Chhattisgarh Elections 2023
छत्तीसगढ़: अमित जोगी का सीएम बघेल के सामने पाटन से चुनाव लड़ना ‘आत्मघाती' फैसला?
छत्तीसगढ़ में पहले चरण का चुनाव समाप्त होने के बाद नेताओं की दूसरे चरण के क्षेत्रों में आवाजाही बढ़ गई है. लेकिन रायपुर से महज 25 किलोमीटर दूर पाटन विधानसभा क्षेत्र में कोई हलचल नजर नहीं आ रही है. जबकि यहां से प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चुनाव लड़ रहे हैं. यह उनका क्षेत्र है. 1993 से लगातार वो यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा ने दुर्ग से सांसद विजय बघेल को उम्मीदवार बनाया है.
भूपेश बघेल के खिलाफ विजय बघेल को उतारने के बाद ही यह सीट दिलचस्प हो गई. रिश्ते में चाचा-भतीजा लगने वाले बघेल पाटन में लंबें समय से एक दूसरे के खिलाफ लड़ते रहे हैं. कांग्रेस से अपनी राजनीति शुरू करने के बाद विजय बघेल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से होते हुए भारतीय जनता पार्टी में पहुंचे.
2008 के चुनाव में उन्होंने भूपेश बघेल को हरा दिया. हालांकि, वो लगतार भूपेश बघेल से चुनाव हारते रहे हैं.
भाजपा-कांग्रेस की लड़ाई के बीच अचानक से छत्तीसगढ़ प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री अमित जोगी के बेटे अमित जोगी ने भी पाटन से नामांकन कर दिया. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष जोगी पहली बार पाटन से चुनाव लड़ रहे हैं. उनका दावा है कि वो चुनाव जीत रहे हैं.
‘भूपेश जीते तो मुख्यमंत्री बनेंगे’
भिलाई से पाटन जाने का रास्ता बेहद ही शानदार बना हुआ है. हमें लेकर जा रहे ड्राइवर कहते हैं, ‘‘काका ने रोड चौड़ा कर दिया.’’ सड़क चौड़े होने के निशान के रूप में आसपास के तोड़े गए घर नजर आते हैं.
पाटन में प्रवेश करने पर राजनीतिक हलचल नजर नहीं आती है. अमित जोगी के अलावा किसी और दल का प्रचार वाहन भी नहीं दिखता है. हालांकि, जगह-जगह दीवारों पर चित्रकारी में कुछ नजर आता है. इसमें से कई आकर्षक नारे भी लिखे हैं, जैसे विजय बघेल के प्रचार में लिखा गया है, ‘‘अब की बारी, कका पर भतीजा भारी’, वहीं, कांग्रेस के प्रचार में लिखा है, ‘‘किस बात की चिंता है, कका अभी जिन्दा है.’’
हमें जानकारी मिली कि खम्हरिया गांव में विजय बघेल दोपहर 12 बजे चुनाव प्रचार के लिए आने वाले हैं. दोपहर तीन बजे तक ग्रामीण इंतज़ार करते रहे लेकिन वे नहीं आए.
खम्हरिया गांव में हमारी मुलाकात सरपंच का चुनाव लड़ चुके सुचन लाल साहू से हुई. साहू भाजपा से जुड़े हैं और उनके बेटे कांग्रेस पार्टी से. वे कहते हैं, ‘‘लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच में ही है. मैं भाजपा से जुड़ा हूं तो चाहूंगा कि मेरी पार्टी जीते. हालांकि, मेरा गांव हो यहां आसपास के करीब 12 गांव यह सब ‘कका’ को मानने वाले हैं. कुल मिलाकर कका जीत जाएंगे.’’
और जोगी? इस सवाल पर साहू कहते हैं, ‘‘उनको तो यहां के ज़्यादातर लोग पहचानते भी नहीं हैं. वो लड़ाई में कहीं नहीं हैं.’’
पाटन एक व्यवस्थित छोटे शहर जैसा है. यहां पर साहू, कुर्मी और सतनामी समाज के मतदाताओं का दबदबा है. वहीं, यादव और गोंड समुदाय के मतदाता भी हैं.
सोनपुर गांव के शुरू होने से पहले एक मंदिर है. मंदिर के पुजारी की उसके बाहर किराने की दुकान है. उनकी बगल में एक बुजुर्ग महिला जय प्रभा चाय-समोसे की दुकान चलाती है. वे कहती हैं, ‘‘हम तो वोट हाथ (कांग्रेस) को देंगे. कका ने बढ़िया काम किया है.’’ ये पूछने पर कि क्या काम किया है, वह कोई जवाब नहीं देती हैं.
यहां लोगों से बात करते हुए एक बात बार-बार सुनाई पड़ती है कि अगर भूपेश बघेल जीते तो मुख्यमंत्री बनेंगे, विजय जीते तो वो मुख्यमंत्री बन भी सकते और नहीं भी. सोनपुर गांव के मंदिर के पुजारी कहते हैं, ‘‘कका ने धान खरीद कराया. बेरोजगारों को भत्ता दिया. यहां सड़कें बनवाई. स्कूल खुलवाया. इतना सब किया है. कि कका ही आएगा यहां से.’’
