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‘आज जेल, कल बेल, परसों फिर वही खेल’: पुलिस के इक़बाल का मखौल उड़ा रहे पिंकी चौधरी की कहानी
‘मोहम्मद दीपक, जिसे मुल्ला बनने का बहुत शौक चढ़ा है.. आज उसे ठीक कर दिया जाएगा.. मेरे आवास पर तो पुलिस आ गई है.. लेकिन मेरी टीम जा रही है.. उसका मुल्ला बनने का भूत उसके सर से उतारेगी.. उसे ठीक जरूर करेंगे.. चाहे कुछ भी हो जाए..’
8-9 पुलिसवालों की मौजूदगी में महजबी नफरत भरे ये बोल उस पिंकी चौधरी के हैं जो सोशल मीडिया पर एक हिंदुवादी छवि और मुसलमानों के ख़िलाफ़ बारम्बार नफ़रती बयानबाजी के लिए मशहूर है. कहने को पिंकी को कोटद्वार की घटना के बाद एक दिन के लिए नजरबंद किया गया था लेकिन पुलिस की मौजूदगी में वह धमकी भरे वीडियो भी बना रहा है, उन्हें सोशल मीडिया आर शेयर भी कर रहा है. कौन है यह शख्स जो कानून व्यवस्था से ऊपर नज़र आ रहा है.
‘हिस्ट्रीशीटर’ पिंकी चौधरी पर पुलिस एफआईआर दर्ज करती है, वह गिरफ्तार होता है फिर जमानत पर बाहर आता हैं. बाहर आकर पिंकी फिर से वही सब दोहराता है. कम से कम बीते एक दशक का उनका क्रिमिनल रिकॉर्ड तो यही सब बताता है. पिंकी के सहयोगी तो यहां तक कहते हैं, “ “आज जेल, कल बेल, परसों फिर वही खेल.” जो सीधे-सीधे कानून को चुनौती है.
पिंकी के खिलाफ 2011 से अब तक उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड में उसके खिलाफ करीब तीन दर्जन से ज्यादा एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं. पिंकी की मानें तो देशभर में उसके खिलाफ 37 मामले हैं. वह कहते हैं कि उन्हें इन ‘मुकदमों पर गर्व’ है. वहीं, उनके वकील पुष्पेंद्र गौतम इन मुकदमों को ‘गहना’ बता रहे हैं. आखिर पिंकी चौधरी को यह बेखौफ हिम्मत कहां से मिल रही है?
आख़िर क्यों इतना भरी भरकम पुलिस का तंत्र एक अनजान से हिस्ट्रीशीटर के सामने असहाय है. हमने पिंकी चौधरी के खिलाफ दर्ज कम से कम 30 एफआईआर का ब्यौरा खंगाला है. पिंकी का असली नाम भूपेंद्र सिंह तोमर है. वह गाजियाबाद के रहने वाले हैं.
साल 2011, साहिबाबाद थाना
पिंकी के खिलाफ पहली एफआईआर साल 2011 में गाजियाबाद के साहिबाबाद थाने में दर्ज हुई. इस एफआईआर में आईपीसी की धारा 323, 324, 504 और 427 लगाई गईं. यह लड़ाई-झगड़े, चोट पहुंचाने, अपमान करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित हैं. इस मामले में 28 दिसंबर 2011 को आरोप पत्र दाखिल किया गया था. पुलिस और उसके वकील से मिली जानकारी के मुतबिक, बाद में यह केस खत्म हो गया.
साल 2014, इंदिरापुरम थाना
पिंकी चौधरी का नाम मीडिया की सुर्खियों में पहली बार 2014 में आया. जब उन्होंने आम आदमी पार्टी के कौशांबी स्थित दफ्तर पर हमला कर दिया. इसके बाद इंदिरापुरम थाने में एफआईआर दर्ज की गई. इसमें धारा 147, 149, 452, 323, 504, 354, 153, 336, 427, और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया. जानकारी के मुताबिक, ये पहली बार था जब पिंकी जेल गए. उनके साथ 14 और लोगों को भी न्यायिक हिरासत में भेजा गया. इनमें रविंद्र राजपूत भी शामिल थे. राजपूत फिलहाल पिंकी के कानूनी सलाहकार टीम का हिस्सा हैं.
