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डिजिटल कंटेंट को रेगुलेट करने वाले कानूनों पर संसदीय समिति को जानकारी देगा आईटी मंत्रालय
रणवीर इलाहाबादिया के 'अश्लील टिप्पणी' वाले मामले ने क्या सरकार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के कंटेंट को रेगुलेट करने का रास्ता खोल दिया है? खासकर तब जब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस बारे में कुछ करने कहा हो. दरअसल, ये सवाल बीते कुछ दिनों से पूछा जा रहा था.
इस बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन को पत्र लिखा है. समिति ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों का भी हवाला दिया है.
पत्र में कहा गया है, "डिजिटल तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय से अनुरोध है कि वह इस तरह के मामलों से निपटने के लिए मौजूदा कानूनों की प्रभावकारिता पर इस समिति को एक संक्षिप्त नोट भेजे और ऐसे प्लेटफार्मों को कानूनी जांच के दायरे में लाने के लिए मौजूदा कानूनों/आईटी अधिनियम, 2000 में संशोधन करने की आवश्यकता है."
मंत्रालय को इस मामले को अत्यंत आवश्यक मानते हुए 25 फरवरी तक अपना नोट प्रस्तुत करने को कहा गया है.
आईटी मंत्रालय अगले सप्ताह संसद की स्थायी समिति को इस बारे में जानकारी दे सकता है कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट को रेगुलेट करने के लिए कानूनों में संशोधन किया जाएगा.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय “सामाजिक मूल्यों को बचाने, महिलाओं और बच्चों की गरिमा सुरक्षित रखने के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म को कानूनी जांच के दायरे में लाने” को लेकर बदलावों की जरूरत पर अपना जवाब देगा.
गौरतलब है कि बीते दिनों बीयरबाइसेप्स के नाम से मशहूर इलाहबादिया उस समय विवादों में आ गए जब उन्होंने समय रैना के यूट्यूब शो इंडियाज गॉट लेटेंट पर माता-पिता और सेक्स को लेकर एक घटिया मज़ाक (टिप्पणी) की.
इसके बाद उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हुई और राहत के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ गिरफ्तारी से राहत दे दी. लेकिन इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फैलती ‘अश्लीलता’ को लेकर सरकार से कुछ कदम उठाने का आग्रह किया.
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