Video
जेएनयू: वीसी के विवादित बोल, लेफ्ट का लॉकडाउन कॉल और एबीवीपी से हुए टकराव की पूरी कहानी
22 फरवरी की रात जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेनयू) में छात्र गुटों में झड़प हुई. जेनयूएसू ने विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के एक पॉडकास्ट में दिए बयान के खिलाफ रैली निकाली थी. छात्रों का आरोप है कि कुलपति की टिप्पणी “जातिवादी” है और उन्हें इस्तीफा देना चाहिए.
द संडे गार्डियन पॉडकास्ट में कुलपति ने यूजीसी की इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को “अनावश्यक” बताते हुए कहा, “कुछ लोगों की मानसिकता खुद को स्थायी तौर पर पीड़ित मानने की हो गई है.. आप हमेशा खुद को पीड़ित मानकर या विक्टिम कार्ड खेलकर आगे नहीं बढ़ सकते. यह पहले अश्वेतों (अमेरिका में अफ्रीकी-अमेरिकियों के संदर्भ में) के लिए किया गया था, और वही चीज यहां दलितों के लिए लागू की गई.”
गौरतलब है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के समतामूलक दिशानिर्देश सुप्रीम कोर्ट के कहने पर आए थे. यह विश्वविद्यालय परिसरों को अधिक “समावेशी” बनाने और “जातीय भेदभाव” रोकने के उद्देश्य से लाए गए थे. हालांकि, इन पर विवाद हुआ और मामला जब फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो उन पर रोक लगा दी गई.
कुलपति के बयान के खिलाफ जेएनयूएसयू और अन्य छात्र संगठनों ने कैंपस में “लॉकडाउन” का आह्वान किया लेकिन देर रात स्थिति तनावपूर्ण हो गई. आईसा और एबीवीपी ने एक-दूसरे पर पत्थरबाजी और मारपीट के आरोप लगाए. चश्मदीदों के मुताबिक, कुछ स्थानों पर झड़पें हुईं, जिससे माहौल और बिगड़ गया.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बयान जारी कर “सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान” और “कैंपस के समावेशी माहौल को बाधित करने” की निंदा की. प्रशासन ने कहा कि विश्वविद्यालय नियमों और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
23 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने जेएनयूएसयू से जुड़े छात्रों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं- जैसे आपराधिक साजिश, गैरकानूनी जमावड़ा, हमला और गंभीर चोट पहुंचाने के तहत एफआईआर दर्ज की.
दूसरी ओर, जेएनयूएसयू के छात्रों ने वसंत कुंज थाने में एबीवीपी सदस्यों के खिलाफ पत्थरबाजी और मारपीट की शिकायत दी है. इस पूरी घटना ने एक बार फिर जेएनयू कैंपस में छात्र राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बहस को तेज कर दिया है.
क्या यह सिर्फ एक बयान पर विरोध था या कैंपस में लंबे समय से चल रहा वैचारिक टकराव इसकी जड़ में है?
जवाब तलाशने के लिए देखिए यह ग्राउंड रिपोर्ट.
मणिकर्णिका घाट से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक, उजड़े (ढहा दिए गए) घरों और खामोश हो चुके मोहल्लों के बीच यह सीरीज़ बताएगी कि कैसे तोड़फोड़ की राजनीति बनारस की सिर्फ़ इमारतें नहीं, उसकी आत्मा को भी बदल रही है. बनारस पर हमारे इस सेना प्रोजेक्ट को सपोर्ट करिए.
Also Read
-
Only 1,468 voters restored for Bengal’s final phase rolls. Poll duty staff among the excluded
-
LaLiT Hotel ducked crores in dues. Justice Varma granted it relief but HC tore up his order
-
From rights to red tape: India's transgender law amendment
-
एग्जिट पोल्स: असम- बंगाल में भाजपा, तमिलनाडू में डीएमके और केरल में कांग्रेस गठबंधन की सरकार
-
If pollsters are to be believed: Vijay shocker in Tamil Nadu, BJP’s Bengal win