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ड्रोन हमले में तबाह हुए जहाज के भारतीय कप्तान का कोई सुराग नहीं, अधिकारी बोले- लापता, परिवार ने पूछा- कैसे मान लें
पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष का असर अब भारतीय परिवारों पर भी साफ दिखने लगा है.मध्य-पूर्व में छुट्टियां मनाने गए लोगों, वहां काम करने वाले प्रवासी भारतीयों और मर्चेंट नेवी में कार्यरत हजारों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संघर्ष के कारण फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री इलाकों में कम से कम 37 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं. इन पर 1100 से ज्यादा भारतीय नाविक सवार हैं. गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ में बढ़ते सैन्य तनाव और हमलों के कारण इन जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है.
इसके अलावा समुद्री उद्योग से जुड़े पूरे खाड़ी क्षेत्र में करीब 23 हजार भारतीय अलग-अलग जहाजों पर सफर कर रहे हैं.
इस संघर्ष में अब तक कम से कम तीन भारतीयों की मौत की आशंका जताई जा रही है. वहीं, कुछ घायल बता जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, ये सभी विदेशी झंडे वाले जहाजों पर तैनात थे. जो ओमान और आसपास के समुद्री इलाकों में ड्रोन और मिसाइल हमलों का शिकार हुए.
इसी बीच बिहार के 37 वर्षीय मर्चेंट नेवी कैप्टन आशीष कुमार का मामला सामने आया है. ओमान पोर्ट के पास हुए एक ड्रोन हमले में कैप्टन आशीष की मौत की आशंका जताई जा रही है.
जानकारी के मुताबिक, आशीष कुमार ‘स्काईलाइट’ वेसल के कप्तान थे. बताया जा रहा है कि 1 मार्च को एक ड्रोन हमले की चपेट में उनका यह वेसल आ गया.
वेसल पर कुल 10 क्रू मेंबर सवार थे. इनमें से आठ लोगों को ओमान की अथॉरिटी ने सुरक्षित बचा लिया जबकि दो लोगों को नहीं बचाया जा सका. भारतीय दूतावास की ओर से परिवार को ई-मेल के जरिए बताया गया कि 4 मार्च को जब ओमान की रेस्क्यू टीम वेसल पर पहुंची तो कैप्टन रूम में कुछ हड्डियां और एक खोपड़ी मिली. दूतावास का कहना है कि चूंकि कैप्टन के कमरे में किसी और को जाने की अनुमति नहीं होती, इसलिए संभावना है कि ये अवशेष आशीष कुमार के हो सकते हैं.
हालांकि, परिवार इस दावे से संतुष्ट नहीं है. आशीष कुमार के परिजन मांग कर रहे हैं कि कैप्टन रूम से मिले अवशेषों की फॉरेंसिक और डीएनए जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे वास्तव में आशीष कुमार के ही हैं या नहीं.
हमसे बातचीत में आशीष कुमार की पत्नी अंशु (32 वर्ष) ने कहा, “जब तक फॉरेंसिक टेस्ट से यह साबित नहीं हो जाता कि वे अवशेष उन्हीं के हैं, तब तक हम कैसे मान लें कि उनकी मौत हो गई है. हम अभी भी यही मानकर चल रहे हैं कि वे लापता हैं. सरकार से हमारी गुजारिश है कि एक अच्छी टीम भेजी जाए ताकि सच्चाई का पता चल सके.”
आशीष कुमार बिहार के बेतिया के रहने वाले थे और पिछले 16 साल से मर्चेंट नेवी में काम कर रहे थे. वह परिवार में सबसे बड़े थे. उनके अलावा दो भाई, माता-पिता, एक बहन और उनका 5 साल का बेटा है.
अंशु बताती हैं कि उनकी और आशीष कुमार की आखिरी बातचीत 28 फरवरी को हुई थी. 1 मार्च को उनके पांच साल के बेटे का स्कूल में एडमिशन होना था, जिसको लेकर उनकी बात हुई थी. आशीष कुमार ने उनसे कहा था कि कल जब स्कूल जाओ तो उन्हें फोन करना और अगर एडमिशन में कोई दिक्कत हो तो बताना.
