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न्यूज़क्लिक मामला: अदालत ने पुलिस को एफआईआर की प्रति देने के आदेश दिए
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस को एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं. मालूम हो कि पुलिस ने संस्थापक की गिरफ्तारी के वक्त एफआईआर की प्रति देने से इनकार कर दिया था.
मंगलवार को न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और मानव संसाधन अमित चक्रवर्ती को पुलिस ने गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था. बता दें कि अगस्त में संस्था के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था. न्यूयार्क टाइम्स द्वारा संस्था पर नेविल रॉय सिंघम के साथ मिलकर चीनी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने का आरोप लगाने के बाद मामला दर्ज किया गया था. दिल्ली पुलिस ने संस्था के 30 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी करने के साथ-साथ 46 लोगों से इस मामले में पूछताछ की थी. इस दौरान कई पत्रकारों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (मोबाइल-लैपटॉप) आदि भी जब्त कर लिए गए थे.
इस बीच बुधवार को जारी एक बयान में न्यूज़क्लिक ने पुलिस की इस कार्रवाई को "निडर आवाज़ों को दबाने" की कोशिश बताते हुए कहा कि पिछले दो सालों में बड़ी मात्रा में सबूतों की जांच करने के बावजूद कोई भी एजेंसी आज तक मीडिया संस्थान के खिलाफ कोई अपराध स्थापित नहीं कर पाई है. मीडिया हाउस ने कहा कि पुलिस ने उनके परिसर और पत्रकारों के घरों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बिना किसी उचित प्रक्रिया के जब्त कर लिया और एफआईआर की प्रति भी नहीं दी गई.
वहीं, देश के 16 मीडिया संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को सामूहिक रूप से पत्र लिखा. पत्र के ज़रिए पत्रकारों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरूपयोग को रोकने की मांग की गई.
न्यूज़लॉन्ड्री ने संस्था के परिसरों और पत्रकारों के घरों पर पुलिस की कार्रवाई पर ख़बर की है. संस्था के एक पूर्व पत्रकार ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि उसके लैपटॉप, फोन, पासबुक और उसके संपत्ति के दस्तावेज पुलिस ने जब्त कर लिया. हालांकि, पुलिस के सर्च वारंट में उसका नाम नहीं था.
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