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दिल्ली विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने लगाई हार की हैट्रिक, वोट शेयर में मामूली बढ़त
दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सियासी पारा बढ़ा दिया है. राजधानी में जहां भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है, वहीं आम आदमी पार्टी (आप) की करारी हार हुई है. लेकिन एक बार फिर से दिल्ली की गद्दी पर लगातार 15 साल राज करने वाली कांग्रेस पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई. दिल्ली में ये कांग्रेस की लगातार तीसरी हार है. इससे पहले साल 2015, फिर साल 2020 और अब 2025 के विधानसभा चुनावों में उसके ‘हाथ’ खाली रह गए.
कांग्रेस के प्रदर्शन के ये नतीजे कोई हैरानी पैदा नहीं करते क्योंकि जब दिल्ली में तमाम पार्टियां जमीन पर चुनावी जद्दोजहद में जुटी थीं तो कांग्रेस और उसका केंद्रीय नेतृत्व कहीं नजर नहीं आ रहा था. यहां तक कि राहुल गांधी ने शुरुआत में अपनी करीब आधा दर्जन रैलियां रद्द कर दी थीं. इससे भी मतदाताओं पर काफी असर पड़ा. गठबंधन की साथी आम आदमी पार्टी के खिलाफ भी वह अकेली ही नजर आई. जबकि अखिलेश और समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने ‘आप’ के लिए प्रचार किया. माना जा रहा है कि ये भी कांग्रेस के लिए काफी महंगा साबित हुआ.
इस बार कांग्रेस को सिर्फ एक जगह फायदा हुआ है. वो है वोटों में हिस्सेदारी. कांग्रेस का वोट शेयर बीते चुनाव के मुकाबले 2 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया.
कांग्रेस मत प्रतिशत
पिछले पांच चुनावों की बात करें तो कांग्रेस ने 2008 में सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ा. इनमें से पार्टी ने 43 सीटों पर जीत दर्ज की. इस दौरान पार्टी को 40.3 फीसदी मत हासिल हुए. इसके बाद अन्ना आंदोलन से आम आदमी पार्टी का उदय हो चुका था. ‘आप’ ने 2013 के चुनाव में कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी. वह सिमटकर 8 सीटों तक पहुंच गई और वोट शेयर घटकर 24.6 फीसदी रह गया. तब 'आप' ने 28 तो भाजपा ने 31 सीटों पर जीत दर्ज की.
इसके बाद 2015 में चुनाव हुए. कांग्रेस पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई और शून्य सीटों के आंकड़े पर पहुंच गई. वोट शेयर भी घटकर 9.7 प्रतिशत रह गया. इसके बाद साल 2020 के चुनावों में फिर से उसे कोई सीट नहीं मिली. वोट शेयर भी घटकर 4.3 फीसदी तक पहुंच गया.
2020 में कांग्रेस ने 70 में से 66 सीटों पर चुनाव लड़ा था. 4 सीटों पर गठबंधन के तहत राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रत्याशी चुनाव लड़े. 66 में से 63 सीटों पर कांग्रेस अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई. केवल गांधी नगर से अरविंदर सिंह लवली, बादली से देवेंद्र यादव और कस्तूरबा नगर से अभिषेक दत्त ही अपनी जमानत बचाने में कामयाब हुए. जबकि 2015 में कांग्रेस के 62 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी.
इस बार यानि साल 2025 में एक बार फिर पार्टी के खाते में कोई जीत दर्ज नहीं हुई. उसके मत प्रतिशत में जरूर मामूली सी बढ़ोतरी हुई.
भारतीय जनता पार्टी का वोट शेयर
भाजपा के वोटर शेयर की बात करें तो 2008 में पार्टी ने 69 सीटों पर चुनाव लड़ा और 36.3 प्रतिशत मत के साथ 23 सीटों पर जीत दर्ज की. इसके बाद 2013 में हुए चुनाव में पार्टी ने 68 सीटों पर चुनाव लड़ा और 33.1 मत प्रतिशत पाकर 31 सीटों पर जीत दर्ज की. इस दौरान भाजपा को नई नवेली आम आदमी पार्टी से कड़ी टक्कर मिली थी.
2015 की बात करें तो भाजपा ने 69 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ तीन सीटों पर जीत दर्ज की. हालांकि, मत प्रतिशत में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं देखी गई. पार्टी को 32.2 फीसदी मत मिले. 2020 में भाजपा ने 67 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिनमें से 38.5 फीसदी मत प्रतिशत के साथ आठ सीटों पर जीत दर्ज की.
