हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव
कुमारी शैलजा: बीजेपी कोई भी चाल चले लोग उसे सफल नहीं होने देंगे
टिकट बंटवारे से नाराज़ कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा प्रचार से दूर थीं. लेकिन आखिरकार वे प्रचार करने लगी. उन्होंने इसकी शुरुआत 26 सितंबर से की. शैलजा ने हिसार के सूर्यनगर में कांग्रेस उम्मीदवार रामनिवास राणा के लिए प्रचार किया. तो क्या उनकी नाराजगी दूर हो गई है? इस सवाल के जवाब में शैलजा कहती हैं, ‘‘नाराजगी की कोई बात नहीं है. पार्टी के अंदर कई मुददे हैं और उसे वहीं सुलझाया जाता है.’’
मालूम हो कि हिसार से बीजेपी के उम्मीदवार कमल गुप्ता हैं. जो वर्तमान समय में प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं. वहीं, बीजेपी सांसद नवीन जिंदल की मां सावित्री जिंदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है. जानकार इसे बीजेपी की चाल बता रहे हैं. दरअसल, गुप्ता यहां दस साल से विधायक हैं. उन्हें लेकर लोगों में नाराजगी है. ऐसे में जिंदल को बीजेपी का टिकट दिया जाता तो उन्हें नुकसान होता. अभी लड़ाई सावित्री जिंदल और राणा के बीच मानी जा रही है.
क्या सावित्री जिंदल को निर्दलीय उम्मीदवार बनाने के पीछे बीजेपी की सोच है? इस सवाल के जवाब में शैलजा कहती हैं, ‘‘बीजेपी कोई भी चाल चले लोग उसे सफल नहीं होने देंगे.’’
शैलजा की जनसभा में आए लोगों से हमने बात की. सूर्यनगर की ही रहने वाली अनुसुइया कहती हैं कि महंगाई कम होनी चाहिए. मंहगाई बहुत ज़्यादा बढ़ रही है. घर चलाना मुश्किल हो रहा है. जो महंगाई कम करेगा उसको ही जीतना चाहिए. बीजेपी सरकार ने महंगाई कम नहीं की.’’
यहीं हमारी मुलाकात रितु से हुई. बास्केटबॉल की खिलाड़ी रितु दलित समुदाय से आती हैं और शैलजा की फैन हैं. वो कहती हैं कि दलित नेताओं को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता है. मैं तो सैलेजा को ही वोट करूंगी. उनकी कांग्रेस से नाराजगी से हमारे यहां भी लोग नाराज़ थे लेकिन अब ज्यादातर मान गए हैं. हम इन्हें ही जिताएंगे.’’
देखें ये वीडियो रिपोर्ट.
Also Read
-
From Pune to Kolkata: Political cartoonists say online reach is being cut
-
Are India’s art fairs just glittery distractions or can they actually redefine a city?
-
This is not 2017. Modi’s Israel visit risks India’s moral position, tests global standing
-
From ‘Food Jihad’ to ‘Love Jihad’: Rise of communal content online
-
जेएनयू: वीसी के विवादित बोल, लेफ्ट का लॉकडाउन कॉल और एबीवीपी से हुए टकराव की पूरी कहानी