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Exclusive: 6 साल में यूपी सरकार के पोर्टल पर 26 लाख युवाओं ने किया आवेदन, सिर्फ 6 लाख को मिली नौकरी
उत्तर प्रदेश सरकार बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए “सेवायोजन” नाम का पोर्टल चलाती है. पोर्टल का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार तलाशने में मदद करना है. 2017 से लेकर 18 जुलाई 2022 तक इस पोर्टल पर 26 लाख 87 हजार 174 युवाओं ने रोजगार के लिए रजिस्ट्रेशन कराया, जिसमें से महज 6 लाख 31 हजार 502 युवाओं का रोजगार के लिए चयन हुआ है. यह जानकारी न्यूज़लॉन्ड्री ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत हासिल की है.
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक “सेवायोजन पोर्टल” 2016 से क्रियाशील है. हालांकि सरकार ने पोर्टल पर हुए रजिस्ट्रेशन के आंकड़े 2015 से दिए हैं.
पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के आंकड़े इस प्रकार हैं; 2015 में 7 लाख 57 हजार 637, 2016 में 6 लाख 19 हजार 704, 2017 में 3 लाख 26 हजार 280, 2018 में 4 लाख 22 हजार 430, 2019 में 9 लाख 85 हजार 459, 2020 में 3 लाख 04 हजार 836, 2021 में 4 लाख 62 हजार 830 और 2022 में 28 जुलाई तक 1 लाख 85 हजार 339 युवाओं ने रोजगार के लिए “सेवायोजन पोर्टल” पर रजिस्ट्रेशन कराया.
आरटीआई में हमारा दूसरा प्रश्न था कि सेवायोजन पोर्टल के जरिए अब तक कितने युवाओं को रोजगार मिला है? इसके जवाब में प्रशिक्षण एवं सेवायोजना के निदेशक ने 2017 से लेकर 28 जुलाई 2022 तक की जानकारी साझा की है.
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 में 63 हजार 152 अभ्यर्थी चयनित हुए. इसके बाद 2018-19 में 1 लाख 03 हजार 202, 2019-20 में 1 लाख 43 हजार 304, 2020-21 में 1 लाख 47 हजार 499, 2021-22 में 1 लाख 17 हजार 430 और 2022-23 में 30 जून तक 56 हजार 915 अभ्यर्थियों का चयन हुआ.
ऐसे में, 2017 से 28 जुलाई 2022 तक सेवायोजन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने वाले 26 लाख 87 हजार 174 युवाओं में से केवल 6 लाख 31 हजार 502 अभ्यर्थी ही चयनित हुए हैं. यानी रजिस्ट्रेशन कराने वाले युवाओं में से महज 23 प्रतिशत अभ्यर्थियों का ही चयन रोजगार के लिए हुआ.
बता दें कि 2017 के अप्रैल महीने में प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी. विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने “लोक कल्याण” नाम से अपना संकल्प पत्र जारी किया था. इस संकल्प पत्र में दावा किया गया था कि अगले पांच सालों में 70 लाख रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे, लेकिन आरटीआई से मिली जानकारी से पता चलता है कि जो दावे किए गए थे वो खोखले साबित हुए.
सेवायोजन पोर्टल और रोजगार मेले
यूपी सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए हर साल अलग-अलग जिलों में रोजगार मेलों का आयोजन करती है. इन मेलों में उन युवाओं को ही बुलाया जाता है जिन्होंने “सेवायोजन पोर्टल” पर रजिस्ट्रेशन कराया होता है.
3 अगस्त को गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “रोजगार मेला युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का आधार है.” यहां वे एक रोजगार मेले का उद्घाटन करने पहुंचे थे. यहां दिए भाषण में उन्होंने कहा कि “अवसरों की कोई कमी नहीं है, बस युवा खुद को तैयार करें.’’
न्यूज़लॉन्ड्री को आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 2017 से 30 जून 2022 तक 4 हजार 287 रोजगार मेले लगे. इस दौरान 6 लाख 31 हजार 502 अभ्यर्थी चयनित हुए. इसे मेलों के अनुपात में देखें तो हर रोजगार मेले में, केवल 147 युवाओं का चयन हुआ.
यहां यह सवाल भी उठता है कि जितने भी अभ्यर्थी “सेवायोजन पोर्टल” पर रजिस्ट्रेशन कराते हैं, क्या उन सभी को रोजगार मेले में बुलाया जाता है? इसके साथ एक स्वाभाविक प्रश्न यह भी है कि जिन अभ्यर्थियों का रोजगार मेले में चयन होता है, क्या उन्हें काम मिलता ही है?
बस्ती जिले के रहने वाले बालाजी प्रयागराज में रहकर पढ़ाई करते हैं. अभी उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की है. साल 2020 में उन्होंने “सेवायोजन पोर्टल” पर रजिस्ट्रेशन कराया.
