Khabar Baazi
वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर का निधन, पत्रकारिता जगत में शोक की लहर
वरिष्ठ पत्रकार और द टेलीग्राफ के संपादक रहे संकर्षण ठाकुर का सोमवार को निधन हो गया. वे 63 वर्ष के थे. उनके निधन पर भारत के पत्रकार समुदाय ने शोक व्यक्त किया और कहा कि उनके जाने से पत्रकारिता जगत को गहरी क्षति पहुंची है. संकर्षण काफी लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे. संकर्षण चर्चित राजनीतिक लेखक तो थे ही उनकी गिनती देश के सबसे सम्मानित जमीनी रिपोर्टरों में से भी होती है.
पत्रकार सबा नक़वी ने 2024 के आम चुनाव प्रचार के दौरान वाराणसी में ठाकुर से अपनी आख़िरी मुलाक़ात को याद करते हुए लिखा, “बेहतरीन संकर्षण ठाकुर अब हमारे बीच नहीं रहे. टेलीग्राफ के संपादक होने के साथ वे शानदार लेखक थे, लेकिन उससे भी बढ़कर एक जमीनी रिपोर्टर थे. मेरी उनसे आख़िरी मुलाक़ात 2024 के चुनाव प्रचार के अंत में वाराणसी में हुई थी. हम दोनों झुलसाने वाली गर्मी में मैदान में थे. मैं घाट पर बेहोश हो गई थी और उन्होंने बताया कि वे कमरे में लगभग गिर ही पड़े थे. बात यह है कि यह ऐसे संपादक थे जो खुद मैदान में पसीना बहाते थे. यही किसी पत्रकार को महान बनाता है. शांति मिले संकर्षण.”
स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया ने उन्हें भारत में “रीढ़ वाले संपादकों की पहली कतार” में शामिल बताया. उन्होंने लिखा, “पत्रकार और संपादक संकर्षण ठाकुर अब हमारे बीच नहीं रहे. यकीन नहीं हो रहा. वह अभी द टेलीग्राफ के संपादक थे. और भारत में रीढ़ वाले संपादकों की पहली क़तार में शामिल थे.”
नवभारत टाइम्स के राजनीतिक संपादक नरेंद्र नाथ मिश्रा ने ठाकुर के बिहार को लेकर गहरे ज्ञान को याद करते हुए कहा, “देश के बड़े पत्रकार,टेलीग्राफ के संपादक,बिहार से आने वाले संकर्षण ठाकुर जी का आज निधन हो गया. वह कुछ दिनों से बीमार थे. बिहार के बारे में अद्भुत ज्ञान था. हर चुनाव में उनसे ज्ञान लेता था. देश ने एक शानदार पत्रकार,व्यक्ति और बिहारी को खो दिया.”
इंडिया टुडे की एंकर मारिया शकील ने बिहार की राजनीति को राष्ट्रीय मंच पर लाने में ठाकुर के योगदान को रेखांकित किया. उन्होंने कहा, “संकर्षण ठाकुर के निधन पर गहरा शोक है. उनकी पत्रकारिता ने बिहार की जटिल राजनीति और वहां के लोगों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया. लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और द ब्रदर्स बिहारी पर उनकी चर्चित किताबों ने राज्य की आत्मा को बखूबी अभिव्यक्त किया.”
संकर्षण ठाकुर का जीवन
1962 में पटना में जन्मे संकर्षण ठाकुर वरिष्ठ पत्रकार जनार्दन ठाकुर के पुत्र थे. उन्होंने पटना और दिल्ली के सेंट जेवियर्स में पढ़ाई की और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक करने के बाद पत्रकारिता को अपने करियर के रूप में चुना.
उन्होंने 1984 में संडे पत्रिका से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में द टेलीग्राफ, इंडियन एक्सप्रेस और तेहलका में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर कार्य किया. ठाकुर अपनी बेख़ौफ़ जमीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने गए, चाहे कारगिल के युद्धक्षेत्र हों, कश्मीर की अशांत घाटियां हों या बिहार का राजनीतिक रणक्षेत्र. उनकी रिपोर्टिंग भोपाल गैस त्रासदी, 1984 के दंगे, इंदिरा गांधी की हत्या, श्रीलंका का युद्ध और मालदीव तख़्तापलट जैसी ऐतिहासिक घटनाओं तक फैली हुई थी.
उन्हें 2001 में प्रेम भाटिया अवार्ड और 2003 में अप्पन मेनन फैलोशिप से सम्मानित किया गया.
ठाकुर की किताबों ने भारतीय राजनीतिक साहित्य में स्थायी जगह बनाई. सबऑल्टर्न साहेब, सिंगल मैन: द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ़ नीतीश कुमार ऑफ़ बिहार और द ब्रदर्स बिहारी राज्य की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों की प्रामाणिक जीवनियां मानी जाती हैं. उनकी रचनाओं ने कथा शैली को गहरे जमीनी अनुभवों के साथ जोड़ा, जिससे वे बिहार को समझने वाले हर व्यक्ति के लिए संदर्भ बिंदु बन गए.
करीब चार दशकों तक पत्रकारिता को नई दिशा देने वाले संकर्षण ठाकुर अब अपने पीछे एक अमिट विरासत छोड़ गए हैं.
भ्रामक और गलत सूचनाओं के इस दौर में आपको ऐसी खबरों की ज़रूरत है जो तथ्यपरक और भरोसेमंद हों. न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करें और हमारी भरोसेमंद पत्रकारिता का आनंद लें.
Also Read
-
TV Newsance 336 | LPG shortages hit kitchens across India, yet TV media says ‘no crisis'
-
Three years, no trial: Bail for Monu Manesar ignites fresh anguish for Nasir and Junaid’s families
-
‘My mother cries on the phone’: TV’s war spectacle leaves Indians in Israel calming frightened families
-
Order, order! Why you won’t be reading about judicial corruption until 2036
-
Hafta letters: NL value, Lutyens statue debate, state of India today