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मोदी सरकार की प्राथमिकता वाली पेंशन योजनाएं बेहाल, लोग नहीं दिखा रहे दिलचस्पी
लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. नेता टिकट की संभावना देख इस दल से उस दल के बीच कूद-फांद कर रहे हैं. इस बीच न्यूज़लॉन्ड्री ने साल 2019 में मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई तीन योजनाओं की पड़ताल की. केंद्र की मोदी सरकार के मुताबिक, ये योजनाएं उनके दूसरे कार्यकाल की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से हैं.
ये योजनाएं हैं-
असंगठित श्रमिकों के लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना
व्यापारियों और स्व-रोजगार वाले व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना
कृषि करने वालों के लिए पीएम किसान मान-धन योजना
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना की शुरुआत साल 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च में हुई थी. वहीं, बाकी दोनों पेंशन योजनाएं सितंबर 2019 में झारखंड की राजधानी रांची में शुरू हुई. इसके कुछ महीने बाद ही यहां विधानसभा का चुनाव होना था.
तीनों योजनाओं में 18 से 40 साल के लोगों के लिए हैं. इसमें उम्र के हिसाब से पैसे जमा करने होते हैं. यह राशि 55 रुपए से लेकर 200 तक हो सकती हैं. सरकार भी उतनी ही राशि जमा करेगी. जब यह पंजीकरण करने वाले 60 साल के हो जायेंगे तो इन्हें 3000 रुपए का पेंशन मिलेगा. हालांकि, इन योजनाओ का पहला लाभ यानी पेंशन साल 2038-39 में मिलेगा.
असंगठित श्रमिकों के लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि इससे 42 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा. न्यूज़लॉन्ड्री ने जब पड़ताल की तो सामने आया कि अब तक सिर्फ 50 लाख लोगों ने इसके लिए पंजीकरण कराया है.
व्यापारियों और स्व-रोजगार वाले व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना का तो और बुरा हाल है.
इस पेंशन योजना में सरकार का लक्ष्य 3 करोड़ का था. वहीं, बीते पांच सिर्फ 53 हजार लोगों ने इसके लिए पंजीकरण कराया है.
कुछ ऐसे ही हालत 5 करोड़ किसानों के पंजीकरण के लक्ष्य वाली पीएम किसान मानधन योजना की है. अब तक सिर्फ 23 लाख किसानों ने इसके लिए पंजीकरण करवाया है.
आंकड़ें बताते हैं कि इन योजनाओं को लेकर लोगों में दिलचस्पी नहीं है.
देखिए हमारी ये वीडियो रिपोर्ट.
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