विजय बघेल भी यहां से लोकप्रिय नेता रहे हैं. 2003 में एनसीपी की टिकट पर बघेल के खिलाफ उतरे लेकिन हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद भाजपा में शामिल हो गए. साल 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर लड़े और साल 1993 से चले आ रहे भूपेश बघेल के विजय रथ को रोकने में सफल हुए.
2013 के विधानसभा में भाजपा ने इन्हें फिर से भूपेश बघेल के खिलाफ उतारा लेकिन हार गए. 2018 में भाजपा ने मोतीलाल साहू को उतारा लेकिन बघेल ने इन्हें 28 हजार वोटों से मात दी. इसके बाद वे प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.
झीट गांव
तीन बजे से अमित जोगी की चुनावी रैली है. स्टेज सजा हुआ है. कुर्सियां लगी हुई है. जनता कम है. लोगों को लुभाने के लिए स्थानीय कलकार नृत्य प्रस्तुत कर रहे हैं. इस ग्राउंड के ठीक सामने लाल सिन्हा की किराने की दुकान है. 22 वर्षीय सिन्हा कहते हैं, ‘‘भाजपा और कांग्रेस के बीच ही टक्कर है. भाजपा का यह कैडर और वोटर भी है. विजय बघेल का यह क्षेत्र रहा है तो उनके भी लोग हैं. पर कका की संभावना ज़्यादा है. बघेल साहब जीतेंगे को मुख्यमंत्री बनेंगे, विजय क्या बनेंगे किसे पता.’’
ये सुन पास में ही चाय पी रहे बुजुर्ग कहते हैं, ‘‘माहौल भूपेश का ही है.’’ अमित जोगी के बारे में वह कहते हैं, ‘‘इनको तो मैं जानता तक नहीं, पहली बार गांव में आए हैं.’’
भूपेश बघेल का प्रचार कम नजर आने के सवाल पर पाटन नगर पंचायत के अध्यक्ष भूपेंद्र कश्यप कहते हैं, ‘‘ऐसा नहीं है. इन दिनों धान की कटाई चल रही है. किसान दिन में खेतों में होता है. इसलिए हम लोग शाम को प्रचार करने जाते हैं. यह विधानसभा क्षेत्र करीब पचास किलोमीटर का है. जिनकी गाड़ियां घूम रही हैं उनके पास प्रचार करने के लिए लोग नहीं हैं. भूपेश बघेल यहां से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, यहां से जनता चुनाव लड़ रही है. जनता ही प्रचार करती है’’
कश्यप आगे कहते हैं, ‘‘हम लोग एक नुक्क्ड़ नाटक की टीम को हायर किए थे. वो लोग दिन भर के 60 हज़ार रुपए लेते थे. कुछ दिनों तक उन्होंने नाटक किया लेकिन हमने रोक दिया.
सांसद विजय बघेल को भाजपा ने आखिर मैदान में क्यों उतारा है? इस सवाल पर कश्यप कहते हैं, ‘‘इसका जवाब तो भाजपा के लोग ही दे सकते हैं. हमारी भाषा में आप पूछिए तो उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है. आप यह मान लीजिए को वो यहां से चुनाव हार गए हैं. नतीजे आने के बाद पार्टी में उनकी पूछ भी कम हो जाएगी. मुझे तो लगता है कि भाजपा के ही कुछ नेता उन्हें निपटाना चाहते हैं.’’
इस पर पाटन शहर में दुकान चलाने वाले भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता रविंद्र सिन्हा कहते हैं कि नतीजे आने दीजिए. सच का अंदाजा लग जाएगा.
‘अमित जोगी का आत्मघाती फैसला’
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का प्रचार वाहन पाटन में घूम-घूम कर बता रहा था कि उनके नेता और प्रदेश के होने वाले मुख्यमंत्री अमित शाम तीन बजे झीट गांव में हेलीकाप्टर से आ रहे हैं. लोगों से भारी से भारी संख्या में इस सभा में पहुंचने की अपील की जा रही थी.
शाम पांच बजे तक करीब पांच सौ लोगों की भीड़ जुट गई थी. तब अमित जोगी यहां पहुंचे. हमने यहां उनके कुछ कार्यकर्ताओं से बात की. इसमें से ज्यादातर सतनामी समाज के थे. ऐसे ही एक युवा जय प्रकाश दहाड़िया ने कहा, “बघेल सरकार में हमारे समाज के साथ भेदभाव हुआ. अमित जोगी ने हमारे समाज को सम्मान दिया. उन्होंने गिरौदपुरी में ‘जैतखाम’ निर्माण कराया. उन्होंने हमें सम्मान दिया. तो हमारा समाज उनके साथ है. जो हमें सम्मान नहीं देगा उसे हम वोट देते रहें यह मुमकिन नहीं है.’’
