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क्या सचिन पायलट अपनी पार्टी बना रहे हैं?
पिछले महीने, सचिन पायलट फिर उन्हीं कारणों से सुर्खियों में थे जो उनकी पार्टी को कतई पसंद नहीं हैं. वह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली अपनी ही पार्टी की सरकार का विरोध कर रहे थे और वसुंधरा राजे के कार्यकाल के दौरान राजस्थान में हुए भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की मांग कर रहे थे.
सोशल मीडिया पर जयपुर में उनके प्रदर्शन की तस्वीरों की बाढ़ आ गई थी. तस्वीरों में पायलट खुद महात्मा गांधी की तस्वीर के नीचे बैठे थे जबकि उनके समर्थक नारे लगा रहे थे.
अब हमें पता चला है कि ऐसा क्यों हुआ?
इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के एक सूत्र ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि पायलट ने "कुछ समय पहले" उनकी सेवाएं ली थीं और वह "दो से तीन सप्ताह" में अपनी खुद की राजनैतिक पार्टी लॉन्च करने की योजना बना रहे थे.
आई-पैक (I-PAC) वही पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जिसके मुखिया प्रशांत किशोर रहे हैं. हालांकि, प्रशांत किशोर अब राजनैतिक सलाहकार की भूमिका से संन्यास की घोषणा कर चुके हैं. आई-पैक अभी तक भाजपा, द्रमुक, तृणमूल, टीआरएस और आम आदमी पार्टी सहित विभिन्न विचारधाराओं के कई राजनीतिक दलों के साथ काम कर चुकी है.
आई-पैक के हमारे सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "पायलट के इरादे स्पष्ट हैं. उन्होंने लगभग तय कर लिया है कि वह अपने नए प्रयास को आगे बढ़ाएंगे और सफल होने के पहले किसी के लिए भी नहीं रुकेंगे. वह सावधानी से चलने की योजना बना रहे हैं. सचिन खुद को ऐसी स्थिति में नहीं रखना चाहते जहां कोई उन पर उंगली उठा सके. यह प्रक्रिया अचानक नहीं हो सकती."
इस हफ्ते की शुरुआत में, पायलट ने गहलोत, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य लोगों से मुलाकात की. जिसके बाद उन्होंने घोषणा की कि वह "एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे." पायलट ने बाद में कहा कि उनकी मांगे "खोखली" नहीं हैं और उन्हें विश्वास है कि "सरकार कार्रवाई करेगी."
न्यूज़लॉन्ड्री ने जब पायलट से पूछा कि क्या वह अपनी पार्टी शुरू करने वाले हैं? इसके जवाब में पायलट ने इस बात की पुष्टि की कि वह "एक दो बार" आई-पैक के लोगों से मिले थे.
पार्टी के सवाल पर उन्होंने कहा, “मैं एक पार्टी क्यों शुरू करूंगा? मैं इतनी अच्छी पार्टी में हूं. मैं बस इतना चाहता हूं कि वह (पार्टी) कुछ चीजों के बारे में कोई निर्णय लें, जिनके लिए मैं पिछले डेढ़ साल से अनुरोध कर रहा हूं."
कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ उनकी बैठक के बारे में पूछे जाने पर पायलट ने कहा, 'मैं कोई प्रेस इंटरव्यू नहीं दे रहा हूं. मैंने श्री खड़गे और श्री गांधी के साथ एक बैठक की और कहा 'मैं आपके लिए एक संसाधन हूं'. इसलिए अब मैं उनके जवाब का इंतजार कर रहा हूं.”
यह पूछे जाने पर कि अगर पार्टी उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती है तो क्या होगा, उन्होंने कहा, "उन्हें फिर से मेरे साथ संपर्क करने दें, अगर कुछ होता है तो मैं आपको बता दूंगा."
हालांकि, आई-पैक के एक पूर्व और एक वर्तमान कर्मचारी ने यह पुष्टि की कि कंसल्टेंसी फर्म एक पार्टी बनाने में पायलट की मदद कर रही है.
उनमें से एक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "हममें से 100 लोग फिलहाल सचिन के साथ काम कर रहे हैं. हमें लगभग 1,100 लोग और नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है. हमने इस नई पार्टी के लिए नाम सुझाए हैं.”
