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क्या पंजाब में पत्रकारों की हो रही जासूसी?
“आप कहां रहते हैं? प्रेस कार्ड नंबर क्या है? साथी रिपोर्टर कौन हैं? घर में कौन हैं?” इस तरह के सवाल आजकल पंजाब के संगरूर में पत्रकारों से फोन पर पूछे जा रहे हैं. यह सवाल कोई और नहीं बल्कि राज्य की क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) द्वारा किए जा रहे हैं.
संगरूर जिले में मान्यता प्राप्त कई पत्रकारों को फोन लगाया जा रहा है. फोन लगाने वाला कभी अपना परिचय देता है, कभी नहीं देता है. फिर वह पत्रकारों से उनकी जानकारी जुटाता है. जानकारी देने से इंकार करने पर उनका जवाब होता है, “बाकी पत्रकार तो जानकारी दे रहे हैं आपको क्या दिक्कत है?”
संगरूर के अलावा लुधियाना में पत्रकार संदीप सिंह के घर पर जाकर सीआईडी ने इसी तरह की पूछताछ की. संदीप ने अपने घर पर सीआईडी अधिकारी बनकर आए एक शख्स की जानकारी को ट्विटर पर भी साझा किया है. न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए संदीप कहते हैं, “मेरे ननिहाल में पंजाब इंटेलिजेंस विभाग का एक व्यक्ति मेरे बारे में पूछते हुए आया. परिवार के सदस्यों से उसने मेरे कामकाज, परिवार में कितने लोग हैं समेत कई सवाल पूछे. जब मैंने फोन पर उस व्यक्ति से बात की तो वह फिर चला गया.”
संदीप के मुताबिक, मेरे घर से निकलने के बाद वह गांव के सरपंच से मेरे बारे में जानकारी इकट्ठा करने लगा. संदीप कहते हैं, “पुलिस में मेरे स्रोत ने बताया कि जो व्यक्ति मेरे घर गया था वह सीआईडी से था.”
संदीप बताते हैं कि, स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि, वह गलती से उनके घर चला गया था. असल में वह पास के गांव में रहने वाले दूसरे संदीप सिंह जो की मैगजीन चलाते हैं उनके घर जाने वाला था. वह कहते हैं, “यह झूठ है. संदीप नाम का वहां कोई नहीं रहता.”
संगरूर जिले में ऐसे कई पत्रकार हैं जिन्हें फोन कर जानकारी मांगी गई. हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार हरमनदीप सिंह कहते हैं, “जिले में मान्यता प्राप्त पत्रकारों का यलो कार्ड बना हुआ है. फोन पर सीआईडी वाला बोला कि वेरिफिकेशन कर रहे हैं. जबकि नया कार्ड अभी कुछ महीने पहले ही तमाम प्रकियाओं को पूरा करके जारी हुआ है.”
वह कहते हैं, “जब कुछ महीने पहले ही सारी जानकारी लेकर वेरिफिकेशन हुआ है, कार्ड बना है तब इसकी क्या जरूरत है. दूसरी बात, अगर वेरिफिकेशन करना भी है तो यह काम जनसम्पर्क विभाग के अधिकारी का है, न की सीआईडी का.”
संगरूर जिले में बीबीसी और न्यूज़ 24 के लिए फ्रीलांस के तौर पर काम करने वाले कुलवीर सिंह कहते हैं, “मेरे दोस्त का नाम लेकर फोन आया और फिर मुझसे जानकारी लेने लगे. उस समय मैं स्टोरी में व्यस्त था तो ध्यान नहीं दिया. फिर बाद में जब अन्य पत्रकारों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि उन्हें भी फोन आया है. जब वापस उस नंबर पर फोन किया तो अधिकारी ने कहा कि अगर नहीं बताना हो तो मत बताओं, बहस मत करो.”