रविंद्र बताते हैं, “आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता प्रशांत भूषण ने कश्मीर को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने कश्मीर में सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार देने वाले कानून (अफस्पा) और कश्मीर में जनमत संग्रह पर रायशुमारी की बात कही थी. तब हम आप दफ्तर पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे, इस बीच उनके कार्यकर्ताओं से हमारी कहासुनी हो गई. बाद में हमे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. तब हम 14 लोग गिरफ्तर हुए थे. पिंकी को बाहर निकलने में करीब 4 महीने लग गए थे. जबकि बाकी लोग सप्ताहभर में बाहर आ गए थे.”
इस शुरुआत के बाद पिंकी चौधरी ने वारदातों की झड़ी लगा दी. बदले में उनपर एफआईआर की भी झड़ी लग गई.
साल 2016, विजयनगर, गाज़ियाबाद
पिंकी चौधरी पर 7 दिसंबर 2016 को गाजियाबाद के थाना विजय नगर में एफआईआर दर्ज की गई. आरोप है कि पुलिस ने पिंकी समेत अन्य साथियों को सिंचाई विभाग की जमीन पर ग्राम कैला में धार्मिक स्थल बनाते हुए पकड़ा. उनसे इस भूमि पर निर्माण करने से मना किया तो वे झगड़े पर उतारू हो गए. इस मामले में इन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 332, 353, 504 और 70 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था.
मामले में 23 अक्तूबर 2024 को फाइनल ऑर्डर आया. जिसमें अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपी को 20,000 रुपये के निजी मुचलके (पर्सनल बॉन्ड) और इतनी ही राशि की दो जमानतें (स्योरिटी) जमा करने की शर्त पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया.
साल 2017, साहिबाबाद थाना
16 अप्रैल 2017 को साहिबाबाद थाने में एसआई धीरेंद्र सिंह यादव द्वारा यह एफआईआर दर्ज कराई गई. इसमें पिंकी चौधरी समेत 21 नामदज और 125 अज्ञात का जिक्र किया गया. इन पर बिना अनुमति के शोभा यात्रा निकालने और पुलिस पार्टी पर लाठी डंडों, ईट पत्थर और असलहों का प्रदर्शन करते हुए हमला करने का आरोप है. मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 506, 504, 427, 353, 342, 336, 332, 307, 188, 186, 149, 148, 147 और आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 1932 की धारा 7 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. यानी आपराधिक धमकी, हत्या का प्रयास समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया. इसके बाद पुलिस ने पिंकी समेत अन्य को जेल भेज दिया. मामले में 13 सितंबर 2017 को आरोप पत्र दाखिल किया गया.
इस मामले में बीती 2 जनवरी को सुनवाई थी और अब आगामी 21 फरवरी को सुनवाई होनी है. इस एफआईआर पर पिंकी के वकील संकेत कटारा कहते हैं कि 307 की धारा पुलिस ने गलत लगाई थी, जिसे बाद में हटा लिया गया था. इस मामले में पिंकी कुछ दिन जेल में भी रहे.
साल 2017, कविनगर थाना
2017 में एक और एफआईआर 23 दिसंबर 2017 को थाना कविनगर में दर्ज हुई थी, जिसकी शिकायत सब इंस्पेक्टर दिनेश प्रकाश शर्मा ने दी थी. पिंकी चौधरी समेत 13 नामदज और 100 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई थी. भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 427, 341, 336, 148 और 147 के तहत केस दर्ज किया गया था.
दरअसल, एक हिंदू लड़की ने अपने मुस्लिम प्रेमी से दोनों परिवारों की आपसी रजामंदी से विशेष विवाह अधिनियम के अन्तर्गत न्यायालय उपजिला मजिस्ट्रेट गाजियाबाद में शादी की थी. इसके बाद परिवार की ओर से एक भोज का आयोजन रखा गया, जिसमें दोनों परिवार और उनके रिश्तेदार शामिल हुए थे. पिंकी चौधरी और उसके अन्य साथी अंतरजातीय विवाह बताते हुए इसका विरोध करने पहुंच गए. इस दौरान इन्होंने लाठी डंडे लेकर नारेबाजी करते हुए रोड जाम और वाहनों में तोड़फोड़ की.
मामले में 24 जून 2019 को आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया गया. गाजियाबाद की सीजेएम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2022 को फाइनल ऑर्डर दिया. वहीं, 16 अप्रैल, 2022 को इस केस को बंद कर दिया गया.
