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सीएम हाउस पर खर्च हुए 45 करोड़, न्यूज़ नेशन ने हटाया जनता की राय वाला वीडियो
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के नवीनीकरण पर किए गए खर्च को लेकर विवाद जारी है. दावा किया गया है कि केजरीवाल के सरकारी बंगले के सौंदर्यीकरण पर 44 करोड़ 78 लाख रुपए खर्च हुए हैं. न्यूज़ चैनल टाइम्स नाउ नवभारत ने 'ऑपरेशन शीश महल' के जरिए इसका खुलासा किया है. बताया गया कि सीएम आवास में 8-8 लाख रुपए का एक पर्दा लगाया गया है.
इस खुलासे के बाद से देश की राजनीति में भूचाल आ गया. जिस पार्टी की बुनियाद ही भ्रष्टाचार विरोधी और ईमानदारी की राजनीति पर रखी गई थी अब वह खुद ऐशोपरस्ती के चलते सवालों के घेरे में है. इस मुद्दे पर टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर लगातार बहस जारी है.
इस कड़ी में न्यूज़ नेशन ने एक वीडियो पब्लिश किया. वीडियो का विषय था कि केजरीवाल ने बंगले पर खर्च किए 45 करोड़, दिल्ली वाले क्या बोले?
वीडियो में लोग सीएम अरविंद केजरीवाल की तारीफ करते हुए नजर आ रहे हैं. इसे केजरीवाल ने भी अपने ट्विटर पर शेयर किया है. हालांकि न्यूज़ नेशन ने थोड़े समय बाद ही यह वीडियो प्राइवेट कर लिया. इसके बाद केजरीवाल ने इस वीडियो को डाउनलोड करके अलग से डाला हुआ है. जो अभी भी उनके ट्विटर और यूट्यूब पेज पर मौजूद है.
न्यूज़लॉन्ड्री को मिली जानकारी के मुताबिक यह वीडियो भारतीय जनता पार्टी के दबाव में हटाया गया है. न्यूज़ नेशन में काम करने वाले कर्मचारियों ने हमें बताया कि यह पूरा वीडियो केजरीवाल की तारीफ में शूट किया गया था. पब्लिश होने के बाद इसे आम आदमी पार्टी ने अपने फायदे के लिए प्रयोग किया. इसके बाद बीजेपी नेताओं के दबाव के चलते यह वीडियो हटाना पड़ा.
यह वीडियो क्यों हटाया गया इसको लेकर हमने न्यूज़ नेशन के एडिटर इन चीफ मनोज गैरोला से बात की. वह वीडियो हटाने के सवाल पर कहते हैं, "हटाया नहीं होगा कोई टेक्निकल इश्यू हो सकता है. मैं पता करके बताता हूं."
वह आगे कहते हैं, "वह डिजिटल का था ना, क्योंकि डिजिटल पर हम लोगों का ध्यान थोड़ा कम ही रहता है, टीवी पर ज्यादा फोकस रहता है. मुझे बिल्कुल भी इस वीडियो के बारे में ध्यान नहीं है, मैं आपको पता करके बताता हूं." अगर उनका जवाब आता है तो खबर में अपडेट कर दिया जाएगा.
इस वीडियो रिपोर्ट का हिस्सा रहे एक पत्रकार नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, "मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. वो शायद कोई टेक्निकल फॉल्ट हो गया था. वीडियो के लिए हमने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों की राय ली थी. इसके अलावा भी वीडियो बनाए गए थे. इनमें कोई एंटी या प्रो नहीं था बस पब्लिक का ओपिनियन था. यह कोई लाइव वीडियो नहीं था बल्कि शूट किया गया था. लेकिन क्यों हटा, किसलिए हटा, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है."
क्या आपने जानने की कोशिश नहीं की कि यह वीडियो क्यों हटाया गया? इस सवाल पर वह कहते हैं, "नहीं, मेरा जो काम है, मैं वही काम करता हूं."
एक अन्य कर्मचारी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर कहा कि यह वीडियो पूरी तरह से केंद्र सरकार के खिलाफ जा रहा था, क्योंकि इसमें सिर्फ केजरीवाल की तारीफ हो रही थी. वे बताते हैं कि दरअसल, रिपोर्टर को बोला गया था कि दो वॉक्स पॉप करके आना है. एक पॉजिटिव और एक निगेटिव. निगेटिव वाला देर से भेजा गया था और उससे पहले ही पॉजिटिव वाला पब्लिश हो गया था. जबकि दोनों को साथ पब्लिश करना था.
"पॉजिटिव वाला पब्लिश होते ही हंगामा मच गया क्योंकि अरविंद केजरीवाल ने भी उसे ट्वीट कर दिया था. इसके बाद मैनेजमेंट की ओर से बोला गया कि इसे तुरंत हटाओ. सच्चाई यही है कि इसके लिए बीजेपी की ओर से मैनेजमेंट पर दबाव बनाया गया था. क्योंकि वीडियो देखने में ही ऐसा लग रहा है जैसे पैसे देकर बनवाया गया हो. हालांकि ऐसा नहीं है." उन्होंने कहा.
वह आगे कहते हैं, दूसरी बात ये है कि डिजिटल में कुछ भी चला जाता है. यहां कोई फिल्टर प्रोसिस नहीं है. लेकिन टीवी में ऐसा नहीं है. वहां हर बात का ध्यान रखा जाता है.
वहीं न्यूज़ नेशन के एक रिपोर्टर कहते हैं कि दो वीडियो बनाए गए थे. एक में लोग अरविंद केजरीवाल को गालियां दे रहे थे और एक वीडियो में लोग केजरीवाल के फेवर में बोल रहे थे. लेकिन केजरीवाल वाले वीडियो का मिस यूज होने लगा.
वे कहते हैं, "पक्ष और विपक्ष में वीडियो करने के लिए दो अलग-अलग रिपोर्टर असाइन हुए थे. जिसको पक्ष में करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसने पहले बनाकर भेज दिया. इसलिए पॉजिटिव वाला वीडियो पहले अपलोड हो गया. दूसरा वाला वीडियो बाद में अपलोड हुआ. इसके बाद चैनल ने दोनों वीडियो को ही डाउन (हटा) कर दिया. लेकिन इस बीच कुछ लोगों ने वीडियो डाउनलोड कर लिया था, जिसे लोग अब अपलोड करके चला रहे हैं. ये मामला नोटिस में तब आया जब अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया. जिस उद्देश्य से वीडियो बनाया गया था, उसके अलावा कुछ होने लगे तो फिर डाउन करना पड़ा."
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