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मोदी सरकार का सालभर में प्रिंट विज्ञापन पर 119 करोड़ का खर्च, आधे से ज़्यादा रकम 10 बड़े हाउस के नाम
विज्ञापन पर भरी-भरकम खर्च के लिए मशहूर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में प्रिंट मीडिया के जरिए विज्ञापनों पर 119 करोड़ 79 लाख 91 हजार 875 रुपये खर्च किए हैं. यह राशि 1052 अख़बारों के बीच बंटी है. आंकड़ें बताते हैं कि इस रकम में आधे से ज़्यादा यानि 63 करोड़ 23 लाख से ज्यादा दस प्रमुख मीडिया समूहों को मिले हैं.
जैसे कि हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप को 13.56 करोड़ रुपये, द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप को 11.16 करोड़, दैनिक जागरण को 9.63 करोड़, दैनिक भास्कर को 8.29 करोड़, अमर उजाला को 4.93 करोड़, राजस्थान पत्रिका को 4.79 करोड़, डेक्कन क्रॉनिकल को 3.33 करोड़, नव भारत को 3.21 करोड़, पंजाब केसरी को 2.35 करोड़ और सकाल को 1.98 करोड़ विज्ञापन के बदले मिले हैं. वहीं, इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप को 1.75 करोड़ का विज्ञापन मिला है.
यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने एक लिखित सवाल के जवाब में लोकसभा में दी है. तृणमूल कांग्रेस की सांसद रचना बनर्जी ने लिखित में तीन सवाल किए.
पहला- पिछले पांच वर्षों में, विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) द्वारा समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर विज्ञापनों के लिए कितनी राशि पर खर्च की गई राशि, वर्ष वार और समूहवार खर्च की गई.
दूसरा- इंफ्लुएंसर एजेंसीज़ को पैनल में शामिल करने के लिए इसकी शुरुआत से अब तक एजेंसी-वार कितनी धनराशि आवंटित की गई है.
3. पिछले पांच सालों में प्रचारात्मक सामग्री तैयार करने के लिए प्रभावशाली व्यक्तियों (इंफ्लुएंसर) को भुगतान की गई राशि का वर्षवार और प्रभावशाली व्यक्तिवर ब्यौरा क्या है?
बनर्जी ने स्पष्ट तौर पर सवाल किए. जिसमें वो विज्ञापनों पर खर्च के साथ ही इंफ्लुएंसर्स पर खर्च की गई राशि की जानकारी मांग रही थी. लेकिन डॉ. एल. मुरुगन की तरफ से दिया गया जवाब आधा अधूरा है.
अपने जवाब में डॉ. एल. मुरुगन ने लिखा, पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी) द्वारा समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में सभी विज्ञापनों पर किए गए खर्च की जानकारी वर्ष और समूहवार सीबीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है.
सीबीसी ही डिजिटल विज्ञापन नीति, 2023 के अनुसार विभिन्न मीडिया एजेंसियों की नामांकन प्रक्रिया भी करता है.
मुरुगन ने इंफ्लुएंसर्स को किए गए भुगतान की तो जानकारी ही नहीं दी है. वहीं उन्होंने पांच साल में विज्ञापनों पर खर्च राशि की जो जानकारी दी है, वो भी अधूरी है. डीएवीपी की वेबसाइट पर बनर्जी के सवाल संख्या 808 के जवाब में दो फाइल्स अटैच है. एक में प्रिंट पर वित्त वर्ष 24-25 के खर्च की जानकारी है और दूसरे में टीवी चैनलों को वित्तीय वर्ष 2020-21 में दिए गए विज्ञापन राशि की जानकारी है.
जबकि केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने अपने जवाब में कहा कि पांच साल में खर्च विज्ञापन राशि की जानकारी डीएवीपी की वेबसाइट पर मौजूद है. इस पूरे मामले को लेकर हमने सूचना और प्रसारण मंत्रालय और डॉ. एल. मुरुगन को सवाल भेजे हैं. खबर प्राकशित करने तक उनका जवाब नहीं आया है.
पांच साल में हर रोज
जैसे कि हमने शुरू में कहा कि विज्ञापनों पर खर्च के लिए केंद्र की बीजेपी सरकार चर्चित है. बता दें कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 यानी पांच सालों में 2446.90 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च किए हैं. इस बीच मोदी सरकार ने प्रतिदिन 1.34 करोड़ विज्ञापन पर खर्च किए हैं.
इन पांच सालों में सबसे ज़्यादा 985.44 करोड़ ऑडियो-वीडियो से जुड़े विज्ञापनों पर, प्रिंट पर 930.24 करोड़, आउटडोर (होडिंग्स वगैरह) से जुड़े विज्ञापनों पर 392.51 करोड़ और न्यू मीडिया (डिजिटल मीडिया) पर 138.71 करोड़ रुपये खर्च हुए है.
लोकसभा में कांग्रेस सांसद शफी परम्बिल के सवाल के जवाब में दिसंबर, 2025 में यह जानकारी सामने आई थी. अगर साल दर साल की बात करें तो 2020-21 में 409.55 करोड़, 2021-22 में 317.48 करोड़, 2022-23 में 408.37 करोड़, 2023-24 में 656.6 करोड़ और 2024-25 में 654.9 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
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