संगरूर के सभी स्थानीय पत्रकारों ने फोन पर जानकारी लेने के खिलाफ एक ज्ञापन वहां के जिलाधिकारी को दिया है. जिलाधिकारी ने कहा है कि वह सीनियर अधिकारियों से इस बारे में बात करेंगे.
कुलवीर बताते हैं, “जब हमने सीआईडी के अधिकारी से पूछा की आप लोग किसके कहने पर यह जानकारी जुटा रहे हैं तो उसने कहा कि ‘सरकार’ करवा रही है.“
बता दें कि बीती 28 अगस्त को संगरूर पुलिस ने नौ स्थानीय पत्रकारों को ब्लैकमेल करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. एसएसपी संगरूर मंदीप सिद्धू ने कहा कि पत्रकारिता की आड़ में उक्त नौ पत्रकार छोटी-मोटी घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करते थे और फिर ब्लैकमेल करते थे.
पुलिस द्वारा की गई इस गिरफ्तारी के बाद फोन आने पर संगरूर जिले के बहुत से पत्रकारों को लगा कि ये फोन शायद इसी मामलों को लेकर आ रहा है. कुलवीर कहते हैं कि हमने एसएसपी को भी फोन किया था. उन्होंने कहा कि जो फोन आप लोगों को आ रहे हैं उसका इस केस से कोई लेना देना नहीं है.
कुलवीर बताते हैं, “सीआईडी के अधिकारियों ने इसे स्वैच्छिक बताया.”
हरमनदीप सिंह ने जो ट्वीट किया था वह वायरल होने के बाद उन्हें ट्वीट डिलीट करने के लिए कहा गया. वह कहते हैं, “मेरे साथी पत्रकारों के जरिए सीआईडी के अधिकारियों ने ट्वीट डिलीट करने का दबाव डाला. लेकिन मैंने मना कर दिया.”
आजतक के लिए संगरूर जिले में बतौर स्ट्रिंगर काम करने वाले बलवंत सिंह के पास भी सीआईडी का फोन आया था. अनुमान है कि जिले में करीब 30 से ज्यादा पत्रकारों के पास ऐसे फोन आ चुके हैं. बलवंत कहते हैं, “मुझे फोन कर येलो कार्ड का नंबर मांगा गया. मैं व्यस्त था इसलिए नंबर नहीं दे पाया. जब बाद में फोन लगाया कि कार्ड नंबर क्यों चाहिए तो उन्होंने कहा कि हम वेरिफिकेशन कर रहे हैं.”
यह फोन अखबार और टीवी में काम करने वाले पत्रकारों को आ रहे हैं. जिले से मान्यता प्राप्त पत्रकारों की लिस्ट सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (डीपीआर) ने सीआईडी को दी थी. हरमनदीप कहते हैं, “जब हम पत्रकारों ने डीपीआर से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि इंटेलिजेंस वालों ने हमसे लिस्ट मांगी थी.”
कुलवीर कहते हैं, “हमारी सारी जानकारी तो पहले से ही सरकार (डीपीआर) के पास है, फिर ये अलग से वेरिफिकेशन क्यों हो रहा है?”
संगरूर जिले के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी अमनदीप सिंह ने फोन और मैसेज का जवाब नहीं दिया. वहीं डीपीआर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ईश्वरंदर सिंह ग्रेवाल कहते हैं, “मुख्यमंत्री के जिले में आठ फर्जी पत्रकार पकड़े गए, इसलिए हो सकता सुरक्षा की दृष्टि से यह फोन कॉल किए गए होंगे. इस मामले में ज्यादा जानकारी के लिए संगरूर के डीपीआर से बात करें.”
हमने इस मामले में सूचना विभाग की डायरेक्टर सोनाली गिरि से भी संपर्क किया लेकिन बात नहीं हो पाई.
मामला बढ़ता देख सीआईडी के एआईजी आलम विजय सिंह ने मीडिया से कहा कि, हम सुरक्षा कारणों से पत्रकारों का वेरिफिकेशन करने के लिए फोन लगा रहे थे. लेकिन अब हमने इसे रोक दिया है.
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