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वीआईपी इलाकों में फुटपाथ किसके लिए? गमलों, गार्ड्स और गाड़ियों के लिए!
यह रिपोर्ट सार्वजनिक स्थानों पर प्रभावशाली वर्गों द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण और उनके प्रति सिस्टम की अनदेखी पर आधारित हमारी श्रृंखला का हिस्सा है। इस शृंखला की पिछली रिपोर्ट्स पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
‘ऐसा प्रतीत होता है कि संपन्न वर्गों द्वारा अवैध निर्माणों को नियमित करने की एक संगठित कोशिश चल रही है." सुप्रीम कोर्ट ने 3 मई को यह टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और नगर निकायों से जवाब मांगा है.
हालांकि, कोर्ट का इशारा कुछ चुनिंदा हाई-प्रोफाइल इलाकों में अवैध निर्माणों को वैध बनाने की ओर था, लेकिन समस्या इससे कहीं बड़ी है.
डिफेंस कॉलोनी पर रिपोर्ट के बाद न्यूज़लॉन्ड्री की जांच में सामने आया कि वसंत विहार और शांतिनिकेतन जैसे इलाकों में भी फुटपाथों पर अतिक्रमण तेजी से बढ़ा है.
इन इलाकों में सार्वजनिक उपयोग के लिए बने फुटपाथ अब निजी ड्राइववे, गमलों और सुरक्षा बूथों से भरते जा रहे हैं. जबकि बीते चार महीनों में राजधानी में करीब 27,000 लोगों को अवैध निर्माणों के नाम पर बेदखल किया गया है. जिनमें से कई कमजोर तबकों से आते हैं.
वसंत विहार: 80% पेड़ों का कंक्रीटीकरण
इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) की गाइडलाइंस के अनुसार, आवासीय क्षेत्रों में फुटपाथ को तीन हिस्सों में बांटना अनिवार्य है- एक फ्रंटेज या डेड ज़ोन, एक क्लियर पैदल ज़ोन (कम से कम 1.8 मीटर चौड़ा), और एक मल्टी-फंक्शनल ज़ोन.
आईआरसी के सदस्य देवेंद्र कुमार के मुताबिक, ये नियम कॉलोनियों की अंदरूनी सड़कों पर भी लागू होते हैं.
लेकिन अगर आप वसंत विहार की पश्चिमी सड़कों पर चलें, तो वसंत विहार क्लब को छोड़कर शायद ही किसी इमारत के सामने इस्तेमाल लायक फुटपाथ मिले. क्लब के सामने स्थित एक दूतावास की दीवार से सटी सार्वजनिक ज़मीन पर गार्ड का बूथ और गमले सजे हैं.
वसंत विहार की स्थापना 1960 के दशक के अंत में पूर्व सरकारी अधिकारियों के लिए की गई थी. आज यहां 1,350 से अधिक प्लॉट हैं और निवासी डॉक्टर, राजनयिक, सेलिब्रिटी और बड़े व्यापारी हैं.
लेकिन ऐसा लगता है कि सार्वजनिक ज़मीन के प्रति सम्मान यहां न के बराबर है. पूरे इलाके में फुटपाथ अस्थायी ड्राइववे और निजी गार्डरूम के नीचे लगभग गायब हो चुके हैं. यहां स्थित 58 दूतावासों में से कम से कम 10 ने फुटपाथ पर कब्जा कर लिया है. जिनमें रैंप, बूथ या सजावटी निर्माणों शामिल हैं.
2020 में कराए गए एक वृक्ष सर्वेक्षण में पाया गया कि 80 फीसदी पेड़ कंक्रीट से घिरे हुए हैं, ताकि वहां वाहन चढ़ाने के लिए रैंप या गार्ड हाउस बनाए जा सकें.
2022 में दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी की निष्क्रियता पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा था कि इसका ‘नरम रुख’ अवैध अतिक्रमण को मौन समर्थन देता है.
जब एमसीडी ने कुछ अवैध रैंप तोड़ने की कोशिश की, तो वसंत विहार आरडब्ल्यूए ने कोर्ट में अपील कर दी और कहा कि उन्हें रैंप हटाने के लिए स्वयं प्रयास करने का समय दिया जाए. हाईकोर्ट ने फिलहाल तोड़फोड़ पर रोक लगा दी है और मामला अब भी लंबित है.
इसी बीच, डी ब्लॉक में एक मकान ने पेड़ के गड्ढे पर कंक्रीट बिछा कर ड्राइववे बना लिया. मकान मालिक ने सफाई दी, ‘गमले ज्यादा सुविधाजनक हैं. पेड़ होता तो रास्ता रोकता. इसलिए ड्राइववे बना दिया.’
