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दिल्ली जंतर-मंतर: प्रीत सिंह ने एक बार फिर दिया नफरती भाषण
"इनकी कोई आस्था नहीं है इस धरती के प्रति. हम यहां रहते हैं हमारी इस धरती के प्रति आस्था है, लेकिन इनकी आस्था का केंद्र वेटिकन और मक्का में है. उनकी इस देश में आस्था ही नहीं है. उनकी इस देश के संविधान में भी आस्था नहीं है."
ये शब्द हैं हिंदू महापंचायत के आयोजक और हेट स्पीच के मामले में जेल की हवा खा चुके भाई प्रीत सिंह के. नफरती भाषणों और पंचायतों के आयोजक भाई प्रीत सिंह ने एक बार फिर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया है.
हेट स्पीच और रेप के मामले में जमानत पर बाहर प्रीत सिंह ने 11 दिसंबर रविवार को जंतर मंतर पर समान नागरिक संहिता के समर्थन में प्रदर्शन किया. यह प्रदर्शन सेव इंडिया फाउंडेशन की तरफ से आयोजित किया गया था. 2021 में अस्तित्व में आए सेव इंडिया फाउंडेशन ने बहुत तेजी से दक्षिणपंथी हिंदू इकोसिस्टम में जगह बना ली है. लगभग डेढ़ साल के सफर में सेव इंडिया फाउंडेशन ने दो विवादित हिंदू महापंचायतों का आयोजन किया. पहली हिंदू पंचायत का आयोजन 8 अगस्त 2021 को जंतर मंतर पर हुआ, जिसमें कथित तौर पर समुदाय विशेष के खिलाफ नफरती नारे लगाए गए और खुले तौर पर अल्पसंख्यकों को काटने की बातें कही गईं. जंतर मंतर पर लगाए गए नफरती नारों के आरोप में प्रीत सिंह को 1 महीना जेल में बिताना पड़ा था. फिलहाल उन्हें इस केस में जमानत मिली हुई है.
हिंदू महापंचायत इस साल 3 अप्रैल को बुराड़ी में हुई, जो काफी विवादित रही. लेकिन इतने विवाद के बावजूद प्रीत सिंह अपने संगठन के साथ सक्रिय हैं. भाई प्रीत सिंह आयोजक संस्था सेव इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष हैं.
नफरती नारे लगाने वाला इकोसिस्टम देश में एक बार फिर से सक्रिय हो रहा है.
रविवार को प्रदर्शन से पहले सेव इंडिया फाउंडेशन द्वारा व्हाट्सएप पर एक मैसेज अनेकों जगह भेजा गया, जिसमें लिखा था कि आप सभी को सूचित किया जाता है कि आज केंद्र सरकार ने सत्र में समान नागरिकता संहिता से जुड़ा बिल पेश किया है, जिसके खिलाफ पूरा विपक्ष एक हो गया है. ये बिल भारत देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और हिंदुओं की जीत निश्चित करता है, इसी बिल के समर्थन में कल रविवार को 12 बजे दोपहर में जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा.
कृपया सभी हिंदू भाई और बहन ज्यादा से ज्यादा संख्या में आएं और अपना पूर्ण समर्थन दें.
समस्त हिंदू समाज
भारत बचाओ आंदोलन
सेव इंडिया फाउंडेशन”
इस मैसेज में सेव इंडिया फाउंडेशन के पीतमपुरा प्रखंड के अध्यक्ष पवन राय का मोबाइल नंबर भी दिया गया था. पवन राय ने न्यूज़लांड्री को इस मैसेज के भेजे जाने की पुष्टि की.
दोपहर करीब 12:00 बजे से जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारी धीरे-धीरे आने लगे. प्रदर्शन करने आए लोगों में से कुछ लोगों ने सेव इंडिया फाउंडेशन की टीशर्ट पहनी थी और कुछ लोगों के हाथों में बैनर थे. बैनर पर लिखा था, "सिविल संहिता - शरियत दंड संहिता - क्यों नहीं"
वहीं एक अन्य बैनर पर लिखा था, "सेकुलर देश में धर्म और आधारित कानून क्यों? विरोधी जवाब दें." इसी तरह के कुछ और बैनर भी थे जिनमें समान नागरिक संहिता को लेकर प्रधानमंत्री से मांग की गई थी.
इस कार्यक्रम में धीरे-धीरे प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती गई और करीब 100 लोग जुट गए. ध्यान देने वाली बात है कि सेव इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित अब तक के सभी कार्यक्रमों में यह कार्यक्रम सबसे फीका रहा. इससे पहले के दोनों आयोजनों में जिस तरह की भीड़ रही, उस तरह की भीड़ यहां देखने को नहीं मिली. हमने इस बारे में प्रीत सिंह से बात की तो उन्होंने कहा, "यहां अभी सेव इंडिया फाउंडेशन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लोगों को ही बुलाया गया था. इसलिए इस प्रदर्शन में लोगों की संख्या कम है."
दोपहर 12:30 बजे के करीब मंच सज चुका था और सभी प्रदर्शनकारी मंच के आसपास और मंच पर खड़े हो गए. मंच पर बोलते हुए सेव इंडिया फाउंडेशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक मित्तल ने कहा, "मुसलमानों की लड़कियों की शादी 13 साल में हो जाती है, जबकि हिंदुओं की लड़कियों की शादी 18 साल में होती है. यह कैसा कानून है? एक देश में दो कानून नहीं चलेगा."