इस सूत्र ने बताया कि जून में पार्टी की घोषणा कर दी जाएगी और इस बात की संभावना नहीं है कि पायलट अपने संभावित नए संगठन के लिए कांग्रेस के ब्रांड से बहुत दूर जाएं.
उन्होंने कहा, "अगर हम पूरी तरह आश्वस्त नहीं होते (कि वह एक नई पार्टी शुरू करेंगे) तो हम इतने लोगों को काम पर नहीं रख रहे होते."
लेकिन पायलट अभी ऐसा क्यों कर रहे हैं?
पहले सूत्र ने कहा, “पायलट का अनशन इसी प्रक्रिया का हिस्सा था. अपनी क्षमताओं के बावजूद, पार्टी के सिस्टम में कोई आवाज न होने के कारण वह खुद को बंधा हुआ महसूस करते हैं."
शायद पायलट इससे पहले भी बंधा हुआ महसूस कर चुके हैं. 2020 में पायलट ने विधायकों के एक समूह के साथ हरियाणा के एक रिसॉर्ट में डेरा डाल लिया था.
गहलोत ने उन्हें निकम्मा और बेकार कहा, और उन्हें राजस्थान के उपमुख्यमंत्री के पद से हटा दिया.
हमारे सूत्र ने कहा, "अगर कांग्रेस उन्हें उनका हक नहीं देती है, तो आगे का सबसे अच्छा रास्ता क्या है?"
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की अफवाहें फैली हैं कि पायलट अपनी पार्टी शुरू कर सकते हैं, लेकिन आई-पैक के साथ उनका वर्तमान प्रयास उल्लेखनीय है. इस महीने की शुरुआत में पायलट ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अजमेर से जयपुर तक "जन संघर्ष यात्रा" भी की. इस बीच, आई-पैक के प्रशांत किशोर ने पायलट के साथ किसी औपचारिक जुड़ाव की पुष्टि नहीं की है; वह वर्तमान में बिहार में जन सुराज यात्रा पर हैं.
खास बात यह है कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव इसी साल दिसंबर तक होने हैं. हमारे सूत्र ने कहा कि सब कुछ तय है. “मैं सचिन पायलट नहीं हूं, लेकिन मैं उन्हें अब काफी अच्छी तरह से जानता हूं. उनके पास और कोई रास्ता नहीं है."
क्या इस बात की संभावना है कि पायलट अपना संगठन शुरू करने के बजाय दूसरी पार्टी में चले जाएं?
सूत्र ने इस संभावना से इंकार किया. उन्होंने कहा, "वह इतना बड़ा नाम हैं कि उन्हें दूसरे या तीसरे दर्जे की पार्टी में शामिल होने की जरूरत नहीं है. वह पहले ही पार्टी के भीतर लड़ने की कोशिश कर चुके हैं. अपनी खुद की पार्टी बनाना एकमात्र विकल्प बचा है. एक बार जब वह कांग्रेस पार्टी छोड़ देंगे, तो कांग्रेस का एक बड़ा हिस्सा उनके साथ आएगा. यह कांग्रेस को बीच से विभाजित कर देगा.'
पायलट की लोकप्रियता अपनी जगह है. वह गुर्जर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जो राजस्थान में कम से कम 35 विधानसभा क्षेत्रों और 12 संसदीय क्षेत्रों में प्रभावशाली है, जिन्हें 2018 के चुनावों में कांग्रेस की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय दिया जाता है.
लेकिन क्या वह अकेले काफी होंगे?
हमारे सूत्र ने माना कि "हो सकता है वह मुख्यमंत्री न बन पाएं या चुनाव न जीत पाएं. लेकिन अगर वह अलग हो जाते हैं, तो आसानी से विपक्ष के नेता हो सकते हैं. उन्होंने जमीन पर पांच साल तक कड़ी मेहनत की और पिछले चुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाई. वह लोगों को जानते हैं और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वह 45 वर्ष के हैं और उनके आगे उनका पूरा करियर है. राजनीति में कब क्या हो जाए आप कभी नहीं जान सकते.
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