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प्रदर्शन में शामिल किसानों को घायल करने का जिम्मेदार कौन?
15 फरवरी की शाम करीब सात बजे शंभू बॉर्डर पर निहंग सिख राजू सिंह पुलिस बैरिकेड के बिलकुल पास पहुंच गए और अपनी तलवार से करतब दिखाने लगे. वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने दो बार वापस जाने के लिए कहा लेकिन वे नहीं लौटे.
करतब दिखा रहे सिंह अचानक से गिर गए. तभी वहां मौजूद किसान चिल्लाये कि उन्हें गोली लगी है. आनन-फानन में साथी उन्हें लेकर राजपुरा के सिविल अस्पताल में पहुंचे. जहां से उन्हें पटियाला के राजिंद्रा अस्पताल में रेफर कर दिया.
शंभू, खनौरी और अन्य बॉर्डर पर जो किसान गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं. उन्हें राजिंद्रा अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है. अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि 16 फरवरी तक गंभीर रूप से घायल 18 किसान यहां भर्ती हुए हैं. जिसमें से चार को डिस्चार्ज कर दिया गया है.
राजिंद्रा अस्पताल में दाखिल कई किसानों से हमारी बात हुई. इसमें से किसी का आंसू गैस के गोले से पैर फट गया तो किसी के हाथ में गंभीर चोट आई है. एक अन्य किसान की आंख की रोशनी चली गई है.
वहीं, 19 फरवरी को ‘द हिंदू’ अख़बार से बात करते हुए हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने किसानों के खिलाफ पेलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया. उन्होंने दावा किया कि पुलिस ‘न्यूनतम बल’ का प्रयोग कर रही है.’’
हालांकि, राजिंद्रा अस्पताल में भर्ती किसानों के शरीर पर लगे जख्म कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं.
देखिए ये वीडियो रिपोर्ट.
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