Report
बार पर बवाल: स्मृति ईरानी के दावे और कागजों की हकीकत में इतना अंतर क्यों है?
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की बेटी द्वारा गोवा के असागाव इलाके में सिली सोल्स कैफ़े एंड बार को अवैध रूप से चलाये जाने के आरोपों से भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक रस्साकशी तेज़ हो गई है. इसको लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं. जिस प्रॉपर्टी में यह रेस्टोरेंट-बार स्थित है, ज़ोइश ईरानी उसकी किरायेदार हैं या मालिक? क्या उन्होंने इसे लीज़ पर लिया था? यह बात अभी तक साफ पता नहीं हुई है.
लेकिन सरकारी और महाराष्ट्र के कंपनी रजिस्ट्रार के पास दाखिल दस्तावेज़ों से ये ज़रूर पता चलता है कि इस बार और रेस्टोरेंट की कथित मूल कंपनी ऐटऑल फ़ूड एंड बीवरेजिज़ से जुड़े दो निदेशक, स्मृति ईरानी के पति और उनके बेटे से जुड़ी और भी अन्य कंपनियों में भी निदेशक हैं. मज़ेदार बात ये है कि ऐटऑल का का गोवा में वही पता दर्ज है,जो कि सिली सोल्स रेस्टोरेंट का है.
इसी साल अप्रैल में फ़ूड ब्लॉगर कुणाल विजयकर को दिए एक इंटरव्यू में ज़ोइश ईरानी ने गोवा में एक अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट खोलने के कारणों को विस्तार से बताया था. स्मृति ईरानी ने यह इंटरव्यू अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया था. उन्होंने इस पोस्ट में “गर्व” जताते हुए अपनी बेटी और रेस्टोरेंट-बार के सोशल मीडिया अकाउंट को भी टैग किया था.
गोवा के एक एक्टिविस्ट एरेस रॉड्रिग्स की एक आरटीआई के जवाब में मिली जानकारी से पता चलता है कि इस प्रॉपर्टी का निर्माण, आसागाव पंचायत से निर्माण और मरम्मत का लाइसेंस लिए बिना किया गया है, जो कि कानूनन वाजिब नहीं है. इसके अलावा भूमि से जुड़े दस्तावेज़ बताते हैं कि रेस्टोरेंट का एक हिस्सा किराये की जमीन पर (टेनेंटेड लैंड) है, जिसका इस्तेमाल गोवा के भूमि कानून के अनुसार खेती के अलावा किसी और व्यवसायिक उद्देश्य से नहीं किया जा सकता.
25 जुलाई, बुधवार को, रोड्रिग्स की शिकायत के बाद गोवा के पंचायत प्रबंधन विभाग ने ब्लॉक विकास अधिकारी को इन कथित उल्लंघनों की जांच करने और आवश्यक कार्यवाही करने का आदेश दिया है.
लगे हाथ एक और बात याद रखिए कि रोड्रिग्स को ही एक अन्य आरटीआई के जवाब से पिछले हफ्ते पता चला था कि इस रेस्टोरेंट के बार का लाइसेंस जाली तरीके से एक मृत व्यक्ति के नाम पर जारी करवाया गया था.. शराब परोसने के लिए मृत व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस को दोबारा जारी करवाया गया. फिलहाल गोवा के आबकारी विभाग ने “लाइसेंस धारक की 17 मई, 2021 में मृत्यु हो जाने के बावजूद” लाइसेंस के नवीनीकरण करवाने के लिए सिली सोल्स के संचालकों को एक कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है.
यह जानकारी सामने आने के बाद स्मृति ईरानी ने अपनी बेटी का इस बार और रेस्टोरेंट से कोई संबंध होने से इनकार किया. अपने बचाव में उन्होंने तर्क दिया कि न आरटीआई के जवाब, और न ही आबकारी विभाग के नोटिस में उनके परिवार का कोई जिक्र किया गया है. लगे हाथ ईरानी ने इन आरोपों की एक “साज़िश” बताते हुए इसकी निंदा की और तीन कांग्रेस नेताओं को कथित तौर पर उनके परिवार को बदनाम करने के लिए कानूनी नोटिस भेजा है.
ईरानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उनकी 18 साल की बेटी पढ़ाई कर रही हैं और वो कोई बार नहीं चलाती.
उपरोक्त जमीन, रेस्टोरेंट और शराब का लाइसेंस, तीनों ही, मृत पिता-पुत्र ऐबल डिगामा और एंथोनी डिगामा के नाम पर थे.
एंथोनी डिगामा ने दिसंबर 2020 में, रेस्टोरेंट चलाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगते समय असागाव पंचायत को दिए गए आवेदन में पता 452, बाउटा वाडो बताया था. मई, 2021 में उनकी मृत्यु हो गई. इसके कुछ महीने पहले जनवरी, 2021 में एंथोनी के नाम पर ही शराब बेचने के लिए आबकारी विभाग से लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया.
रोड्रिग्स का आरोप है कि रेस्टोरेंट का निर्माण 2019-20 में शुरू हुआ, जबकि आरटीआई का जवाब बताता है कि आसागाव पंचायत ने “2019 से अभी तक,आसागाव में बाउटा वाडो के सर्वे 236/22 में स्थित मकान 452 पर निर्माण या मरम्मत का कोई लाइसेंस एंथोनी डिगामा या किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दिया है.”
