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7 साल बाद कहां पहुंचा प्रधानमंत्री का सभी झुग्गीवासियों को पक्का घर देने का वादा
2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, "मेरा सपना है कि साल 2022 में जब आजादी के 75 साल होंगे, तब दिल्ली के हर झुग्गी वाले का अपना पक्का घर हो. यह सपना मैं पूरा करना चाहता हूं.”
दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 757 झुग्गियां हैं. इन झुग्गियों में लगभग 3,06,146 मकान हैं जिनमें लगभग 25 से 30 लाख लोग रहते हैं. खुली नालियां, गंदगी, गंदे शौचालय और जर्जर होते मकान इन झुग्गियों की पहचान बन चुके हैं.
2022 अब खत्म हाेने को है, आजादी का अमृत महोत्सव जारी है, लेकिन दिल्ली के सभी झुग्गीवासियों को पक्का मकान नहीं मिला. हालांकि इस दौरान दिल्ली विकास प्राधिकरण ने इन-सीटू स्लम रिहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट या आईएसएसआर के तहत दिल्ली के कालकाजी इलाके में 25 वर्ग मीटर में दो कमरों के 3,024 फ्लैट बनाए. फ्लैट के लिए लाभार्थियों को 1,47,400 रुपए जमा कराने होंगे. 345 करोड़ रुपए की लागत से बने इन फ्लैट्स को 3,068 हेक्टेयर जमीन पर बनाया गया है. हर फ्लैट में रसोई, स्नानघर, शौचालय के अलावा एक बैठक और एक शयनकक्ष है.
यह सभी फ्लैट भूमिहीन कैंप, नवजीवन कैंप और जवाहरलाल नेहरू कैंप के झुग्गीवासियों को दिए जाएंगे. इसके बाद भूमिहीन कैंप, नवजीवन कैंप और जवाहरलाल नेहरू कैंप की झुग्गियां तोड़ दी जाएंगी.
बीते 2 नवंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री ने 575 लोगों को उनके फ्लैट की चाबियां सौंपी.
फ्लैट मिलने के बाद जहां एक तरफ कुछ लोग खुश हैं, तो कुछ लोग दुखी भी हैं. फ्लैट पाने वाली लाभार्थी शांती कहती हैं, “मुझे मोदी जी ने फ्लैट की चाबी दी. पहले झुग्गी में नरक की जिंदगी जी रहे थे, अब कोठी में रहेंगे. अब हमारे बच्चों का भविष्य भी बेहतर होगा.”
वहीं रामसेवक पासवान कहते हैं, "हमारे परिवार के हिसाब से फ्लैट बहुत छोटा है. मेरे तीन बेटे हैं और तीन बहुएं. झुग्गी में सबका गुजारा हो जाता था लेकिन वहां एक कमरे में कैसे गुजारा होगा? इससे बेहतर हमें वहीं रहने देते."
नवजीवन कैंप की रहने वाली मीना बताती हैं, "मैं पिछले 40 साल से अपने बच्चों के साथ यहां झुग्गी में रह रही हूं, लेकिन मुझे फ्लैट नहीं मिला. डीडीए ने सर्वे भी किया था लेकिन लिस्ट में मेरा नाम नहीं आया. अब यह झुग्गी भी तोड़ दी जाएगी, ऐसे में मैं अपने बच्चों को लेकर कहां जाऊंगी? मेरा मोदी जी से बस इतना कहना है कि अगर घर दे रहे हैं तो सबको दें."
वहीं 55 वर्षीय जरावती कहती हैं, "मेरे पति और मेरा बड़ा बेटा मर चुके हैं. मैं अपने पोतों, बहू और छोटे बेटे के साथ रहती हूं. सरकार फ्लैट के बदले 1,47,400 रुपए मांग रही है, मैं कहां से दूं? मेरे पास पैसे नहीं हैं. घर में कोई कमाने वाला नहीं है. क्या करूं, मैं कहां डाका डाल दूं कि पैसे आ जाएं?"
दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा सात साल में सिर्फ 3,024 फ्लैट बनाए गए हैं. अगर इस रफ्तार से ही फ्लैट बनाने का काम जारी रहा तो दिल्ली के प्रत्येक झुग्गीवासी को पक्का मकान देने के प्रधानमंत्री के सपने को पूरा होने में कम से कम 700 साल लग जाएंगे.
हमने फ्लैट पाने वाले लाभार्थियों और आम झुग्गीवासियों से बात की और उनकी परेशानियां जानने की कोशिश की.
देखिए पूरी रिपोर्ट-
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