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‘यह रोड मुसलमानों के लिए नहीं’: सहारनपुर में खुलेआम मजहबी नफरत का प्रदर्शन
आपको ध्यान होगा कि हाल में ही न्यूज़लॉन्ड्री ने पिंकी चौधरी पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. चौधरी वही शख्स हैं, जो आए दिन किसी न किसी बहाने से देश के एक संप्रदाय के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं. कभी वह तलवारें बांटते हैं तो कभी दक्षिणपंथियों को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने से रोकने वाले दीपक को ठीक करने की धमकी देते हैं. चौधरी यह सब काम अपने हिंदू रक्षा दल के बैनर तले करते हैं. एक बार फिर उन्होंने दावा किया है कि नेशनल हाईवे पर नफरती नारा लिखने का काम उनके हिंदू रक्षा दल के लोगों ने किया है.
दरअसल, सोशल मीडिया पर बीते दिन से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें करीब तीन लोग एक हाईवे के किनारे ‘यह रोड मुसलमानों के लिए नहीं है’ लिखते हुए दिखाई दे रहे हैं. इनमें दो महिलाएं और एक पुरुष है. इस हरकत की जिम्मेदारी हिंदू रक्षा दल ने ली है. वहीं, इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है.
घटना 26 फरवरी की रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है. जानकारी के मुताबिक, यह उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के बिहारीगढ़ थाना क्षेत्र का दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे है.
वहीं, घटना के बाद हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने एक वीडियो बयान जारी किया. उन्होंने कहा, “सभी को एक बात बता देना चाहता हूं, दिल्ली-देहरादून हाईवे पर हमारे कार्यकर्ताओं ने लिखा है कि मुसलमानों के लिए सड़कें नहीं हैं. यह उन्होंने बिल्कुल ठीक लिखा है. आपको यह जानकारी होनी चाहिए कि देश में कितने प्रतिशत मुसलमान हैं और वे कितना टैक्स दे रहे हैं. भारत सरकार को भी यह चिंता करनी चाहिए कि हमारे टैक्स के दिए हुए पैसे का सारा लाभ ये लोग प्राप्त कर रहे हैं. जितनी भी सरकारी सुविधाएं हैं, उनका भी लाभ ये जिहादी उठा रहे हैं.”
उन्होंने अंत में सरकार से अपील करते हुए कहा कि मुसलमानों को सरकारी सुविधाओं से वंचित कर दिया जाना चाहिए. इस घटना के बाद एक बार फिर अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
वहीं, घटना के संबंध में पुलिस ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) में कार्यरत कर्मचारी सुनील कुमार, निवासी बन्जारेवाला, थाना बुग्गावाला, जनपद हरिद्वार की तहरीर पर बीएनएस की धारा 353(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है.
थाना बिहारीगढ़ के एसएचओ अक्षय शर्मा ने न्यूज़लॉन्ड्री से कहा, “यह घटना 26 फरवरी की है. जो वीडियो वायरल हो रहा है, हमारे पास भी फिलहाल उतनी ही जानकारी है. हमने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. ऐसा करने वाले लोग कौन हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है. हमें सूचना मिली है कि ये लोग हिंदू रक्षा दल से जुड़े हैं. ऐसा करने वालों में दो युवतियां और एक युवक शामिल हैं. घटना गणेश पुल टोल के पास एलीवेटेड हाईवे के लोहे के पुल की है. जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.”
फिलहाल, पुलिस ने हाईवे पर लिखे आपत्तिजनक शब्दों को काले रंग से पोत दिया है.
इस पूरी घटना पर स्थानीय पत्रकार कापेंद्र सैनी का कहना है कि जहां यह हरकत की गई, वहां से दिल्ली-देहरादून हाईवे गुजरता है, जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित है. लिखे जाने के बाद ही एनएचएआई के एक कर्मचारी ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत संज्ञान लेते हुए उसे मिटवा दिया और मामला दर्ज कर लिया.
बता दें कि हाल के दिनों में देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं. इससे पहले गाजियाबाद का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें हिंदू नेता सत्यम पंडित मीट शॉप बंद कराने को लेकर धमकी देते हुए कहते नजर आए थे कि मंगलवार को यह दुकान खुलनी नहीं चाहिए, वरना एक मिनट में आग लगा दूंगा.
वहीं, उत्तराखंड में शान मोहम्मद नामक एक व्यक्ति, जो लोहा-टीन खरीदने का काम करता है, से उसकी पहचान पूछे जाने का वीडियो वायरल हुआ. शान से पूछा गया कि वह हिंदू है या मुसलमान. जब उसने खुद को मुसलमान बताया तो खुद को बजरंग दल और राष्ट्रीय महाकाल सेना से जुड़ा बताते हुए उसे यह कहकर धमकाया गया कि यहां मुसलमानों की एंट्री नहीं है.
इसी तरह उत्तराखंड के रुद्रपुर से एक और वीडियो सामने आया, जिसमें एक मजदूर शाहिद को नमाज पढ़ने के दौरान कुछ युवक बेरहमी से पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं. आरोपी कहते हैं, “हमारी जमीन पर नमाज क्यों पढ़ रहा है? यह ब्राह्मण की जमीन है.”
इससे पहले लखनऊ यूनिवर्सिटी में भी नमाज पढ़ने को लेकर बवाल हुआ था. इस पर न्यूज़लॉन्ड्री ने विस्तार से रिपोर्ट प्रकाशित की है.
पिंकी चौधरी पर न्यूज़लॉन्ड्री ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. इस दौरान पिंकी ने न्यूज़लॉन्ड्री से कहा था कि उसके खिलाफ 37 मुकदमे दर्ज हैं और उन्हें ऐसे मुकदमों की कोई चिंता नहीं है. हमने पिंकी पर दर्ज करीब तीन दर्जन एफआईआर की जानकारी जुटाई है. पिंकी पर यह रिपोर्ट को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
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