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सुप्रीम कोर्ट से कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को अंतरिम राहत, लेकिन चेतावनी भी
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को गिरफ्तारी से राहत देते हुए अंतरिम राहत प्रदान की है. मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस कार्यकर्ताओं के खिलाफ आपत्तिजनक कार्टून बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोपों से जुड़ा है. इस मामले में पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मालवीय को राहत देने से मना कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने सुनवाई के दौरान मालवीय को यह भी चेतावनी दी कि अगर उन्होंने आगे भी ऐसा आपत्तिजनक कंटेंट साझा किया तो राज्य सरकार उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी.
लाइवमिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ ने इस दौरान सोशल मीडिया पर फैल रहे अपमानजनक और अभद्र कंटेंट पर चिंता जताई. इस दौरान पीठ ने कहा, “लोग किसी को भी, कुछ भी कह देते हैं, हमें इस पर कुछ करना होगा.”
हेमंत मालवीय ने यह याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा 3 जुलाई को अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के बाद दायर की थी. यह मामला इंदौर के लसूड़िया थाने में मई में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसे वकील और आरएसएस कार्यकर्ता विनय जोशी की शिकायत पर दर्ज किया गया था.
शिकायत में आरोप लगाया गया कि मालवीय ने सोशल मीडिया पर ऐसा कंटेंट पोस्ट किया जिससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और साम्प्रदायिक सौहार्द को ठेस पहुंची.
मालवीय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने 14 जुलाई को दलील दी कि विवादित कार्टून वर्ष 2021 के कोविड-19 महामारी काल का है. उन्होंने कहा, “यह शायद अपमानजनक (बैड टेस्ट) हो सकता है, मैं मानती हूं कि यह अस्वाभाविक है. लेकिन क्या यह अपराध है? मेरे माननीय न्यायाधीशों ने भी कहा है कि यह आपत्तिजनक हो सकता है, लेकिन यह अपराध नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा कि मालवीय विवादित पोस्ट को हटा देंगे.
जस्टिस धूलिया ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की, “जो भी इस केस में हो, लेकिन यह ज़रूर साफ है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग हो रहा है.”
पुलिस ने मालवीय पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्य), धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से किया गया दुर्भावनापूर्ण कार्य), धारा 352 (उद्देश्यपूर्वक अपमान कर शांति भंग करने का प्रयास), और आईटी अधिनियम की धारा 67-A (यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रकाशित करना) के तहत मामला दर्ज किया है.
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