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अंजना का बाबर प्रेम, लुच्चतम अवस्था में गिरिराज और डंकापति की वापसी
बहुत दिनों बाद दरबार सजा था. धृतराष्ट्र-संजय संवाद की वापसी हो रही थी. दरबार अपने तमाम नवरत्नों और नमूनों से भरा हुआ था. हस्तिनापुर का हाल बेहाल था. ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद पवित्र यमुना मैया की दशा बियर को टक्कर दे रही थी. ऊपर से चमकती हस्तिनापुर की धरती नीचे से इतनी खोखली है कि कहीं सीवर का मुंह खुला है, कहीं मैनहोल का ढक्कन गायब है, कहीं बरसाती पानी गड्ढों को समुद्र घोषित कर चुका है. नतीजतन ये लोगों को सीधे यमलोक की सैर करवा दे रही है.
जब हस्तिनापुर में हालात इतने बुरे हैं तब दरबारी हुड़कचुल्लु खोज रहे हैं कि पांच सौ साल पहले मर गया बाबर किस लौंडे के साथ इश्क करता था. और किसके पीछे मतवाला बना घूम रहा था.
देखिए इस हफ्ते की टिप्पणी.
मणिकर्णिका घाट से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक, उजड़े (ढहा दिए गए) घरों और खामोश हो चुके मोहल्लों के बीच यह सीरीज़ बताएगी कि कैसे तोड़फोड़ की राजनीति बनारस की सिर्फ़ इमारतें नहीं, उसकी आत्मा को भी बदल रही है. बनारस पर हमारे इस सेना प्रोजेक्ट को सपोर्ट करिए.
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