NL Tippani
भारत के नए राष्ट्रपिता, आग-लगाऊ तिहाड़ शिरोमणि और डंकापति
चौमासा बीत चुका था. त्यौहारी माहौल था. एक ओर दुर्गा पूजा और दशहरा की बमचक थी, दूसरी ओर डंकापति की रुटीन इवेंटबाजियां. आर्यावर्त इन्हीं चकल्लसों से सराबोर था. धृतराष्ट्र का दरबार इन्हीं किस्सों में तल्लीन था.
दूसरी तरफ देश एक जबर्दस्त किस्म की लफ्फाजी से दरपेश रहा. संयोग कहें या दुर्योग, कि जब इस टिप्पणी की स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी, वह दो अक्टूबर का दिन था. देश के पुराने वाले राष्ट्रपिता की जन्मजयंती. लेकिन उसी दो अक्टूबर को भयानक हर्ष और प्रचंड उत्साह के साथ मुझे इस टिप्पणी में लिखना पड़ा कि मोहन भागवत के रूप में देश को नया राष्ट्रपिता मिल गया है.
इसी हफ्ते देश के नंबर वन खबरिया चैनल आज तक के सुपर सितारे तिहाड़ शिरोमणि सुधीर चौधरी की लपलपायी, आगलगाऊ जुबान ने फिर से वही सब किया जिसके लिए वो जाने जाते हैं. इनके जीवन का फलसफा है बदनाम हुए तो क्या नाम न होगा. हम तालिबे शोहरत हैं हमें नंग से क्या डर. इन्होंने अपनी कुंठित, संकीर्ण, नफरती, सांप्रदायिक, जहरीली सोच को देश के नंबर एक चैनल आज तक के प्राइम टाइम पर जाहिर किया. बदले में लानत-मलानत, टीआरपी और बोनस में साहब का इंटरव्यू मिलने की उम्मीद.
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