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष गुरप्रीत बिंद्रा ने पूछा, “अगर दूतावासों को गार्ड बूथ की अनुमति है, तो अन्य निवासियों को क्यों नहीं?” उन्होंने दावा किया कि कोर्ट ने दूतावासों को ऐसी छूट दी है, हालांकि न्यूज़लॉन्ड्री इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका.
पर्यावरणविद् वल्लरी शील ने कहा, “पेड़ भी इन अतिक्रमणों की वजह से मर रहे हैं. उनके चारों ओर कंक्रीट, गार्ड हाउस और रैंप बना दिए गए हैं.”
दिल्ली को भीड़भाड़ से मुक्त करने पर बनी उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट ने सिफारिश की थी कि फुटपाथ पर अतिक्रमण को नगर निगम अधिनियम के तहत संज्ञेय अपराध घोषित किया जाए.
ग्रीन पार्क ज़ोन के एक एमसीडी अधिकारी ने बताया, “सार्वजनिक ज़मीन पर पार्किंग या ड्राइववे बनाना अतिक्रमण है. लेकिन जब लोग दोबारा बना लेते हैं तो कार्रवाई मुश्किल हो जाती है.”
इसके अलावा, हर घर ने अपने रैंप के लिए अलग-अलग सामग्री का इस्तेमाल किया है. जिससे फुटपाथ टूटे, खंडित और असंगठित दिखते हैं.
शांति निकेतन: कुछ खास लोगों के लिए फुटपाथ
शांति निकेतन, जो कभी सरकारी अधिकारियों का शांत रिटायरमेंट स्पॉट हुआ करता था, अब बड़े उद्योगपतियों का ठिकाना बन चुका है. यहां के 216 प्लॉटों में से 200 अब व्यापारियों के पास हैं.
स्ट्रीट 5 में करीब 20 मकान हैं, लेकिन शायद ही कोई फुटपाथ सलामत है. हर मकान के आगे ड्राइववे और गमले लगे हैं, और गेट के पीछे गार्ड बैठे होते हैं.
एक निवासी ने कहा, “अगर हम ड्राइववे नहीं बनाएंगे, तो गाड़ी अंदर कैसे जाएगी?.” दूसरे ने कहा, “हमने गमले सिर्फ सौंदर्य के लिए लगाए हैं ताकि घर का सामने का हिस्सा सुंदर दिखे.”
कॉलोनी के बाज़ार में कुछ फुटपाथ हैं, लेकिन वे भी टूटे हुए हैं और कई जगह गाड़ियों के प्रवेश के लिए काट दिए गए हैं. न्यूज़लॉन्ड्री ने शांति निकेतन के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष जगदीप सिंह रिखी से संपर्क किया है. जवाब मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.
आम लोग कैसे प्रभावित हो रहे हैं
स्ट्रीट 5 में काम करने वाली घरेलू सहायिका रुमैला (बदला हुआ नाम) बताती हैं, “मैं सड़क पर चलती हूं क्योंकि फुटपाथ नहीं है. रात में बड़ी गाड़ियां आ जाएं तो बहुत डर लगता है. अगर फुटपाथ होता, तो मैं जरूर उस पर चलती.”
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ‘क्रैश रिपोर्ट 2023’ के अनुसार, वसंत विहार ट्रैफिक सर्कल में एक साल में 29 घातक और 102 गैर-घातक सड़क हादसे हुए. इस सर्किल के इलाके में वसंत विहार और शांति निकेतन दोनों आते हैं. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने हाल ही में एनजीटी के सामने स्वीकार किया कि इस ज़ोन में कम से कम 7 फुटपाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त या अतिक्रमित हैं.
जब न्यूज़लॉन्ड्री ने अतिक्रमण को लेकर पार्षद हिमानी जैन से पूछा तो उन्होंने कहा, “हम अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं और अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाते हैं.”
न्यूज़लॉन्ड्री ने इस संबंध में एमसीडी से आरटीआई के ज़रिए जानकारी मांगी, लेकिन साउथ ज़ोन ने जवाब दिया, “इस विषय में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.”
इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री ने ट्रैफिक एपीआईओ वेद प्रकाश, डीसीपी सुरेंद्र चौधरी और एमसीडी साउथ के एडिशनल कमिश्नर जितेंद्र यादव से भी संपर्क किया है. उनकी ओर से जवाब मिलने पर रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.
मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
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