Video
नोएडा, जनकपुरी से रोहिणी तक: जान देकर सिस्टम को उजागर कर रहे नागरिक
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही के कारण मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. पहले नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत, फिर दिल्ली के जनकपुरी में कमल ध्यानी की जान गई, और अब रोहिणी में एक प्रवासी मजदूर बिरजू कुमार की खुले मैनहोल में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई. यह हादसा न सिर्फ एक व्यक्ति की मौत है, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है.
इस घटना में प्रशासनिक लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिरजू कुमार का शव करीब 20 घंटे बाद मैनहोल से बाहर निकाला जा सका. 32 वर्षीय बिरजू कुमार बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले थे और दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-32 में मैक्सवेल एल्विस्टा कंपनी की एक कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करते थे.
हमसे बातचीत में उनके साथ रहने वाले मोहम्मद अरमान ने बताया, “बिरजू के तीन बच्चे हैं और वह अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले थे. अब घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा.” बिरजू की मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है और सवाल उठता है कि आखिर ऐसी मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस मैनहोल में बिरजू गिरे, वह काफी गहरा था और पूरी तरह खुला हुआ था. इतना ही नहीं, आसपास के पूरे इलाके में भी कई मैनहोल बिना ढक्कन के पड़े हुए हैं. एक स्थानीय निवासी ने बताया कि यहां कई महीनों से मैनहोल खुले हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई.
बिरजू की मौत की खबर सामने आने के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में कुछ मैनहोल ढक दिए, लेकिन इलाके में अभी भी 200 से ज्यादा मैनहोल खुले होने का दावा किया जा रहा है. इससे साफ है कि कार्रवाई केवल घटना के बाद दबाव में की जा रही है, न कि हादसे रोकने के लिए पहले से कोई व्यवस्था है.
जब हमारी टीम ने रोहिणी सेक्टर-32 और आसपास के इलाकों का दौरा किया, तो पाया कि फुटपाथों और सड़क किनारे कई मैनहोल बिना ढक्कन के खुले पड़े हैं. ये खुले मैनहोल किसी के लिए भी मौत का जाल साबित हो सकते हैं और बिरजू जैसी स्थिति किसी और के साथ भी दोहराई जा सकती है.
लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर खुले मैनहोल की जिम्मेदारी किस विभाग की है, हादसे से पहले इन्हें ढकने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई, क्या मृतक के परिवार को मुआवजा मिलेगा और क्या दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी.
देखिए हमारी यह ग्राउंड रिपोर्ट-
Also Read
-
Awadh ground report: UP’s swing voters speak, from Mohanlalganj to Ayodhya
-
What this Diwali should teach the Indian retail investor
-
From Sittilingi to Sijimali: The doctor Odisha police arrested over anti-mining agitation
-
How a trust close to BJP got five elephants from Assam for Tamil Nadu temples
-
After Uttarakhand, it’s MP: CM Yadav spent Rs 230 cr to sell a Rs 30 lakh cr ‘MoU’ mirage