बालाजी न्यूज़लॉन्ड्री से कहते हैं, ‘‘2020 में मैंने सेवायोजन पोर्टल पर 12वीं के सर्टिफिकेट के आधार पर रजिस्ट्रेशन किया. मेरा रजिस्ट्रेशन मई 2022 में खत्म हो गया. इस दौरान करीब 10 अलग-अलग कामों के लिए मैंने अप्लाई किया, लेकिन कभी भी कोई मैसेज या सूचना मुझे नहीं मिली. अखबारों में पढ़ते हैं कि रोजगार मेले में लोगों को काम मिला, लेकिन मुझे कभी किसी रोजगार मेले में आने के लिए मैसेज नहीं आया. ऐसे में मैं किसी रोजगार मेले में नहीं गया. मुझे पैसे की परेशानी थी. ऐसे में मैं चाहता था कि मुझे पार्ट टाइम जॉब वहां मिल जाए. ऐसे में मैं अपनी पढ़ाई पूरी कर पाऊंगा, पर ऐसा हुआ नहीं. अब दोबारा मैं ग्रेजुएशन स्तर पर रजिस्ट्रेशन करूंगा.’’
सरकार रोजगार मेले लगाने का दावा तो करती है, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि इन मेलों में कंपनियां ही नहीं पहुंचती हैं. बीते जुलाई महीने में हमीरपुर के आईटीआई कैंपस में एक रोजगार मेला लगा जिसमें कई कंपनियां आने वाली थीं, लेकिन कोई नहीं आई. ऐसे में मेले में आए युवाओं के फॉर्म जमा करा लिए गए.
महराजगंज जिले के रामकेश कुमार यादव ने ग्रेजुएशन के साथ आईटीआई से इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण भी लिया है. 2018 में उन्होंने “सेवायोजन पोर्टल” पर रजिस्ट्रेशन किया था जिसके बाद उन्हें गोरखपुर में आयोजित रोजगार मेले में बुलाया गया.
रामकेश बताते हैं, ‘‘अपने आसपास के कुछ लड़कों के साथ मैं भी रोजगार मेले में गया. वहां कई कंपनियां थीं. कुछ ने मौखिक तौर पर तो कुछ ने फॉर्म जमा करा कर बोला कि आपको कॉल किया जाएगा. मेरा भी फॉर्म एक कंपनी ने लिया लेकिन उनका कभी फोन नहीं आया.’’
रामकेश रोजगार मेले को ड्रामा बताते हैं. वे कहते हैं, ‘‘रोजगार मेले में कंपनियां सरकार के दबाव में आ तो जाती हैं, लेकिन रोजगार नाम मात्र के मिलते हैं. वे जानबूझकर कम वेतन देने की बात करते हैं. काम के अनुरूप वेतन नहीं देते. ऐसे में जिनका चयन होता है वो भी नहीं जाते हैं. रोजगार मेला बस दिखावापन है.’’
जहां एक तरफ युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही, वहीं दूसरी तरफ सरकार दावा कर रही है कि प्रदेश में रोजगार की कोई कमी नहीं है और बेरोजगारी दर में गिरावट आई है. 2021 में इंडिया स्पेंड पर प्रकाशित खबर के मुताबिक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में मार्च 2017 में बेरोजगारी दर 2.4 प्रतिशत थी, जो कि नवंबर 2021 में 4.8 प्रतिशत हो गई.
साईएमआईई के ही आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा ग्रेजुएट बेरोजगारों के मामले में उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर है. यहां ग्रेजुएशन तक पढ़ाई कर चुके 13.89 लाख युवा बेरोजगार हैं. इस सूची में पहले नंबर पर राजस्थान और तीसरे नंबर पर बिहार है.
युवाओं के रोजगार के लिए संघर्ष करने वाले संगठन “युवा हल्ला बोल” के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुपम, सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ें को शक की निगाह से देखते हैं.
अनुपम कहते हैं, ‘‘26 लाख तो लोगों ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा लिया, लेकिन लाखों लोग ऐसे हैं जिनको पोर्टल की जानकारी तक नहीं है. उन्हें कहीं काम नहीं मिल रहा. दूसरी बात, सरकार कह रही है कि छह लाख लोगों को रोजगार मेले के जरिए काम मिला है. सरकार को बताना चाहिए कि ये रोजगार कहां दिए गए."
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने कहा कि हमने 4 लाख 75 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी है. युवा हल्ला बोल के एक साथी ने आरटीआई से जानकारी मांगी कि यह नौकरियां किन विभागों में दी गई हैं, विभागवार जानकारी साझा करें. उसका जवाब आया कि ऐसा कोई आंकड़ा हमारे पास उपलब्ध नहीं है. यह सरकार सिर्फ नौकरी देने का विज्ञापन कर रही है, जबकि जमीन पर हालात बेहद खराब हैं.’’
न्यूज़लॉन्ड्री ने उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर को इस रिपोर्ट से संबंधित कुछ सवाल भेजे हैं. उनकी ओर से कोई भी जवाब आने पर इस खबर में जोड़ दिया जाएगा.
यह हाल सिर्फ उत्तर प्रदेश सरकार का नहीं है. बीते दिनों लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया था कि 2014 से 2022 तक सरकारी नौकरी के लिए कुल 22.05 करोड़ लोगों ने आवदेन दिया था, जिसमें से 7 लाख 22 हजार 311 लोगों की नियुक्ति हुई है
बता दें कि एक मार्च 2021 तक केंद्र सरकार के अंतर्गत विभिन्न मंत्रालयों में 9 लाख 79 हजार 327 पद रिक्त हैं.
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