आसागाव पंचायत के उप-सरपंच कार्तिक केलकर इन आरोपों पर कहते हैं, “यह रेस्टोरेंट 2020 के अंत में अस्तित्व में आया. इससे पहले यह एक खुले खेत में बना छोटा सा घर था लेकिन वहां कोई नहीं रहता था. एंथोनी डिगामा अपने एक रिश्तेदार के साथ पंचायत के पास एक रेस्टोरेंट और बार शुरू करने की मंजूरी लेने आये. उन्हें बाउटा वाडो के मकान 452 के परिसर में ऐसा करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया. बिना मंज़ूरी के अगर कोई निर्माण किया गया है तो उसे वैध नहीं माना जा सकता.”
आसागाव के भूमि दस्तावेज़ बताते हैं कि मकान 452 भूमि सर्वे 236 में आता है,जहाँ दो सबडिवीज़न 21 और 22 हैं. जहां सबडिवीज़न 22 में मौजूद जगह एंथोनी के नाम है, वहीं सबडिवीज़न 21 में उनके पिता ऐबल की भूमि है जिस पर एकलौते किरायेदार के रूप में धर्मा वसु पोल खेती करते थे.
यह कहते हुए कि खेत सबडिवीज़न 21 में आता है, रोड्रिगेज कहते हैं, “रेस्टोरेंट बनने से पहले यहां एक खुले मैदान में 200 वर्गमीटर का एक मकान था. रेस्टोरेंट का निर्माण पंचायत की मंज़ूरी के बिना हुआ और उसके साथ जो टेनेंटेड लैंड (गोवा के कानून के तहत किराये पर खेती के लिए दी गयी भूमि) पर भी अतिक्रमण हुआ जो पूरी तरह से गैरकानूनी है.”
पंचायत प्रबंधन को की गई शिकायत में उन्होंने मांग की है कि आसागाव पंचायत रेस्टोरेंट को ध्वस्त कर दे.
न्यूज़लॉन्ड्री ने गोवा के पंचायतों के निदेशक सिद्धि हरलंकर,आसागाव पंचायत के सचिव राजेश असोलकर और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से कैफ़े और बार पर लगे आरोपों के विषय में और विशेष तौर पर रोड्रिग्स को मिले आरटीआई जवाब को लेकर प्रश्न पूछा है. उनकी और से कोई भी जवाब आने पर इस रिपोर्ट में जोड़ दिया जायेगा.
मकान 452 और ईरानी परिवार
राज्य के आबकारी विभाग के कमिश्नर को भेजी गयी एक शिकायत में रोड्रिगेज ने ऐटऑल फ़ूड एंड बीवरेजिज़ के नाम का उल्लेख किया था.न्यूज़लॉन्ड्री ने जब इसके बारे में पता किया तो पाया कि दिसंबर 2020 में स्थापित और एक महीने बाद जीएसटी संख्या 30AAIFE7039H1ZM से पंजीकृत इस कंपनी का मुख्य सांस्थानिक पता मकान 452, बाउटा वाडो है, जो कि सिली सोल्स कैफ़े एंड बार का पता भी यही है.
न्यूज़लॉन्ड्री के द्वारा देखी गयी महाराष्ट्र के कंपनी रजिस्ट्रार के पास दाखिल जानकारी के अनुसार, इसके पांच निदेशक हैं- राहुल वोहरा, गीता वजानी, हर्ष खनेजा, मंगेश जोशी और कनिका सेठ. वोहरा और जोशी, स्मृति ईरानी के पति ज़ुबिन ईरानी द्वारा संचालित और अन्य कंपनियों में भी निदेशक हैं.
राहुल वोहरा एक अभिनेता और फिल्म निर्माता हैं, वो ज़ुबिन और उनके बेटे ज़ौहर के साथ उग्राया मर्केंटाइल में निदेशक हैं. वो खुद भी स्पार्क 84 ऐडवर्क्स और मीठापानी नाम की दो कंपनियां संचालित करते हैं. इसमें ज़ुबिन की पूर्व पत्नी मोना ईरानी उनकी पार्टनर हैं.
मंगेश जोशी, ज़ुबिन, उनके बेटे ज़ौहर और उनकी भाभी मेहरनाज़ कैज़ाद ईरानी के साथ उग्राया फार्म्स में निदेशक हैं, श्री बावाजी फूड्स में ज़ुबिन के साथ निदेशक हैं और हेराम्बा लाइफ साइंसेज नाम की कंपनी में अपनी पत्नी मीनल जोशी और ज़ौहर ईरानी के साथ निदेशक हैं.
(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
Also Read
-
I-T dept cracked down on non-profits with a law that didn’t apply. Tribunals kept saying no
-
How much do candidates spend in elections?
-
Defections, bulldozers and a party in decline: Does Gaurav Gogoi have answers for all?
-
TV Newsance 338: Dhurandhar 2 just did a surgical strike on Lashkar-e-Noida
-
Fog of war or media smokescreen? When truth became a casualty in the Iran vs US-Israel conflict