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दिल्ली दंगों की साजिश केस: उमर खालिद, शरजील इमाम समेत 7 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और सात अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. जिन अन्य आरोपियों की जमानत याचिका खारिज हुई है, उनमें गुलफिशा फातिमा, शिफाउर रहमान, मीरान हैदर, अतर खान, मोहम्मद सलीम, शादाब अहमद और ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ के संस्थापक खालिद सैफी शामिल हैं. ये सभी फिलहाल यूएपीए के तहत दर्ज केस में जेल में बंद हैं.
लाइव लॉ की रिपोर्ट मुताबिक, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इससे पहले जुलाई में लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर आप देश के खिलाफ कुछ करते हैं, तो आपको जेल में ही रहना चाहिए, जब तक कि आप दोषमुक्त न हो जाएं या आपके खिलाफ दोष सिद्ध न हो जाए.
वहीं, बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी चार साल से अधिक समय से हिरासत में हैं, लेकिन अब तक आरोप तय भी नहीं हुए हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पैस, जो उमर खालिद का पक्ष रख रहे थे, ने कहा कि सिर्फ व्हाट्सएप ग्रुप में मौजूद रहना अपराध नहीं हो सकता. उन्होंने यह भी कहा कि खालिद से कोई बरामदगी नहीं हुई है और अभियोजन पक्ष द्वारा जिस मीटिंग को ‘गुप्त’ बताया जा रहा है, वह वैसी नहीं थी.
सीनियर एडवोकेट रेबेका जॉन, जो खालिद सैफी का पक्ष रख रही थीं, ने सवाल उठाया कि क्या मासूम संदेशों को आधार बनाकर यूएपीए लगाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि क्या यह जमानत खारिज करने या मुकदमा चलाने का वैध आधार हो सकता है.
शरजील इमाम के वकील तालिब मुस्तफा ने कहा कि इमाम का इस साजिश से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि पुलिस सिर्फ एक भाषण का हवाला दे रही है, जो उन्होंने जनवरी 2020 में बिहार में दिया था.
बचाव पक्ष ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि इसी केस में तीन सह आरोपी- नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा को पहले ही जमानत मिल चुकी है. इसलिए समानता के आधार पर बाकी आरोपियों को भी राहत दी जानी चाहिए. हालांकि, अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया.
इस केस में सुप्रीम कोर्ट में भी उमर खालिद की जमानत याचिका कई बार टल चुकी है. इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए न्यूज़लॉन्ड्री की ये रिपोर्ट पढ़िए.
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