साल 2018, साहिबाबाद थाना
पिंकी ने 4 जून 2018 को रोड पर रोजा इफ्तार करा रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपना निशाना बनाया. इस मामले में पिंकी समेत पांच नामजद और 15-20 अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. साथ ही पुलिस के साथ भी बदतमीजी की. आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 295-A, 332, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया. इस मामले में पुलिस ने 17 नवंबर 2018 को आरोप पत्र दाखिल किया.
इस मामले में 18 सिंतबर 2024 को आदेश सुनाते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गाजियाबाद ने 30 हजार रुपये की दो जमानतों (स्योरिटी) और इतनी ही राशि का पर्सनल बॉन्ड भरने पर जमानत पर रिहा कर दिया.
साल 2020, इकोटेक प्रथम
20 जून को ग्रेटर नोएडा के ईकोटेक-प्रथम थाने में पिंकी समेत दो लोगों को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज की गई. एसएचओ अरुण कुमार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, करीब 25-30 लोग ओप्पो कंपनी पर पहुंच गए. उस समय कोविड-19 महामारी जोरों पर थी. आरोपियों पर महामारी अधिनियम 3, भारतीय दंड संहिता की धारा 270, 269 और 188 के तहत मामला दर्ज किया गया.
दरअसल, तब भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध, झड़पें और गलवान संघर्ष का विवाद चल रहा था. दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति थी. पिंकी चौधरी ने ओप्पो को चीनी कंपनी बताते हुए उसका विरोध किया. साथ ही उसके नोएडा स्थित कंपनी के गेट पर ताला जड़ दिया. जानकारी के मुताबिक, इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट में अपीयरेंस चल रही है.
साल 2021, साहिबाबाद थाना
साल 2021 में जिला गाजियाबाद के साहिबाबाद थाने में पिंकी पर दो एफआईआर दर्ज हुईं. एक एफआईआर 23 फरवरी और दूसरी 5 अप्रैल को दर्ज हुई. फरवरी में दर्ज एफआईआर में पिंकी चौधरी समेत पांच नामजद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 447, 384, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया. जानकारी के मुताबिक, इस मामले में पुलिस ने कोई आरोप पत्र दाखिल नहीं किया. पुलिस द्वारा हमें मिले रिकॉर्ड के मुताबिक, इस एफआईआर पर 5 अगस्त 2023 को फाइनल रिपोर्ट लगा दी.
पिंकी के खिलाफ साहिबाबाद थाने में ही दूसरी एफआईआर 5 अप्रैल को फेसबुक पर लाइव आकर ओखला विधायक अमानतुल्ला खां को गाली- गलौज करते हुए सिर काटकर लाने वाले को 51 लाख रुपये इनाम की घोषणा करने को लेकर हुई. इसमें धारा- 504, 506 आईपीसी और 67 आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. इस मामले में पुलिस ने 23 मई 2022 को फाइनल रिपोर्ट लगा दी. कोर्ट में यह केस 5 अप्रैल 2025 को खत्म हो गया.
साल 2021, कनॉट प्लेस थाना, दिल्ली
पिंकी के खिलाफ साल 2021 में दिल्ली में 8 अगस्त 2021 को एक एफआईआर दर्ज हुई. पुलिस के मुताबिक, दिल्ली के जंतर-मंतर पर समुदाय विशेष के खिलाफ नारेबाजी की गई. इसके बाद थाना कनॉट प्लेस में आईपीसी 153 (ए) यानी (अलग-अलग समुदायों में दुश्मनी पैदा करना) और 188 के तहत एफआईआर दर्ज की गई. इस मामले में 2 नवंबर, 2021 को पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की. फिलहाल यह केस अपीयरेंस में है और पिंकी जमानत पर बाहर है.
साल 2022, आधा दर्जन एफआईआर
साल 2022 में पिंकी पर कुल 6 एफआईआर दर्ज हुईं.
पहली एफआईआर 14 जून को मसूरी थाना गाजियाबाद में दर्ज हुई. जिला अधिकारी और जेल के बाहर धरना प्रदर्शन के बाद रोड जाम किया गया. इसके बाद पुलिस ने 9 लोगों को नामजद करते हुए 50-60 अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 353, 332, 147 और 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया. मामले में पुलिस ने 23 फरवरी 2023 में आरोप पत्र दाखिल किया. यह केस अभी विचाराधीन है.