हमने अशोक मित्तल से उनके इस बयान से बारे में पूछा कि क्या उनके पास कोई आंकड़ा है, जिसके आधार पर आप ये कह रहे हैं? इस सवाल का जवाब उनके पास नहीं था. उन्होंने कहा कि इसमें आंकड़े की क्या जरूरत है, यह तो सबके सामने है.
यही सवाल हमने प्रदर्शन के आयोजक प्रीत सिंह से भी पूछा. प्रीत सिंह ने भी इस सवाल का कोई मुकम्मल जवाब नहीं दिया.
अशोक मित्तल का भाषण खत्म होने के बाद प्रीत सिंह मंच पर चढ़े और उन्होंने समर्थकों से कहा कि वे भी मंच पर आ जाएं और हाथों में बैनर लेकर खड़े हो जाएं.
भाषण के दौरान प्रीत सिंह ने अल्पसंख्यकों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी इस देश में कोई आस्था नहीं है.
प्रीत सिंह ने सामने खड़े समर्थकों से कहा,
“इस देश के राम कृष्ण के प्रति हमारी आस्था है
इस देश के वृक्षों के प्रति हमारी आस्था है
इस देश के पहाड़ों के प्रति हमारी आस्था है
इस देश के नदियों के प्रति हमारी आस्था है
लेकिन उनकी आस्था का केंद्र वेटिकन में है, उनकी आस्था का केंद्र मक्का में है. उनकी इस देश में आस्था ही नहीं है. उनकी इस देश के संविधान तक में आस्था नहीं है. यदि उनकी इस देश के संविधान में थोड़ी सी भी आस्था होती तो वे अपने घरों से बाहर निकलते हैं और इस देश के प्रधानमंत्री का माल्यार्पण करके स्वागत करते.”
वह आगे कहते हैं, “मैं मानता हूं कि जो भी चीज देश हित में हो. अब हर देशभक्त को अपनी जाति धर्म से ऊपर उठकर देश हित का सोचना चाहिए और देश हित में यह कानून बनाने वाली सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए.”
हमने प्रीत सिंह से पूछा कि वह प्रदर्शन के बहाने अल्पसंख्यकों को निशाना क्यों बना रहे हैं? उन्होंने जवाब में कहा, “हम किसी समुदाय विशेष को निशाना नहीं बना रहे हैं. हम उन लोगों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं जो यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर यूनिफॉर्म सिविल कोड के विरोध में वे लोग खड़े होंगे, तो हम उन से 10 गुनी संख्या में इस कानून के समर्थन में खड़े होंगे. अगर विरोध में हजार लोग खड़े होंगे तो हम दस हजार की संख्या में समर्थन में खड़े होंगे. इसके अलावा सेव इंडिया फाउंडेशन एक सिग्नेचर कैंपेन चला रहा है, जिसका मकसद यूनिफॉर्म सिविल कोड के समर्थन में एक करोड़ सिग्नेचर करवाना है.”
बता दें कि इस समय संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है. सत्र के तीसरे दिन 9 दिसंबर को राज्यसभा में भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने को लेकर एक निजी सदस्य विधेयक पेश किया. संसद में विपक्ष के सदस्यों ने इस बिल का विरोध किया और प्रस्तावित विधेयक पर मतदान की मांग की. बिल को पेश करने के पक्ष में 63, और विरोध में 23 वोट पड़े. बिल में मांग की गई कि देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने को लेकर एक National Inspection & Investigation Commission बनाया जाए.
इसके अलावा कई भाजपा शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने को लेकर कमेटी भी बना दी गई है. कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा 2024 के आम चुनाव से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कर सकती है.
प्रीत सिंह सिर्फ अपने नफरती भाषणों की वजह से ही खबरों में नहीं रहे. बल्कि इसी साल मई महीने में प्रीत सिंह की पत्नी ने प्रीत सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. प्रीत सिंह की पत्नी ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया था कि प्रीत सिंह के भाई और पिता, 2 साल तक उनका बलात्कार करते रहे. दिल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर आईपीसी की धारा 376, 377, 323, 34 के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया था. प्रीत सिंह को फरार घोषित कर दिया था. हालांकि अभी तक पुलिस ने चार्जशीट दाखिल नहीं की है और प्रीत सिंह जमानत पर बाहर आ गए हैं.
वहीं जंतर मंतर में दी गई हेट स्पीच के मामले में भी प्रीत सिंह जमानत पर हैं. प्रीत सिंह की लीगल टीम के सदस्य एडवोकेट नीरज चौहान ने बताया, “हेट स्पीच के मामले वाली फाइल दिल्ली के एलजी के पास है. जब तक वह फाइल को आगे नहीं बढ़ाएंगे, तब तक कोर्ट की सुनवाई पूरी नहीं होगी."
हमने पूछा कि राज्यपाल प्रीत सिंह की फाइल आगे क्यों नहीं बढ़ा रहे हैं? जवाब में नीरज चौहान कहते हैं कि “वह तो एलजी साहब ही जानें.”
हमने प्रीत सिंह की फाइल के संबंध में दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को कुछ सवाल भेजे थे. इस पर उनके पीए राकेश रंजन ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, "प्रीत सिंह की लीगल टीम झूठ बोल रही है. एलजी ऑफिस ने कोई फाइल नहीं रोकी है"
उन्होंने यह भी कहा कि हमें तो यह भी नहीं पता कि केस किस स्टेज पर है.
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