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पत्रकारों से मारपीट का मामला: मध्य प्रदेश पुलिस को नोटिस जारी
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के पत्रकारों के मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग ने इस मामले में मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है. साथ ही दो हफ्ते के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है. आयोग ने ये जानकारी एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी.
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, " राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति का स्वतः संज्ञान लिया है. जिसमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश के भिंड जिले में पुलिस अधीक्षक की निगरानी में कथित तौर पर दो पत्रकारों के साथ पुलिस ने क्रूरतापूर्वक मारपीट की. कथित तौर पर, यह घटना 1 मई, 2025 को हुई थी."
बयान में आगे लिखा है, "आयोग ने पाया है कि प्रेस विज्ञप्ति की सामग्री, यदि सत्य है, तो यह पीड़ित पत्रकारों के मानव अधिकारों का गंभीर उल्लंघन उजागर करती है. इसलिए, आयोग ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर मामले की विस्तृत रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर देने को कहा है."
मालूम हो कि ये मामला मध्य प्रदेश के भिंड जिले के पत्रकारों से जुड़ा है. इस मामले में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वीमेन प्रेस कॉर्प्स और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने संयुक्त बयान जारी कर भिंड (मध्य प्रदेश) के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
बयान में कहा गया है कि गोयल और चौहान को 1 मई को ‘चाय’ के बहाने एसपी असित यादव के चैंबर में बुलाया गया, जहां पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की. दोनों पत्रकारों ने चंबल नदी में चल रहे अवैध रेत खनन को उजागर किया था, जिसे कथित रूप से पुलिस की मिलीभगत से संचालित किया जा रहा है.
इसके बाद पत्रकार इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. जहां से उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक दोनों पत्रकारों पर लगे अपराधों की प्रकृति का पता नहीं चलेगा तब तक गिरफ्तारी से सुरक्षा देने वाला कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता.
पत्रकारों के इस मामले को विस्तार से समझने के लिए पढ़िए ये रिपोर्ट.
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