साहिबाबाद थाना
दूसरी एफआईआर थाना साहिबाबाद में 14 जून को दर्ज हुई. इसमें पिंकी पर विशेष समुदाय के बारे में धर्म-जाति व घृणा पैदा करने वाले बयान देने को लेकर हुई. इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (2) और 295-A के तहत मुकदमा दर्ज किया गया.
केस की स्थिति की बात करें तो यह अभी विचाराधीन है. कोर्ट में बीती 10 फरवरी को मामले की सुनवाई हुई.
कविनगर थाना
15 जून को पुलिस अधीक्षक गाजियाबाद के कार्यालय में नारेबाजी और परिसर में बैठकर धरना प्रदर्शन करने को कविनगर थाने में यह एफआईआर दर्ज हुई. इसमें पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 188, 353, 323, 332 और 504 के तहत मुकदमा दर्ज किया. 18 अगस्त 2023 को इसमें आरोप पत्र दाखिल किया गया. फिलहाल यह मामला विचाराधीन है. मामले में बीती 17 फरवरी को सुनवाई हुई.
टीलामोड़ थाना
11 जुलाई को अकबर चौधरी उत्तर प्रदेश महासचिव अल्पसंख्यक कांग्रेस ने पिंकी के खिलाफ थाना टीलामोड़ में मुकदमा दर्ज कराया. अकबर चौधरी की शिकायत के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 153-A, 295-A, 505, 120-B, 34 और सूचना प्रोद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2000 के 67 तहत मुकदमा दर्ज किया.
केस की स्थिति की बात करें तो यह अभी सुनवाई के स्तर पर है. मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को है.
2022, साहिबाबाद थाना
साल 2022 की पांचवीं एफआईआर 29 अगस्त को साहिबाबाद में दर्ज की गई. इसमें बंदूकों एवं राइफल का दुरुपयोग करने को लेकर की गई. इसमें आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत मामला दर्ज किया गया.
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मामले में फाइनल रिपोर्ट 13 सितंबर, 2023 को दाखिल की गई. फिलहाल केस में तारीखें लग रही हैं. बीते 17 फरवरी को मामले की सुनवाई हुई.
फर्श बाजार थाना, शाहदरा
आखिरी और छठी एफआईआर 12 दिसंबर 2022 को दिल्ली के थाना फर्श बाजार में दर्ज की गई. आरोप है कि सीआरपीसी की धारा 144 लगे होने के बावजूद कड़कड़डूमा कोर्ट पास नारेबाजी करते हुए धरना प्रदर्शन कर रहे थे. इसमें 16 लोगों के नामदज करते हुए आईपीसी की धारा 188 लगाई गई थी. आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मामला फिलहाल विचाराधीन है.
साल 2023, लोनी थाना
पिंकी चौधरी पर साल 2023 में गाजियाबाद के अलग अलग थानों में तीन एफआईआर दर्ज हुईं. इनमें पहली एफआईआर लोनी में 29 सितंबर को हुई. पिंकी चौधरी ने एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. पिंकी पर भारतीय दंड संहिता धारा 153-A और 505 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. 14 अक्टूबर, 2024 मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया. मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च, 2026 को है.
नंदग्राम थाना
दूसरी एफआईआर 2 अक्टूबर 2023 नंदग्राम में दर्ज हुई. यह एफआईआर पुलिस के साथ अभद्र व्यवहार और धमकी को लेकर हुई. भारतीय दंड संहिता की धारा 506, 504, 353, 332, 148 और 147 के तहत मामला दर्ज किया गया. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपपत्र दाखिल होने के बाद यह मामला फिलहाल विचाराधीन है.
2023, शालीमार गार्डन थाना
तीसरी एफआईआर भी 2 अक्तूबर को ही शालीमार गार्डन में दर्ज की गई. दरअसल, एक नाले में गौवंश मिलने के बाद वहां नारेबाजी कर समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई. इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. जिसके बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 153 A, 295 A और 504 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपपत्र दाखिल होने के बाद यह मामला फिलहाल विचाराधीन है.