1 मार्च की सुबह जब अंशु ने उन्हें फोन किया तो कॉल नहीं लगा. उन्होंने मैसेज भी किया, जो डिलीवर तो हो गया लेकिन उसके बाद कोई जवाब नहीं आया. फिर उनका फोन स्विच ऑफ हो गया.
अंशु कहती हैं, “हमें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि ओमान में किसी तरह का खतरा हो सकता है. वह पोर्ट पर थे और उन्होंने खुद कहा था कि पोर्ट सुरक्षित होता है.”
वह आगे बताती हैं, “1 मार्च शाम तक भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया तो परिवार ने जानकारी जुटानी शुरू की. आशीष कुमार के बहनोई आशीष कुमार (विक्की) ने बताया कि आशीष कुमार का जहाज 22 फरवरी से ही ओमान पोर्ट से 5 नॉटिकल माइल दूर खड़ा था. जब शनिवार देर रात तक उनका फोन नहीं लगा तो उन्होंने इंटरनेट पर ओमान से जुड़ी खबरें देखनी शुरू कीं. उसी क्रम मे हमे पता चला कि ओमान के खसाब पोर्ट पर जहाज पर हमला हुआ है. जिसमें सवार सभी बीस क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. जिसमें चार लोग घायल हैं. यह खबर देखकर हमने ओमान मे भारतीय दूतावास को संपर्क किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.”
उन्होंने कहा, “हमें तसल्ली थी कि शिप में सवार सभी लोगों को बचा लिया गया है. फिर मैने 2 मार्च की सुबह करीब तीन बजे आशीष कुमार की डिटेल्स के साथ मेल किया. जिसमे हमने दूतावास से निवेदन किया कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. जिसके जवाब में दूतावास की तरफ से 3 मार्च की रात करीब दस बजे हमें मेल के जरिए जवाब मिला.”
दूतावास ने अपने जवाब में कहा, “हमले के समय जहाज़ पर कुल 10 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे. ड्रोन से हमला होने के बाद जहाज़ में भीषण आग लग गई थी. ओमानी अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आठ भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया. हालांकि, आशीष कुमार और दलीप घटना के समय इंजन रूम में मौजूद थे और आग की चपेट में आ गए… जहाज़ का बड़ा हिस्सा पूरी तरह जल चुका है… आग की भयावहता को देखते हुए आगे की खोज में सकारात्मक परिणाम की संभावना बेहद कम मानी जा रही है.”
परिवार ने बताया कि इसके बाद 4 मार्च को देर रात दूतावास की तरफ से एक और ई-मेल आया, जिसमें लिखा था, “ओमानी कोस्ट गार्ड ने आज दोबारा तलाशी अभियान चलाया. इस दौरान जहाज़ के कप्तान के कमरे से जली हुई अवस्था में एक खोपड़ी और कुछ हड्डियां बरामद की गई हैं. चूंकि, कप्तान के कमरे में सामान्यतः कोई अन्य व्यक्ति प्रवेश नहीं करता. ऐसे में प्रारंभिक अनुमान है कि बरामद अवशेष संभवतः कैप्टन आशीष कुमार के हो सकते हैं.”
परिवार का कहना है कि दूतावास ने भी यह पक्के तौर पर नहीं कहा है कि ये अवशेष उन्हीं के हैं. इसलिए जब तक फॉरेंसिक और डीएनए जांच से इसकी पुष्टि नहीं हो जाती, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे.
बताया जा रहा है कि आशीष कुमार ने इसी साल जनवरी में ‘स्काईलाइट’ कंपनी जॉइन की थी और 28 जनवरी से उन्होंने अपनी नई सेवा शुरू की थी.
मणिकर्णिका घाट से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक, उजड़े (ढहा दिए गए) घरों और खामोश हो चुके मोहल्लों के बीच यह सीरीज़ बताएगी कि कैसे तोड़फोड़ की राजनीति बनारस की सिर्फ़ इमारतें नहीं, उसकी आत्मा को भी बदल रही है. बनारस पर हमारे इस सेना प्रोजेक्ट को सपोर्ट करिए.
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