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भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने क्यों कहा- ‘बांग्लादेशी हिंदू को हम घुसपैठिया नहीं मानते’
पश्चिम बंगाल में चुनाव में अब सिर्फ दो हफ्ते बचे हैं. इसी बीच चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. विपक्षी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया गया है, जिससे बीजेपी को फायदा पहुंचाया जा सके.
इसके अलावा बंगाल में अवैध घुसपैठ भी एक बड़ा मुद्दा है. न्यूज़लॉन्ड्री की ओर से वरिष्ठ पत्रकार श्रीनिवासन जैन ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रमुख चेहरे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मुख्य प्रतिद्वंद्वी सुवेंदु अधिकारी से घुसपैठ, एसआईआर समेत उन पर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों समेत कई मुद्दों पर बात की.
सुवेंदु अधिकारी ने भारत-बांग्लादेश सीमा की स्थिति को ‘चिंताजनक’ बताया. उनका कहना है कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा को लेकर तैयार थी, लेकिन राज्य सरकार के सहयोग की कमी के कारण 600 किलोमीटर के हिस्से में बाड़ लगाने का काम नहीं हो पाया. उनके मुताबिक, “ममता बनर्जी ने जमीन उपलब्ध नहीं कराई, जिसकी वजह से हालात बिगड़े और भारत विरोधी व चरमपंथी ताकतों को संरक्षण मिला.”
हालांकि, प्रवासियों को लेकर उन्होंने स्पष्ट अंतर भी बताया. उन्होंने कहा कि बीजेपी बांग्लादेश से आए हिंदुओं को घुसपैठिया नहीं, बल्कि शरणार्थी मानती है.
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लगे आरोपों पर अधिकारी ने चुनाव आयोग का बचाव किया. उन्होंने कहा कि आयोग का काम वास्तविक मतदाताओं की पहचान करना और फर्जी, मृत या गैर-नागरिकों के नाम हटाना है.
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस प्रक्रिया का इस्तेमाल भाजपा के पक्ष में किया गया, तो उन्होंने जिम्मेदारी राज्य सरकार पर डालते हुए कहा कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की नियुक्ति राज्य सरकार के जरिए होती है, इसलिए तार्किक गड़बड़ियों (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी) की जिम्मेदारी भी राज्य की है.
टीएमसी छोड़कर दिसंबर, 2020 में बीजेपी में शामिल होने को लेकर उन पर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों पर अधिकारी ने कि उनका फैसला किसी जांच एजेंसी के डर से नहीं, बल्कि सिद्धांतों के आधार पर था. उन्होंने कहा कि टीएमसी में मौजूद भारी भाई-भतीजावाद, तुष्टिकरण की राजनीति और ममता बनर्जी का निरंकुश रवैया उनके जाने की मुख्य वजह रहे.
सुवेंदु अधिकारी का दावा है कि इस बार माहौल उनके पक्ष में है और जनता बदलाव के लिए तैयार है.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में घुसपैठ, मतदाता सूची और दल-बदल जैसे मुद्दे इस चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना रहे हैं. अब देखना होगा कि इन विवादों का असर वोटिंग पर कितना पड़ता है.
देखिए यह पूरी खास बातचीत.
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