साल 2024, 5 एफआईआर दर्ज
2024 में 4 एफआईआर साहिबाबाद थाने में और एक मधुबन बापूधाम थाने में दर्ज की गई. 27 मई में दर्ज की गई पहली एफआईआर में बुजुर्गों, पुरुषों एवं महिलाओं के साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी का जिक्र किया गया है. इसमें पिंकी चौधरी उसके बेटे हर्ष चौधरी नामजद व 3-4 अज्ञात हैं.
भारतीय दंड संहिता की धारा 506, 504, 323 और 147 के तहत एफआईआर दर्ज की गई. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 25 जून 2024 को आरोप पत्र दाखिल किया गया. मामले में बीती 10 फरवरी 2026 को सुनवाई हुई.
साहिबाबाद थाना
दूसरी, एफआईआर 22 जुलाई को थाना साहिबाबाद में दर्ज की गई. यह एफआईआर सरकारी कार्य में बाधा डालने करने को लेकर हुई थी. इसमें दो नामजद और 20-25 अन्य का जिक्र है. वकील पुष्पेंद्र गौतम के मुताबिक पिंकी का नाम इस मुकदमे में अन्य में खोला गया है. यह मुकदमा बीएनएस की धारा 191(1), 132, 223 और 126(2) के तहत दर्ज किया गया था. 10 सितंबर, 2024 को मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया है. अगली सुनवाई 5 मई 2026 को है.
गाज़ियाबाद, मधुबन बापूधाम थाना
तीसरी एफआईआर अगस्त, 2024 में मधुबन बापूधान थाने में दर्ज हुई. आपको याद हो तो पिंकी चौधरी ने अपने 15-20 साथियों के साथ झुग्गी झोपड़ियों में रह रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों पर बांग्लादेशी होने का आरोप लगाकर गाली गलौच करते हुए उनकी झुग्गियां तोड़ दीं और आग भी लगा दी थी. इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए थे. न्यूज़लॉन्ड्री ने भी घटना स्थल पर पहुंचकर रिपोर्ट किया था.
इस मामले में 10 अगस्त 2024 को बीएनएस की धारा 191(2), 354, 115(2), 117(4), 299, और 324 (5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है. मामले में आरोपपत्र दायर हो चुका है. बीते 9 फरवरी, 2026 को मामले में सुनवाई हुई.
गाज़ियाबाद, साहिबाबाद थाना
चौथी एफआईआर 6 सितंबर को साहिबाबाद थाने में दर्ज की गई. इसमें पिंकी चौधरी और उसके पुत्र हर्ष चौधऱी समेत 6 लोगों को नामजद किया गया है. आरोप है कि इन्होंने बदमाश प्रवृत्ति के 10 से 15 व्यक्तियों को बुलाकर भय का माहौल बनाकर जबरदस्ती मकान लेने का दबाव व मारपीट करने और जान से मारने की धमकी दी. पीड़ित की शिकायत पर बीएनएस की धारा 351(2), 352, 115(2), 125, 191(2) और 61 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया. यह मामला 27 सिंतबर, 2024 को कोर्ट में फाइनल हो गया है. कोर्ट ने अपने आदेश में अभियुक्त को 25 हजार रुपए की दो जमानत एवं इसी राशि का व्यक्तिगत बंधपत्र दाखिल करने पर उसे जमानत पर रिहा कर दिया.
पांचवीं एफआईआर, साहिबाबाद थाना
इसी साल पांचवीं एफआईआर 28 सिंतबर को साहिबाबाद थाने में दर्ज की गई थी. आरोप है कि पिंकी ने अपने साथियों के साथ एक घर में जबरन घुसकर मारपीट और धमकी दी थी. इसमें पिंकी समेत 10 लोगों को नामजद किया गया है. इन पर बीएनएस की धारा 324(4), 305, 308(2) और 331(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह मामला अपीरियेंस है. मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी 2026 है.
साल 2025, शालीमार गार्डन थाना
29 दिसंबर 2025 को तलवारें बांटने और हथियारों के साथ प्रदर्शन करने के आरोप में पिंकी, उसके बेटे हर्ष और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ. 6 जनवरी 2026 को पिंकी की गिरफ्तारी हुई, लेकिन 15 जनवरी तक वे जमानत पर बाहर आ गए.
हमेशा की तरह उनकी रिहाई पर समर्थकों ने सड़कों पर गाड़ियों का काफिला निकाला, बीच सड़क आतिशबाज़ी की और जश्न मनाया.
