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एनएल चर्चा 240: ईडब्ल्यूएस आरक्षण को मंजूरी और सरकार का टीवी चैनलों को फरमान
एनएल चर्चा के इस अंक में डीवाई चंद्रचूड़ के भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश बनने, सुप्रीम कोर्ट द्वारा ईडब्ल्यूएस आरक्षण को दी गई वैधता, मेटा द्वारा अपने 11 हजार कर्मचारियों को निकालने, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा टीवी चैनलों को हर रोज 30 मिनट राष्ट्रीय महत्व का कंटेंट दिखाना होगा, पीएमएलए कोर्ट ने शिवसेना सांसद संजय राउत दो दी जमानत, भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में चुनाव जीतने पर समान नागरिक संहिता लागू करने का किया वादा, कॉप 27 की बैठक में चीन और भारत से प्रदूषण फैलाने के लिए छोटे देशों ने मांगा हर्जाना, लंदन कोर्ट ने खारिज की नीरव मोदी की याचिका जल्द लाया जाएगा भारत, बेंगलुरु में कॉमेडियन वीर दास का रद्द हुआ शो और टी 20 वर्ल्ड कप से भारत के बाहर होने समेत कई अन्य विषयों का जिक्र हुआ.
चर्चा में इस हफ्ते आर्टिकल 19 के संस्थापक नवीन कुमार, न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन और सह-संपादक शार्दूल कात्यायन शामिल हुए. संचालन कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
अतुल ने चर्चा की शुरुआत ईडब्ल्यूएस आरक्षण के विषय से की. वह कहते हैं, “सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने आरक्षण को वैध माना है. इस फैसले के साथ ही कुछ और रास्ते खुल गए हैं, जैसे कि 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण की सीमा नहीं हो सकती थी क्या अब वह ज्यादा हो सकती है? अभी भी यह बात साफ नहीं है कि वह कौन से आंकड़े थे या पैमाने थे कि 10 प्रतिशत सामान्य वर्ग के लोग ही गरीबों में आये? क्या अब यह समय आ गया है कि जाति जनगणना हो, साथ ही आर्थिक तौर पर भी सर्वे हो ताकि यह पता चल सके कि कितने प्रतिशत लोग गरीब हैं. इन सभी सवालों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर नवीन कुमार से अतुल ने सबसे पहले प्रश्न किया.”
नवीन कहते हैं, “सवर्णवादी व्यवस्था को बनाए रखने की यह फूहड़ कोशिश है. इसमें बहुत सारे लोग उलझ गए हैं. केवल कोर्ट या दक्षिणपंथी पार्टियां ही नहीं सब इसमें उलझ गए. जो लोग सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले थे वह सब इसमें लटपटा गए. उन्हें समझ नहीं आ रहा करना क्या है. 10 प्रतिशत जो आरक्षण आप ला रहे हैं उसके पीछे की नीयत सोचनी पड़ेगी. जो बात जस्टिस पारदीवाला ने कही, वह बताता है कि आप जाना कहां चाहते हैं. रही बात 50 प्रतिशत आरक्षण की तो कोर्ट ने भी मान लिया कि आरक्षण 60 प्रतिशत हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही आरक्षण का कोटा तोड़ दिया. यह लोग आरक्षण को मनरेगा बनाना चाहते हैं.”
इस विषय पर आनंद कहते हैं, “जो 103 संविधान संशोधन है उसके तहत अनुच्छेद 15 और 16 में एक-एक खंड जोड़ा गया. इस फैसले से इस बात की पुष्टि हो गई की आर्थिक स्थिति भी आरक्षण का आधार हो सकता है. सिर्फ सामाजिक या शैक्षणिक ही नहीं. ईडब्ल्यूएस आरक्षण के पक्ष में दिए गए फैसले से सुप्रीम कोर्ट ने एक मान्यता दे दी 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण हो सकता है.”
शार्दूल अपनी टिप्पणी करते हुए कहते हैं, “गरीबी एक एक सबसे बड़ा श्राप है. हमारे शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ नहीं है. सामाजिक न्याय के अधिकार में आने वाले लोगों में गरीबी के हिसाब से विभाजन करना गलत बात है. कुछ समय पहले एक रिपोर्ट आई थी की जो लोग 25 हजार कमाते हैं वह भारत के शीर्ष के 10 प्रतिशत लोगों में आते हैं. तो जो लोग 8 लाख सालाना कमाते हैं, वे गरीब कैसे हो सकते हैं? हमारे देश का एक बहुत बड़ा तबका दो समय की रोटी नहीं जुटा पाता, उसमें सबसे बड़ा तबका एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों का ही है.”
इस विषय के विभिन्न पहलुओं के अलावा चर्चा में टीवी चैनलों को राष्ट्रीय महत्व को लेकर कंटेंट प्रसारित करने को लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी नोटिस पर भी विस्तार से बातचीत हुई. पूरी बातचीत सुनने के लिए हमारा यह पॉडकास्ट सुनें और न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करना न भूलें.
टाइम कोड
00:00:00 - 00:14:20 - इंट्रो, हेडलाइंस और जरूरी सूचना
00:14:20 - 00:54:45 - ईडब्ल्यूएस आरक्षण
00:54:45 - 01:09:00 - सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का टीवी चैनलों को आदेश
1:09:00 - सलाह और सुझाव
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प्रोड्यूसर- चंचल गुप्ता
एडिटिंग - उमराव सिंह
ट्रांसक्राइब - अश्वनी कुमार सिंह
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