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मलयालम न्यूज़ चैनल केस: राष्ट्रीय सुरक्षा के चलते हम प्रसारण को पुनः बहाल नहीं कर सकते- केंद्र सरकार
मलयालम न्यूज़ चैनल "मीडिया वन" के लाइसेंस की पुन: बहाली के मामले में बुधवार को गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया. इस दौरान गृह मंत्रालय ने कोर्ट से कहा कि हम लाइसेंस को पुनः बहाल नहीं करने के कारणों को सार्वजनिक नहीं कर सकते.
कोर्ट में दायर हलफनामे में गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस निर्णय के कारणों को न्यूज़ चैनल के मालिक को भी बताने की कोई जरूरत नहीं है. मंत्रालय ने इसके पीछे की वजह राष्ट्रीय सुरक्षा बताई है.
लाइव लॉ की खबर के मुताबिक गृह मंत्रालय ने हलफनामे में कहा कि ऐसे मामलों में, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू शामिल हों, प्रतिवादी, याचिकाकर्ता के लिए भी सुरक्षा क्लीयरेंस की नामंजूरी के कारणों का खुलासा करने के लिए बाध्य नहीं है."
इसके साथ-साथ भारतीय गृह मंत्रालय ने साक्ष्य अधिनियम की धारा 124 के तहत विशेषाधिकार का दावा किया और कहा कि इस खुलासे के राष्ट्रीय सुरक्षा पर "दूरगामी और अकल्पनीय परिणाम" हो सकते हैं. वह उन फाइलों को जरूर पेश कर सकते हैं जिनके आधार पर "सीलबंद लिफाफे में" प्रतिबंध लगाया गया था.
आप को बताते दें कि मलयालम टीवी न्यूज़ चैनल “मीडियावन" 31 जनवरी 2022 से ऑफ एयर है, क्योंकि भारतीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने चैनल के लाइसेन्स को पुनः बहाल करने से मना कर दिया था.
इस मामले में मीडिया वन की मालिकाना कंपनी मधयामा प्रसारण लिमिटेड ने केंद्र सरकार के खिलाफ केरल हाई कोर्ट का रुख किया था. जिस पर गृह मंत्रालय की फाइलें देखने के बाद, अदालत ने मंत्रालय के इस निर्णय में दखल देने से इंकार कर दिया था.
15 मई को सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय में जस्टिस डी वाई चंद्रचूर्ण की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने सरकार के फैसले पर रोक लगते हुए, चैनल को दोबारा प्रसारण करने की इजाजत दे दी थी. मामले को सुन रही बेंच, अदालत के सामने सरकार के द्वारा “बंद लिफाफे” में सबूत या कागजात पेश करने की “प्रक्रिया” की वैधता की समीक्षा करने को भी राजी हो गई थी.
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