इस जश्न के बाद पिंकी के एक सहयोगी का बयान खासा चौंकाने वाला था, “आज जेल, कल बेल, परसों फिर वही खेल.” यह महज़ एक नारा नहीं, बल्कि खुलेआम कानून को चुनौती देने का संदेश था. इस चेतावनी पर पिंकी और उनके समर्थक ठहाके लगाते नज़र आए.
जब इस बारे में हमने गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर केशव कुमार चौधरी से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि जेल और बेल वाली बात पुलिस को नहीं बल्कि कोर्ट को कही जा रही है. उन्होंने कहा कि अगर पिंकी अपराध करता है तो हमारी ओर से कार्रवाई भी हो रही है. पुलिस ने पिंकी के खिलाफ गुंडा एक्ट और जिला बदर की भी कार्रवाई की है.
वो मामले जिनकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं लेकिन दर्ज और विचाराधीन
पिंकी पर उपरोक्त दो दर्जन मामलों के अलावा भी कई ऐसे केस दर्ज हैं जो कि या तो विचाराधीन हैं या फिर उनका निपटान हो चुका है. पिंकी के वकील गौतम बताते हैं कि बहुत से ऐसे मुकदमे भी हैं, जो सिर्फ दर्ज हैं. उनमें कभी कभार कोई नोटिस आया तो हम उस पर साइन कर देते हैं. बाकी उन्हें हमें कोर्ट में नहीं देखना होता है. यह छोटे-मोटे मुकदमे हैं.
साल 2013, गाज़ियाबाद
2013 में गाज़ियाबाद के एक थाने में आईपीसी की धारा 323 और 324 के तहत एक मामला दर्ज हुआ था. इस मामले में चार्जशीट दाखिल हुई थी. फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है.
साल 2015, जारचा थाना
नोएडा के दादरी में मोहम्मद अखलाक की मॉब लिंचिंग हुई. तब पिंकी अपने साथियों के साथ दादरी पहुंचे. इसके बाद जारचा थाने में आईपीसी की धारा 153(A) और 188 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ. पिंकी के वकील संकेत कटारा ने बताया कि मामले में आरोप पत्र दायर हो चुका है.
साल 2018, साहिबाबाद थाना
पिंकी के वकील पुष्पेंद्र के मुताबिक, 2018 में ही पिंकी पर एक मुकदमा दर्ज किया गया. जिसका वाद संख्या 34784/2018 है. यह अभी विचाराधीन है.
साल 2019, साहिबाबाद थाना
वकील पुष्पेंद्र गौतम के मुताबिक, पिंकी चौधरी पर साहिबाबाद थाने में दो मुकदमे दर्ज किए गए. जिसकी अपराध संख्या 257/2019 और दूसरे की संख्या 34734/2019 है. हालांकि, इन मुकदमों की बाकी डिटेल्स उन्होंने साझा नहीं कीं.
2019, दादरी थाना
साल 2019 में एक और मुकदमा दादरी में दर्ज किया गया. वकील संकेत कटारा कहते हैं कि एक समुदाय विशेष के लोगों ने दूसरे समुदाय के युवक की हत्या कर दी थी. इसके विरोध में हमने दादरी में एक महापंचायत की. इसके बाद एक मुकदमा दर्ज हुआ था.
साल 2020, जिला गौतमबुद्ध नगर
थाना दादरी में 11 सितंबर को दर्ज इस एफआईआर में पिंकी चौधरी समेत 14 लोगों को नामजद किया गया. वहीं, 150 -200 अज्ञात के नाम भी शामिल किए. आरोपियों पर महामारी अधिनियम 3, आईपीसी की धारा 271, 270, 269 और 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. एसआई यशपाल द्वारा दर्ज कराई गई इस एफआईआर के मुताबिक, इन सभी पर कोविड के दौरान एक मंदिर में काफी संख्या में भीड़ के साथ बिना अनुमति के इकठ्ठा होने का आरोप हैं.
बताते चलें कि साल 2021 में पुलिस ने महामारी अधिनियम के तहत दर्ज करीब 3 लाख मुकदमों को वापस ले लिया था. हालांकि, स्पष्ट नहीं है कि पिंकी के खिलाफ दर्ज यह मामला वापस ले लिया गया है या नहीं.
