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी की आलोचना, जानबूझ कर निशाना बनाने के आरोप
वकीलों के एक समूह ने उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है. 'द हिंदुस्तान गजट' के अनुसार, इस शिकायत में नोएडा हिंसा साज़िश मामले में आरोपी पांच लोगों के साथ कथित तौर पर यातना, मनगढ़ंत बरामदगी और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. गौरतलब है कि इन पांच लोगों में लखनऊ के पत्रकार सत्यम वर्मा भी शामिल हैं.
मालूम हो कि लखनऊ के पत्रकार और यूएनआई की हिंदी सेवा 'यूनीवार्ता' के पूर्व संपादक वर्मा को इस मामले के सिलसिले में 17 अप्रैल को लखनऊ के जनचेतना बुकस्टोर से गिरफ़्तार किया गया था. उन्होंने कई किताबों का अनुवाद किया है, जिनमें 'भगत सिंह के साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़' भी शामिल है. इसके अलावा वर्मा कई प्रगतिशील समूहों से जुड़े हुए हैं. वह इतिहासकार लाल बहादुर वर्मा के बेटे हैं.
गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने दावा किया कि पत्रकार वर्मा और दिल्ली निवासी हिमांशु दोनों 'मज़दूर बिगुल दस्ता' नामक एक मज़दूर संगठन के सक्रिय सदस्य थे. दोनों ने नोएडा में मज़दूर आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने और उसे समन्वित करने में मदद की थी.
विरोध प्रदर्शन के हिंसक झड़पों में बदलने के बाद पुलिस ने फ़ेज़-2 पुलिस थाने में एक एफआईआर दर्ज की थी. वर्मा की गिरफ़्तारी की सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी आलोचना की है. उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस पर बुद्धिजीवियों और मज़दूर अधिकारों के समर्थकों के ख़िलाफ़ "निशाना बनाने" का आरोप लगाया है.
अब, सामाजिक कार्यकर्ता, कवि और पत्रकार 'सत्यम वर्मा रिहाई मंच' के बैनर तले एकजुट हुए हैं, और वे मंगलवार को सुबह 11:30 बजे दिल्ली स्थित 'प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया' में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेंगे. उम्मीद है कि इस कार्यक्रम को कई सार्वजनिक बुद्धिजीवी और कार्यकर्ता संबोधित करेंगे, जिनमें इतिहासकार इरफ़ान हबीब भी शामिल हैं.
मंच के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में, वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन ने कहा कि सत्यम वर्मा और उनके साथ गिरफ़्तार किए गए अन्य लोग "साज़िशकर्ता नहीं हैं. वे ऐसे लोग नहीं हैं जो हिंसा के औज़ारों से हिंसा की वकालत करते हों."
इस चैनल पर गिरफ़्तारी की निंदा करने वालों में 'राजस्थान पत्रिका' के पत्रकार स्वतंत्र मिश्रा भी शामिल थे. वर्मा के पत्रकारिता करियर और उनके अनुवाद कार्यों के बारे में बात करते हुए मिश्रा ने कहा, "हम उनके ऋणी हैं और जिस तरीक़े से इस गिरफ्तारी को अंजाम दिया गया वह शर्मनाक है.”
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