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सड़कों पर कचरा, शहर में जाम: दिल्ली की ग्राउंड रियलिटी
जब हम दिल्ली के बाहर बैठ कर दिल्ली के बारे में सोचते हैं, तो हमें चौड़ी सड़कें और बड़ी-बड़ी इमारतें ही ख्याल में आती हैं लेकिन दिल्ली की हकीकत सिर्फ इतनी नहीं है. दिल्ली का एक दूसरा पहलू ये है कि यहां सड़कों पर कचरे के ढेर हैं और इसके चलते ट्रैफिक जाम एक आम बात है.
गौरतलब है कि साल 2024 तक दिल्ली के सभी ‘ढलाव’ बंद किए जाने थे. ढलाव यानी सेकेंडरी गार्बेज कलेक्शन सेंटर, जहां पहले कचरा जमा होता है और फिर उसे डंपिंग यार्ड तक भेजा जाता है. साल 2025 में एनजीटी को दी जानकारी के मुताबिक, सरकार ने दिल्ली के 985 ढलाव बंद कर दिए हैं लेकिन 500 से ज्यादा अब भी चालू हैं.
लोकल बॉडीज़ की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में रोज़ाना 11,108 टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है. प्रशासन का दावा है कि 100 प्रतिशत कचरा इकट्ठा किया जाता है. लेकिन प्रोसेसिंग की बात अलग है. केवल 5,280 टन यानी लगभग 47.5 प्रतिशत कचरा ही ट्रीट किया जाता है, जबकि 5,828 टन यानी करीब 52.5 प्रतिशत कचरा सीधे डंप कर दिया जाता है.
दिल्ली के कुछ इलाकों में जब हम पहुंचे तो हमें लगभग हर जगह कचरा फैला हुआ मिला. लेकिन जिन ढलावों पर सही तरीके से निगरानी नहीं हो रही थी, वहां की स्थिति और भी ज्यादा खराब थी. इससे आसपास के लोगों और दुकानदारों को काफी परेशानी हो रही है. कई जगहों पर कचरे की वजह से ट्रैफिक जाम भी लग जाता है.
एमसीडी के अधिकारियों का कहना है कि पहले कचरा घरों और सड़कों से इकट्ठा किया जाता है, फिर उसे ढलाव तक लाया जाता है. जहां कॉम्पैक्टर मशीन उपलब्ध होती है, इसके बाद कचरे को सीधे लैंडफिल साइट पर भेज दिया जाता है.
जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. विजय बाजपेयी ने एक और खास चीज की तरफ ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि आपको दिल्ली के पॉश इलाकों में कचरा नहीं मिलेगा लेकिन मध्यम वर्गीय या निम्न वर्गीय बसावट वाले इलाकों में यह मिल जाता है.
उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.
देखिए ये खास रिपोर्ट.
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