साल 2025, कविनगर थाना
वकील कटारा बताते हैं कि 2025 में ही भीम आर्मी वालों ने भी कविनगर थाने में एक केस दर्ज कराया है. पिंकी चौधरी ने चंद्रशेखर के बारे में कुछ टिप्पणी कर दी थी. तब भीम आर्मी के कार्यकर्तओं ने कमिश्नर ऑफिस का घेराव किया था फिर एक एफआईआर दर्ज की गई थी.
उल्लेखनीय है कि पिंकी ने मंगलवार को एक बार फिर बिना नाम लिए सांसद चंद्रशेखर को लेकर विवादित टिप्पणी की है. जिसमें वह दलित नेताओं को ‘समुदाय विशेष की कठपुतली’ कह रहे हैं.
पिंकी के वकील कटारा कहते हैं, "दिल्ली-एनसीआर के अलावा उनके ऊपर सहारनपुर, बागपत में भी केस दर्ज हैं. वे आगे जोड़ते हैं कि धारा 144 तोड़ने और बिना इजाजत पंचायत करने के कई मुकदमे दर्ज हैं. उपरोक्त सभी मुकदमों को छोड़ दिया जाए तो ऐसे 8-10 मुकदमें और होंगे."
कटारा बताते हैं कि पिंकी चौधरी पर मामूली धाराओं में 3 केस उत्तराखंड राज्य में भी दर्ज हैं. हालांकि, उनकी क्या स्थिति है ऐसी कोई जानकारी नहीं है. न ही कोई नोटिस आते हैं.
वे लगातार होते मुकदमों के सवाल पर कहते हैं, “जहां पर भी हिंदुओं पर संकट है, वहां हम जाकर खड़े होते हैं. जैसे कोई बहन-बेटी लव-जिहाद में फंसी है या गाय को काटने का कोई प्रयास हो रहा है तो हम उसे रोकने का काम करते हैं. मेरे खुद के ऊपर 4-5 मुकदमे हैं. आदमी चला जाता है, मुकदमे चलते रहते हैं. इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता है.”
कटारा दावा करते हैं कि हिंदू रक्षा दल के एक लाख से ज्यादा सदस्य हैं. वे कहते हैं, “हम हिंदुओं की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं, अब इसमें मुकदमे हो या जेल जाएं, हम किसी की हत्या तो नहीं कर रहे हैं? मैं पहली बार 2013 में पिंकी भैया से मिला था. मुझे उनका काम अच्छा लगा तो मैं भी उनके साथ जुड़ गया.”
पिंकी की 14 वकीलों की टीम
जब हम संकेत कटारा से मिले तब वे एक पुलिसकर्मी के साथ गाजियाबाद के अपने चैंबर पर पहुंचे थे. उन्होंने कहा, "मैं यूपी पुलिस द्वारा अभी हाऊस अरेस्ट हूं. लेकिन मेरे इन पुलिसकर्मियों से घर जैसे संबंध हैं, इसलिए ये एक विश्वास है और हम गाजियाबाद कोर्ट में घूम रहे हैं."
हाऊस अरेस्ट के सवाल पर वे कहते हैं, "हम आज यूजीसी के मुद्दे पर पीएम आवास का घेराव करने जा रहे थे, जिसके चलते आज सवेरे से ही हमारे पिंकी भैया समेत कई कार्यकर्ताओं को हाऊस अरेस्ट किया हुआ है."
उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मी विनोद कहते हैं कि ये विश्वास की बात है, जो हम यहां घूम रहे हैं. यूपी पुलिस के अधिकारियों की नजर में तो हम दोनों संकेत कटारे के घर पर ही हैं.
कटारा बताते हैं कि उनकी 13-14 वकीलों की एक मजबूत टीम है, जो पिंकी भैया और उनके संगठन के लिए काम करती है.
जब हमने पिंकी चौधरी से बात की वे कहते हैं कि मुकदमे तो होते रहते हैं.
वहीं, इस बारे में गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर केशव हमसे बातचीत में कहते हैं, “कोई अपराध करता है तो पुलिस उस पर कार्रवाई करती है. हमने पिंकी पर कार्रवाई की है और आगे भी करेंगे. जो मुकदमे लिखे हैं, उनमें हम पैरवी करेंगे और जेल में सख्त सजा दिलवाएंगे.”
इसके अलावा हमने उत्तराखंड पुलिस को भी पिंकी से संबंधित मामलों की जानकारी के लिए संपर्क किया है. हालांकि, पुलिस की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है.
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