2025 की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया है. पार्टी करीब 46 फीसदी मतों के साथ दिल्ली में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. इस बार भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेताओं को मात देते हुए 48 सीटों पर जीत दर्ज करने जा रही है.
आम आदमी पार्टी का वोट शेयर
आम आदमी पार्टी का यह चौथा चुनाव था. पहला चुनाव 2013, दूसरा 2015 और तीसरा 2020 में लड़ा. पहले ही चुनाव में पार्टी ने 29.5 फीसदी वोटों के साथ 28 सीटों पर कब्जा किया और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई. अरविंद केजरीवाल पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने. हालांकि, यह सरकार 49 दिन ही चली.
इसके बाद 2015 में पार्टी ने 54.3 फीसदी वोटों के साथ 67 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की. वहीं 2020 में इस जीत को दोहराते हुए 53.6 फीसदी मतों के साथ 62 सीटों पर जीत दर्ज की और 'आप' ने एक बार फिर राज्य में अपना परचम लहराया. अरविंद केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने.
दिल्ली में कांग्रेस की करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित जो कि नई दिल्ली विधानसभा सीट से उम्मीवार भी थे, ने कहा, "इस शर्मनाक हार के लिए मैं, और केवल मैं, व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हूं. दिल्ली का वोटर बदलाव चाहता था, और मैं इस भावना में लोगों में खरा नहीं उतरा."
‘आप’ की हार, कांग्रेस का बदला
दिल्ली चुनाव के आए नतीजों पर कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी, कांग्रेस पार्टी की वजह से हारी है. जबकि आम आदमी पार्टी के कारण कभी कांग्रेस को भी गोवा, गुजरात, हरियाणा और उत्तराखंड में हार का सामना करना पड़ा था.
बता दें कि गोवा में 2017 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 6.3 फीसदी वोट हासिल कर कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया था. 2022 में गुजरात में 'आप' ने अकेले चुनाव लड़ा था और 2.92 प्रतिशत वोट हासिल किए थे. इस चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 41.4 से गिरकर 27 फीसदी तक पहुंच गया था. कहा गया कि ‘आप’ ने कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया है.
उत्तराखंड की बात करें तो यहां 2022 के विधानसभा चुनाव में 'आप' ने 3.31 प्रतिशत मत हासिल किए थे. यहां कांग्रेस पार्टी बुरी तरह हार गई थी, इसके बाद कई कारणों के पीछे एक कारण ‘आप’ को भी माना गया.
वहीं हरियाणा में हुए 2024 के विधानसभा चुनाव में पहले कांग्रेस और ‘आप’ दोनों के मिलकर चुनाव लड़ने की बात कही जा रही थी. लेकिन बाद में दोनों ने अकेले चुनाव लड़ा. कांग्रेस को यहां हार झेलनी पड़ी. इसके पीछे एक कारण ‘आप’ को भी माना गया, जिसने कि राज्य में 1.79 प्रतिशत वोट हालिल किए थे.
कांग्रेस दफ्तर का माहौल
विधानसभा चुनावों भले कांग्रेस का खाता तक न खुला हो लेकिन कांग्रेस में इस बात की खुशी है कि उन्होंने ‘आप’ को सत्ता से बाहर कर दिया. दिल्ली के 24 अकबर पुर रोड पर स्थित कांग्रेस दफ्तर पर आज सवेरे से ही सन्नाटा छाया था. दोपहर होते-होते कुछ कार्यकर्ता जरूर दिखाई दिए. यहां कैंटीन में बैठे कुछ कार्यकर्ता काफी खुश नजर आए.
गोरखपुर निवासी मोहम्मद इमरान बोले, “हमें यहां आम आदमी पार्टी ने ही हराया था. हम अब तक नहीं उबरे हैं. लेकिन आज हमें खुशी है कि भले हमारा खाता न खुला हो लेकिन ‘आप’ चुनाव हार गई. अब ‘आप’ यहां से हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी. अगला मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होगा. जिसमें कांग्रेस की जीत होगी.”
एक अन्य कार्यकर्ता ने कहा, “हमें अखिलेश यादव को अब घुटनों के बल लाना है, इनकी वजह से भी हमें काफी नुकसान उठाना पड़ा है. इंडिया गठबंधन का हिस्सा होने के बाद भी अखिलेश यादव ने ‘आप’ का मंच शेयर किया. जो कि कहीं तक भी ठीक नहीं है. आज अखिलेश यादव को भी पता चल गया कि कौन कितने पानी में है.”
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