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राजस्थान की जनजातीय महिलाओं के मुद्दे: नौकरी, पानी की किल्लत और नरेगा की मजदूरी
बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जनसभा में दावा किया कि कांग्रेस ने घोषणापत्र में “माताओं और बहनों के सोने के जेवर” उनसे लेकर “घुसपैठियों” में बांट देने का वादा किया है. हालांकि, कांग्रेस ने इस दावे को सिरे से नकार दिया और इस टिप्पणी को “नफरती भाषण” करार दिया. कांग्रेस के अनुसार, उन्होंने अपने घोषणा पत्र में केवल सामाजिक न्याय की बात की है.
चुनावी मौसम है तो यह ‘जुबानी जंग’ तो चलती रहेगी पर जमीन पर राजस्थान की महिलाओं के असल मुद्दे क्या हैं? ये जानने के लिए हमने बांसवाड़ा और डूंगरपुर में कुछ मतदाताओं से बात की.
इलाके में रोजगार के उचित अवसर नहीं होने के कारण काम की तलाश में हजारों औरतों समेत भारी मात्रा में स्थानीय निवासी गुजरात जाने को मजबूर हैं. बांसवाड़ा और डूंगरपुर दोनों ही जिलों में महिलाओं की श्रम और वोट डालने में हिस्सेदारी की दर राज्य में सबसे अधिक है.
कई नए मतदाताओं के लिए ‘रोजगार” और “पानी की किल्लत” प्रमुख मुद्दे थे. तो वहीं कुछ ने महंगाई और मजदूरी में अंतर के मद्देनजर नरेगा की मजदूरी बढ़ाने की मांग की.
महिला मतदाताओं के लिए मौजूदा मुद्दे क्या हैं? जमीन पर कौन सी योजनाएं काम कर रही हैं?
देखिए ये वीडियो रिपोर्ट.
इस मुद्दे पर अंग्रेजी में प्रकाशित हमारी विस्तृत रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
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