सतनामी समाज के बड़े धमर्गुरु बालदास साहेब भाजपा के लिए प्रचार करते नजर आते हैं. साजा विधानसभा में वे भाजपा उम्मीदवार ईश्वर साहू के लिए प्रचार के लिए गए थे. माना जाता है कि धर्मगुरु बालदास जिस पार्टी को वोट करने के लिए कह दें सतनामी समाज उसे ही वोट करता है. लेकिन जय प्रकाश दहाड़िया और उनके साथ मौजूद युवक इससे इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते हैं. वो कहते हैं कि हम सिर्फ बाबा घासीदास को मानते हैं.
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ की तरफ से साल 2018 में यहां से शकुंतला साहू ने चुनाव लड़ा था. उन्हें करीब 13 हज़ार वोट मिले थे.
यहां लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच मानी जा रही है. अमित जोगी तो लड़ाई में नजर नहीं आ रहे हैं? इस पर सभा में मौजूद गन लाल बंजारे कहते हैं, ‘‘नतीजे बताएंगे कि लड़ाई में कौन है और कौन नहीं. यहां सतनामी समाज जिसे चाहता है वो जीतता है. इस बार सतनामी समाज जोगी साहब के साथ है.’’
अमित जोगी से जब यहां प्रचार करने के लिए आए तो न्यूज़लॉन्ड्री ने उनसे बात की. वो अपने भाषण में लगातार दोहों का प्रयोग कर रहे थे. जोगी ने आरोप लगाया कि भूपेश और विजय की जोड़ी लंबे समय से पाटन में जीत-हार रही है. एक ही परिवार का यहां कब्ज़ा है. अब यहां शेर आ गया है.
आप पार्टी अध्यक्ष हैं. आप किसी सुरक्षित माने जानी वाले सीट से चुनाव लड़ सकते थे. पाटन ही क्यों चुना? इस पर जोगी कहते हैं, ‘‘मेरी लड़ाई भूपेश से नहीं बेरोजगारी और गरीबी से है. मैंने अपने घोषणा पत्र में दस बातें लिखी हैं. अगर हम सत्ता में आते हैं तो उसे लागू करेंगे. मैंने अपने वादों को लेकर सौ रुपये का स्टाम्प भी बनवाया है. अगर पूरा नहीं करता हूं तो यहां की जनता मुझ पर केस दर्ज करा जेल भी भेज सकती है. अब पाटन बदलाव चाहता है.’’
कांग्रेस नेताओं द्वारा जोगी की जमानत जब्त होने के दावे पर वो कहते हैं, ‘‘मैं भविष्यवाणी नहीं कर सकता हूं लेकिन नतीजे चौकाने वाले होंगे. तीन दिसंबर का इंतज़ार कीजिए.’’
अमित जोगी ने जो दस वादे किए हैं. उसमें धान की खरीद की कीमत 4000 हज़ार रुपए प्रति क्विंटल करना है. यह हैरान करने वाला है. क्योंकि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में 3100 तो कांग्रेस ने 3300 रुपये की कीमत रखी है.
आप तो कांग्रेस-भाजपा दोनों से आगे निकल गए. कहां से पैसे देंगे? इसपर जोगी कोई साफ जवाब तो नहीं देते, लेकिन कहते हैं कि भाजपा और कांग्रेस ने अपना घोषणापत्र तो हाल ही में जारी किया है. मेरा घोषणा पत्र तो अगस्त महीने में ही आ गया था.
अपने भाषणों में जोगी प्रदेश में 300 रुपये में घरेलू गैस सिलिंडर देने का वादा करते हैं. इसके साथ ही शराब की दुकान की जगह दूध की दुकान खोलने का भी वादा है. कांग्रेस ने भी 2018 के घोषणापत्र में शराब की दुकान बंद करने का वादा किया था. जो अभी तक पूरा नहीं हुआ तो आप इसे कैसे करेंगे, इस सवाल पर जोगी कहते हैं, ‘‘गुजरात में अमूल दूध की तरह हम अपने प्रदेश में भी दुग्ध क्रान्ति लाएंगे. जिससे हमारी वित्तीय हालत ठीक होगी और लोगों का स्वास्थ्य भी.’’
2018 के चुनाव में अमित जोगी की पार्टी ने बसपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था. तब इस गठबंधन को सिर्फ पांच सीटें मिली थी. इस बार भी प्रदेश में दलों के बीच लड़ाई देखी जा रही है. ऐसे में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ इस चुनाव में किंगमेकर बनती है तो भाजपा को समर्थन देंगे या कांग्रेस को? इस सवाल पर जोगी कहते हैं, ‘‘मेरे खून में कांग्रेस है. ऐसे में मुझे खराब से खराब कांग्रेस सरकार मंजूर है लेकिन एक अच्छी भाजपा सरकार नहीं.’’
हालांकि, देखने वाली बात होगी कि अमित जोगी इस चुनाव में कुछ ख़ास प्रभाव छोड़ते हैं या नहीं. नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे.
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