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कार्टून से डर क्यों? व्यंग्य पर बढ़ती सरकारी पाबंदी की पड़ताल
भारत में बीते दिनों कई पोस्ट, कार्टून, व्यंग्यात्मक वीडियो और सोशल मीडिया हैंडल्स को प्रतिबंध का सामना करना पड़ा है. कुछ को पूरी तरह हटा दिया गया है तो वहीं कई पोस्ट्स सिर्फ भारत में दिखने बंद हो गए हैं. इसके पीछे कारण भारत सरकार की ओर से भेजी गई एक वैधानिक अपील (लीगल डिमांड) है. जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने यह कदम उठाया. इस कार्रवाई का सामना करने वाले ज्यादातर पोस्ट्स में प्रधानमंत्री या सरकार की नीतियों पर सवाल किये जा रहे थे.
एक्स की ओर से सोशल मीडिया यूजर को भेटे गए नोटिस में आमतौर पर सिर्फ यह लिखा होता है कि ‘आपके एक्स अकाउंट के संबंध में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आईटी एक्ट के तहत एक ब्लॉकिंग ऑर्डर मिला है. कानूनी प्रतिबंधों के कारण, हम आपको अतिरिक्त जानकारी प्रदान करने में असमर्थ हैं.’
इस तरह नोटिस में ब्लॉक करने का कारण नहीं बताया जाता लेकिन अकाउंट या पोस्ट हटा दी जाती है. कानूनी विशेषज्ञ इसे 'सीक्रेट सेंसरशिप' का नाम दे रहे हैं, जहां अपना पक्ष लोगों को रखने या गलती जानने का मौका भी नहीं मिलता.
जैसे कार्टूनिस्ट राकेश रंजन के एक कार्टून को केंद्रीय मंत्रालय के आदेश के बाद एक्स से हटा दिया गया. उनका यह कार्टून स्क्रॉल की एक रिपोर्ट पर आधारित था. जिसमें यह बताया गया कि भारत की टॉप बीफ एक्सपोर्ट कंपनी ने 2024-25 में बीजेपी को 30 करोड़ रुपये का चुनावी चंदा दिया.
इसी तरह से कार्टूनिस्ट गौरव सरजेराव, सतीश आचार्य और मंजुल के भी कई कार्टून्स हटाए गए. हालांकि, सोशल मीडिया पर पाबंदी का यह सिलसिला काफी पहले से चल रहा है. लेकिन डिजिटल स्पेस में असहमति और व्यंग्य की जगह अब कम होती जा रही है.
देखिए सोशल मीडिया पर बढ़ती पाबंदी को लेकर हमारी यह खास रिपोर्ट.
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